अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और पूर्व सांसद व संत डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार (15 दिसंबर, 2025) सुबह निधन हो गया। वे 75 साल के थे। मध्य प्रदेश के रीवा में उन्होंने आखिरी सांस ली।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 दिसंबर को संत वेदांती रीवा पहुंचे थे, जहां वे रामकथा सुना रहे थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। दिल्ली से एयर एंबुलेंस मंगाई गई, लेकिन घने कोहरे की वजह से वो लैंड नहीं कर पाई। इलाज के दौरान ही उनका देहांत हो गया। उनके उत्तराधिकारी महंत राघवेश दास वेदांती ने ये जानकारी दी। पार्थिव शरीर अभी रीवा के आश्रम में रखा है और जल्द ही अयोध्या लाया जाएगा।
राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका
डॉ. वेदांती राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही जुड़े रहे। वे राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य थे और आंदोलन के प्रमुख स्तंभ माने जाते थे। वे अयोध्या में हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास के शिष्य थे। वर्षों तक राम लला के सामने और हनुमानगढ़ी में रामकथा सुनाते रहे। संस्कृत के बड़े विद्वान थे और लोगों को राम भक्ति की बातें सरल तरीके से समझाते थे।
राजनीतिक और धार्मिक जीवन
वे भाजपा के टिकट पर सांसद रह चुके थे। अयोध्या में उनका वशिष्ठ भवन आश्रम है, जहां वे रहते थे। हिंदू धाम नया घाट पर भी उनका ठिकाना था। राम मंदिर के लिए हमेशा आवाज उठाते रहे और आंदोलन को मजबूती दी। कई लोग उन्हें आंदोलन का अग्रणी संत कहते थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया शोक
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि डॉ. वेदांती श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे, एक समर्पित संत। उनकी आत्मा को शांति मिले और शिष्यों को इस कष्ट को सहने की की ताकत मिले।

















