ब्रिटेन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। टेलीग्राफ के अनुसार एक निजी स्कूल के शिक्षक को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि उसने एक मुस्लिम बच्चे से यह कह दिया था कि ब्रिटेन ईसाई देश है। इस पर उन लोगों ने आवाज उठाई है जो कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के नाम पर जो कानून बने हैं, उनसे बोलने की आजादी भी छीनी जा रही है। इसका प्रयोग राष्ट्रवादियों की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है। यह घटना पिछले वर्ष की है, लेकिन फिर चर्चा में आ गई है।
ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। नए मामले में टेलीग्राफ ने बताया कि एक शिक्षक (जो अपना नाम नहीं बताना चाहता है) को इसलिए स्कूल से निकाल दिया गया क्योंकि उसने एक ऐसे मुस्लिम बच्चे से, जोकि सिंक में पैर धो रहा था, यह कह दिया कि ऐसा न करे। बच्चे ने शिकायत में कहा कि टीचर ने उससे कहा कि यह कोई मजहबी स्कूल नहीं है, बल्कि स्कूल है। यदि यह सब करना है तो एक मील दूर पर एक इस्लामिक स्कूल है, तो वह वहां पर जा सकता है। उसने बच्चों से यह भी कहा कि “ब्रिटेन अभी भी ईसाई देश है और इंग्लैंड के चर्च के मुखिया राजा हैं!”
शिक्षक के खिलाफ पुलिस जांच
सिंक में पैर धोने की घटना के बाद उस शिक्षक ने कक्षा छह के छात्र को सहिष्णुता के ब्रिटिश मूल्यों की महत्ता के विषय में बताया। बच्चों को यह बताने का दावा किया गया कि इस्लाम यूके में एक अल्पसंख्यक मजहब है। यह घटना पिछले वर्ष की है। शिक्षक का पक्ष रखने वाले वकील का कहना था कि यह स्कूल धर्मनिरपेक्ष है और प्लेग्राउंड में किसी भी प्रकार की प्रार्थना नहीं होती है। इसी कारण सिंक में पैर धोना भी इसी कारण के लिए बनाए गए प्रेयर कक्ष तक सीमित कर दिया है। स्कूल ने शिक्षक को पिछले वर्ष मार्च में निलंबित किया और उसके बाद उसे निकाल दिया गया। एक महीने बाद उसे पता चला कि उस पर पुलिस जांच बैठ गई है और बाद में इसे बंद कर दिया गया, लेकिन सेफगार्डिंग बोर्ड में यह जांच चलती रही।
क्या है सेफगार्डिंग बोर्ड?
अब प्रश्न उठता है कि सेफगार्डिंग बोर्ड क्या है? इसकी स्थापना बच्चों को उनके साथ काम कर रहे लोगों के हाथों से उत्पीड़न से बचाने के लिए की गई थी। शिक्षक, बड़ी कक्षा में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों से, जिनसे उन्हें खतरा हो सकता है इस बोर्ड का गठन किया गया था। सेफगार्डिंग अधिकारी ने यह निष्कर्ष निकाला कि टीचर ने इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, तो उसके बाद उसे बच्चों के साथ काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया। हालांकि अभी वह टीचर फ्री स्पीच यूनियन के समर्थन के साथ स्थानीय अधिकारियों के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। अपने ऊपर लगे प्रतिबंध को चुनौती दी।
फ्री स्पीच यूनियन का कहना है कि टीचर को गलत सजा दी गई और उसे पूरी जिंदगी भर के लिए काम करने से इसलिए प्रतिबंधित कर दिया गया क्योंकि उसने कुछ मुस्लिम बच्चों से यह कह दिया कि इंग्लैंड का असली रिलीजन ईसाई है। टेलीग्राफ के अनुसार इसके डायरेक्टर लॉर्ड यंग ने यह भी कहा कि चीजें इस सीमा तक देश में खतरनाक हो गई हैं कि एक टीचर एक सच कहने से खतरनाक कह दिया जाता है। अगर वह यह झूठ कह देता कि इस्लाम इंग्लैंड का आधिकारिक मजहब है, तो कुछ नहीं होता।
सोशल मीडिया पर हो रहा विरोध
इस घटना का सोशल मीडिया पर विरोध हो रहा है। कई नेता यह भी कह रहे हैं कि यदि किसी टीचर को केवल एक मुस्लिम बच्चे को यह कहने पर कि इंग्लैंड एक ईसाई देश है, नौकरी से निकाला ही नहीं जाता बल्कि काम से प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो यह कहा जा सकता है कि ब्रिटिश कानूनों पर ब्लेसफेमी कानून लागू हो चुके हैं।
उस टीचर के खिलाफ तीन मुस्लिम छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई थी।
















