फिल्म के बारे में जानने से पहले जानिए कि रिलीज के एक हफ्ते में क्या-क्या हुआ है? सबसे पहले फिल्म के निर्माताओं ने ऐन वक्त पर दिल्ली और मुंबई दोनों जगह के प्रेस शो रद्द कर दिए, खबर आई कि बरसों से जमे कुछ फिल्म समीक्षक उसे अच्छा लिखने के लिए पैसे मांग रहे हैं. उसके बाद 6 अरब देशों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया. फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड की सर्वेसर्वा अनुपमा चोपड़ा (विधु विनोद चोपड़ा) ने फिल्म को अपने रिव्यू वीडियो में धोया तो लोगों ने सोशल मीडिया पर उसे इतना धोया कि रिव्यू वीडियो ही डिलीट करना पड़ा. फिर हृतिक रोशन ने एक्स (ट्विटर) पर फिल्म की तारीफ में पोस्ट करने के साथ साथ एक लाइन और जोड़ दी कि फिल्म की पॉलिटिक्स से मैं असहमत हो सकता हूं, इतनी गालियां पड़ीं कि उन्हें फिर से एक तारीफ में पोस्ट करनी पड़ी. लोगों ने हबीव तनवीर के भतीजी और उनकी गर्लफ्रेंड शबा आजाद के जेएनयू में नारे लगाते वीडियोज तक वायरल कर दिए थे. आखिर एक मूवी पर इतना बवाल क्यों है, पहला सवाल सबके दिमाग में यही आता है, बावजूद इतने विरोध के शनिवार की शाम 6 बजे तक केवल भारत में ही ये मूवी 222 करोड़ की कमाई कर चुकी थी.
ब्लैक टाइगर और धुरंधर का विवाद
जब कबीर खान की मूवी ‘एक था टाइगर’ आ रही थी, तब उसे ‘ब्लैक टाइगर’ की कहानी कहकर बेचा गया था, केस हुआ तो कबीर साफ मुकर गए. ऐसा ही ‘धुरंधर’ के साथ हुआ, कहानी मेजर मोहित शर्मा की बताई गई, लेकिन आदित्य धर ने बाद में मना कर दिया. लेकिन अब धुरंधर पर ‘ब्लैक टाइगर’ की छाप साफ दिखती है. सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘मिशन मजनूं’ भी उसी की कहानी थी और कुछ हद तक रणवीर कपूर की ‘जग्गा जासूस’ भी. लेकिन फिल्म की कहानी को कोई और मोड़ दे दिया जाता है और ‘ब्लैक टाइगर’ के परिवार को पैसे देने से बच जाते हैं. उसका नाम था रवीन्द्र कौशिक, गंगानगर (राजस्थान) का ये युवा सालों तक पाकिस्तान में रॉ का एजेंट रहा और मेजर के पद तक पहुंच गया था. बाद में एक दूसरे एजेंट इनायत मसीह की गिरफ्तारी से उसका खुलासा हुआ और 2001 में यातनाओं के चलते मियांवाली जेल में उसकी मौत हुई थी. उसे ‘ब्लैक टाइगर’ नाम इंदिरा गांधी ने दिया था.
कहानी और किरदारों की असलियत
जिस तरह ‘धुरंधर’ फिल्म में नकली नोटों के व्यापार या मुंबई हमले के लिए आने वाली कसाब की टोली की खबर हमजा अली मजारी (रणवीर सिंह) देता है, वो भी पाकिस्तान की कई बड़ी साजिशों की जानकारी भारत को देता रहता है. ‘मिशन मजनूं’ में दिखाया गया है कि कैसे टेलर बनकर रह रहा सिद्धार्थ मल्होत्रा पाकिस्तान के न्यूक्लियर रिएक्टर की जानकारी मिल सके, इसलिए सैलून से मिले वैज्ञानिकों के बालों को भारत भेजता है. हालांकि रवीन्द्र कौशिक उनके लिए बस मूल में होता है. धुरंधर में भी आपको वही दिखेगा, इसमें अनुराग कश्यप में ‘वासेपुर’, रजनीकांत की ‘काला’ में अंधेरी इलाके और यश की फिल्म ‘केजीएफ’ में कोलार गोल्ड फील्ड्स को जिस तरह दिखाया गया है, उसी तरह का सैट ‘धुरंधर’ में कराची के ‘ल्यारी टाउन’ का सैट लगाया गया है. ल्यारी कराची का ही सबसे घना बसा इलाका है, जो समय के साथ गैंग्स की आपसी लड़ाइयों और आर्म्स व ड्रग्स माफिया का गढ़ बनता चला गया. 2014 में इस दुनियां का छठा सबसे खतरनाक इलाका चुना गया था. 1 साल में 800 तक हत्याएं होंगी तो और क्या होगा? भुट्टो की पार्टी और एमक्यूएम इसमें सिंधियों और बलूचों की बहुतायत के चलते इसको राजनीतिक हथियार बनाती रहीं.
मूवी के असली गैंगस्टर किरदार
इसलिए मूवी में दिखाए गए पात्र यानी रहमान डकैत (अक्षय खन्ना), उबैर डकैत (दानिश पंडोर), एसपी असलम चौधरी (संजय दत्त) आदि सच्चे किरदार हैं, जिनमें उबैर तो अभी जिंदा भी है और जेल में है. जबकि रहमान डकैत पुलिस मुठभेड़ में 2009 में ही मारा गया था. इन सबकी आपसी अदावतों की कहानी भी असली है. उबैर के बाप की हत्या जब असलम पप्पू कर देता है, तो वह रहमान के गैंग में आ जाता है और एक दिन असलम पप्पू का सर काटकर फुटबॉल से खेलता है. लेकिन जो किरदार इन कहानियों में जोड़ा गया है, वो है रणवीर सिंह का. जो इन गैंग्स में शामिल होकर भारत को सारी सूचनाएं भेजता है और इनको आपस में लड़वाता भी है.
सीक्वल की संभावनाएं
पहली मूवी हालांकि केवल एक गैगस्टर की मौत पर ही खत्म हो जाती है, दूसरे हिस्से में आप मानकर चलिए कि उबैर को गैंग का नया लीडर बनते, अरशद पप्पू की हत्या करते, नवाज शरीफ के आदेश पर असलम चौधरी को पूरे ल्यारी टाउन को गैग्स से मुक्त करते और बाद में असलम चौधरी को बम विस्फोट में मरते भी देखेंगे. हो सकता है आदित्य धर उसे भी रणवीर का ही कारनामा बताएं क्योंकि 2017 में पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव का एक वीडियो जारी किया था, जिसमें वो असलम चौधरी को बम से उड़ाने की बात दबाव में कुबूल कर रहा था.
अभिनय और निर्देशन की प्रशंसा
ऐसे में एक बात तो मानकर चलिए कि आदित्य धर ने एक जबरदस्त एंटरटेनर मूवी बनाई है, ल्यारी टाउन की कहानियां भारतीयों का काफी मनोरंजन कर रही हैं. पत्रकार आदित्य राज कौल की रिसर्च काम आई है. उसमें जिस तरह से रणवीर सिंह ने अपनी ऊर्जा और हीरोगिरी को काबू में रखकर रोल किया है, उनकी मेहनत दिखती है. लेकिन सब पर भारी पड़े है अक्षय खन्ना, औरंगजेब के रोल से भी दो कदम आगे चले गए हैं. संजय दत्त, आईएसआई के मेजर इकबाल के रोल में अर्जुन रामपाल, सांसद जलाली के रोल में, राकेश बेदी और दानिश ने मूवी को और बेहतरीन बना दिया है.
माधवन का संगीत और लोकप्रिय सॉन्ग्स
माधवन अजीत डोभाल के रोल में है, जिनके ज्यादातर डायलॉग्स पीएम मोदी के फैंस को खुश करने वाले हैं. जैसे- “हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन हिंदुस्तानी ही है, पाकिस्तान तो नंबर 2 पर है”. सीक्वल में ये पांचों किरदार औऱ भी ज्यादा दमदारी से सामने आएंगे, ये तय है. फिल्म थोड़ी लम्बी है, लेकिन पैसा वसूल है. हवा हवा, चुपके चुपके और आफ़रीन आफ़रीन जैसे ट्रैकों का इस्तेमाल फिल्म को थोड़ा और बेहतर बनाते हैं.. लेकिन सबसे ज्यादा हिट हुआ है वो अरबी ट्रैक जिस पर अक्षय खन्ना बलूच बस्ती में मस्ती के साथ नाचते हैं. उस गाने के बोलों का मतलब ‘फस्ला या फास्ला’ यानी अब सबसे दूरी है, किसी से कोई मतलब नहीं, अपने में मस्त हूं, जैसे कि अक्षय खन्ना निजी जीवन में हैं भी.
फिल्म से परेशान लोगों की राजनीति
अब बात उन लोगों की जो इस मूवी से परेशान हैं, पॉलटिक्स या प्रोपेगंडा की बात कर रहे हैं. गलत इतिहास के शिकार हिंदी फिल्म निर्माताओं का अब तक का एजेंडा था कि हमारी विदेश नीति के विरुद्ध आतंक से भारत-पाक मिलकर लड़ें, जैसे टाइगर सीरीज, एजेंट विनोद आदि मूवीज में था. करीना, कैटरीना, दीपिका को आईएसआई एजेंट दिखाया गया. आतंकी हिंदू भी होते हैं, ये एजेंडा युवा पीढ़ी को फिल्मों के जरिए परोसी जाए. ‘जैसा मैं हूं ना’ और ‘वॉर’ जैसी मूवीज में किया गया, यहां तक कि ‘टाइगर 3’ और ‘योद्धा’ जैसी मूवीज में तो पाकिस्तान के पीएम को बचान का मिशन था. हृतिक की फिल्म ‘फाइटर’ में तो ‘हाउ इज द जोश’ का मजाक ‘हाउ इज द गोश्त’ बोलकर उड़ाया गया. ऐसे में कोई सच बताएगा, कश्मीर फाइल्स, उरी, आर्टिकल 370 या धुरंधर जैसी मूवीज बनाएगा, तो लोगों का हाजमा खराब होना अवश्यम्भावी ही है. क्रिटिक रेटिंग: 4
















