बांग्लादेश में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपनी पांच साल की मुद्दत के बीच में ही इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की है। रॉयटर्स को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने उन्हें अपमानित किया और किनारे लगा दिया है। 75 साल के शहाबुद्दीन ने व्हाट्सएप के जरिए ढाका के अपने आधिकारिक आवास से यह बात कही। वे 2023 में शेख हसीना की आवामी लीग के नामजद उम्मीदवार के तौर पर बिना किसी विरोध के चुने गए थे। बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद ज्यादातर नाममात्र का होता है, असली ताकत प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास रहती है। शहाबुद्दीन सेना के कमांडर-इन-चीफ जरूर हैं, लेकिन अब वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव के बाद वे जाना चाहते हैं।
यूनुस सरकार ने कैसे किया किनारे?
शहाबुद्दीन का कहना है कि यूनुस ने उन्हें करीब सात महीने से मिलने तक की जहमत नहीं उठाई। सितंबर में एक ही रात में उनके सारे चित्र राजदूतावासों, महावाणिज्य दूतावासों और कांसुलेट्स से हटा दिए गए। वे बताते हैं, “राष्ट्रपति की तस्वीरें हर जगह लगी थीं, लेकिन रातोंरात सब गायब। इससे जनता को गलत संदेश गया कि शायद राष्ट्रपति को ही हटा दिया जाएगा।” उन्होंने यूनुस को इस बारे में चिट्ठी लिखी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। यूनुस के प्रेस सलाहकारों ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शहाबुद्दीन की प्रेस विभाग को भी कमजोर कर दिया गया, जिससे उनकी आवाज दब सी गई। वे कहते हैं, “मैं बहुत अपमानित महसूस कर रहा हूं। मेरी आवाज को दबा दिया गया है।”
यह सब तब हुआ जब जुलाई 2024 में कथित भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना का तख्तापलट कर दिया गया। उन्हें दिल्ली में शरण लेनी पड़ी। संसद भंग होने के बाद शहाबुद्दीन ही संविधान के मुताबिक इकलौते जिम्मेदार बने। लेकिन अब अंतरिम सरकार ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है। छात्र आंदोलन के दौरान कुछ ग्रुप्स ने उनका इस्तीफा मांगा था, लेकिन हाल के महीनों में कोई राजनीतिक दल ने ऐसा नहीं कहा। शहाबुद्दीन जोर देते हैं कि वे अब किसी पार्टी से बंधे नहीं, स्वतंत्र तरीके से काम कर रहे हैं। हसीना के भागने के बाद उन्होंने उनसे संपर्क की कोशिश के सवाल पर कुछ नहीं कहा।
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सेना प्रमुख से राब्ता बरकरार
शहाबुद्दीन सेना प्रमुख जनरल वाकेर-उज-जमान से लगातार संपर्क में हैं। जनरल ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि सेना सत्ता हथियाने का इरादा नहीं रखती। बांग्लादेश का इतिहास सैन्य हस्तक्षेपों से भरा है, लेकिन जनरल ने सार्वजनिक रूप से लोकतंत्र बहाल करने की बात कही है। आखिरी साल की हिंसा के दौरान सेना तटस्थ रही। शहाबुद्दीन कहते हैं, “मैं जाना चाहता हूं, बाहर जाना चाहता हूं। लेकिन चुनाव तक संविधान की वजह से रुकना पड़ेगा।”
12 फरवरी को होना है चुनाव
12 फरवरी को होने वाले चुनाव में आवामी लीग को हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। सर्वे बताते हैं कि खालेदा जिया की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी मजबूत दावेदार हैं। ये दोनों 2001 से 2006 तक गठबंधन में सत्ता में रहीं। शहाबुद्दीन का इस्तीफा चुनाव के बाद ही संभव लगता है, लेकिन उनका यह बयान राजनीतिक हलचल बढ़ा सकता है।

















