वॉशिंगटन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन के तुरंत बाद अमेरिका ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की। इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए भारत की भूमिका अहम है। इसी कारण अमेरिका ने क्वॉड के तहत भारत के साथ साझेदारी मजबूत करने की अपील की है। अमेरिका यह संदेश ऐसे समय दे रहा है जब ट्रेड डील विवाद और बढ़े हुए अमेरिकी टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका संबंध तनाव में हैं।
क्वॉड का महत्व और चीन को रोकने की रणनीति
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंद-प्रशांत सुरक्षा के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का गठबंधन—क्वॉड—एक निर्णायक मोर्चा बन चुका है। अमेरिका ने माना कि चीन की आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए भारत की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि अमेरिका अपने सभी सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसी रणनीति बनाएगा जिससे किसी एक देश को “आधिपत्य” जमाने का मौका न मिले।
पाकिस्तान का केवल औपचारिक जिक्र, भारत प्रमुख केंद्र
अमेरिका की सुरक्षा रणनीति में पाकिस्तान का केवल एक बार जिक्र है—वह भी भारत-पाक सीजफायर के संदर्भ में। इससे साफ है कि अमेरिका की प्राथमिकता अब भारत के साथ सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाना है। पाकिस्तान के नेताओं द्वारा अमेरिका की खुशामद के बावजूद उसका उल्लेख लगभग गायब है।
रूस-भारत संबंध से अमेरिका की बढ़ती चिंता
अमेरिका की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत में व्लादिमीर पुतिन का भव्य स्वागत हुआ। भारत-रूस की गहरी दोस्ती अमेरिका के लिए पहले भी असहज रही है। अमेरिका ने भारत द्वारा लगातार रूसी तेल खरीदने के कारण भारी टैरिफ लगा दिया, जिससे भारत पर कुल अमेरिकी शुल्क 50% तक पहुँच गया है। इसके बावजूद भारत ने साफ कह दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में अपनी नीति नहीं बदलेगा।
अफ्रीका में क्रिटिकल मिनरल और भविष्य की साझेदारी
रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत, यूरोप और एशियाई सहयोगियों के साथ मिलकर अफ्रीका में क्रिटिकल मिनरल के लिए संयुक्त दावेदारी की बात कही है। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन द्वारा साउथ चाइना सी नियंत्रण की कोशिश को भविष्य की बड़ी सुरक्षा चुनौती बताया गया है—क्योंकि इससे वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर रोक, टोल या दखल संभव हो सकता है।

















