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क्या आप जानते हैं, 1961 में भारत ने कैसे वापस लिया गोवा?

वर्ष 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी तो मिल गई, लेकिन गोवा, दमन और दीव अभी भी पुर्तगाल के कब्जे में थे। ये इलाके न केवल ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा थे, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण थे।

Written byMahak SinghMahak Singh
Dec 15, 2025, 02:56 pm IST
in भारत
गोवा कैसे आज़ाद हुआ

Goa Liberation Day

आजादी से पहले भारत के कई हिस्सों पर अलग-अलग विदेशी ताकतों का शासन था। इनमें अंग्रेजों के अलावा फ्रांस और पुर्तगाल जैसे देश भी शामिल थे। वर्ष 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी तो मिल गई, लेकिन गोवा, दमन और दीव अभी भी पुर्तगाल के कब्जे में थे। ये इलाके न केवल ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा थे, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण थे। भारत सरकार ने पहले इन क्षेत्रों को शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए वापस लेने की कोशिश की। कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन पुर्तगाल सरकार गोवा, दमन और दीव को भारत को सौंपने के लिए तैयार नहीं हुई। जब सभी कूटनीतिक प्रयास असफल हो गए, तब भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया।

ऑपरेशन विजय

गोवा, दमन और दीव को पुर्तगालियों से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया, जिसे “ऑपरेशन विजय” नाम दिया गया। यह अभियान 18 दिसंबर 1961 को शुरू हुआ। इस ऑपरेशन में मुख्य भूमिका भारतीय थल सेना की थी। भारतीय सैनिकों ने गोवा की सीमा में प्रवेश किया, जिसके बाद पुर्तगाली सैनिकों ने मुकाबला शुरू कर दिया। भारतीय सेना ने बहादुरी से पुर्तगालियों का सामना किया, लेकिन पुर्तगाली सैनिक हार मानने को तैयार नहीं थे। उन्हें समुद्री रास्ते से बाहरी मदद मिलने की उम्मीद थी। इसी बीच भारतीय नौसेना के पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को युद्ध में उतारा गया। विक्रांत ने समुद्र में मजबूत घेराबंदी कर दी और पुर्तगालियों की समुद्री सहायता पूरी तरह रोक दी।

यह भी पढ़ें- भारत की आजादी के 14 साल बाद गोवा को मिली मुक्ति, यह कहानी हर भारतीय को जाननी चाहिए

गोवा, दमन और दीव का भारत में विलय

भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोतों ने गोवा के तट पर सैनिकों के साथ हमला किया। समुद्र के रास्ते पुर्तगाली ठिकानों को घेर लिया गया। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के विमानों ने गोवा में मौजूद सैन्य ठिकानों पर बमबारी की, जिससे पुर्तगाली सेना का मनोबल पूरी तरह टूट गया। 17 और 18 दिसंबर की मध्यरात्रि में भारतीय थल सेना ने गोवा में पूरी तरह प्रवेश कर लिया। पुर्तगाली सैनिकों ने औपचारिक प्रतिरोध किया, लेकिन भारतीय सेना ने 36 घंटे से भी कम समय में पूरे गोवा, दमन और दीव पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। अंततः 19 दिसंबर 1961 को पुर्तगाली गवर्नर जनरल वासालो डी सिल्वा ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस अभियान में भारत के 22 वीर सैनिक बलिदान हुए, जबकि पुर्तगाल के लगभग 30 सैनिक मारे गए। ऑपरेशन विजय भारत के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक जीत थी। इसके साथ ही लगभग 450 वर्षों से पुर्तगाल के कब्जे में रहे गोवा, दमन और दीव भारत का अभिन्न हिस्सा बन गए। यह अभियान भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, एकता और मजबूत सैन्य रणनीति का प्रतीक है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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