अमेरिका और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा जोरों पर है। इस बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी बयानों पर दो टूक जवाब दिया कि अगर अमेरिका को भारत का ऑफर पसंद आ गया है, तो उन्हें बिना देर किए एग्रीमेंट पर साइन कर देना चाहिए। ये बातें दिल्ली में हुए दो दिनों के व्यापारिक बातचीत के बाद आई हैं। अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने तो भारत के प्रस्ताव को “अब तक का सबसे अच्छा” बताया है, लेकिन गोयल ने ज्यादा डिटेल्स शेयर करने से कन्नी काट ली। उन्होंने कहा, “उनकी खुशी का स्वागत है, लेकिन अगर इतने खुश हैं तो डोटेड लाइन्स पर साइन क्यों नहीं कर देते?”
दो दिनों की सकारात्मक बातचीत
ये मीटिंग्स दिल्ली में हुईं, और दोनों तरफ से इसे “उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक” बताया जा रहा है। अमेरिकी डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर के नेतृत्व में हाई-लेवल डेलिगेशन आया था। उन्होंने गोयल से लेकर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल तक और कई मंत्रालयों के सीनियर अफसरों से मिले। भारतीय अफसरों का कहना है कि ये दौरा दोनों सरकारों की नीयत को दिखाता है – पुरानी मतभेदों को कम करने की। अब तक पांच से छह राउंड की नेगोशिएशंस हो चुकी हैं। स्विट्जर का ये पहला विजिट है, जब से वो तीन महीने पहले ऑफिस जॉइन किया।
फोकस नेगोशिएट करने से ज्यादा रिलेशनशिप बिल्डिंग पर था, जिसे गोयल ने “सबस्टैंशियल” कहा। दोनों देशों के लीडर्स के निर्देश पर पहला पैकेज जल्द पूरा करने की कोशिश है। इसमें टैरिफ रेशनलाइजेशन, सर्विसेज के लिए एक्सेस, डिजिटल ट्रेड और कुछ पुराने इश्यूज जैसे कमर्शियल टाईज के इरिटेंट्स शामिल हैं।
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मोदी-ट्रंप की फोन वार्ता
इन बातचीतों के बीच गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई। दोनों ने कॉम्प्रिहेंसिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की समीक्षा की, ट्रेड के अलावा रीजनल कोऑपरेशन पर भी चर्चा की। मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “ट्रंप के साथ बहुत गर्मजोशी वाली और इंगेजिंग बात हुई। हमने बाइलेटरल रिलेशंस की प्रोग्रेस देखी और रीजनल-इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स पर बात की।” उन्होंने ये भी कहा कि भारत-अमेरिका मिलकर ग्लोबल पीस, स्टेबिलिटी और प्रॉस्पेरिटी के लिए काम करते रहेंगे।
दांव पर बड़ा व्यापार
कहा जा रहा है कि ये डील दोनों देशों के लिए बहुत बड़ा दांव है। अफसरों का अनुमान है कि इससे बाइलेटरल ट्रेड 2030 तक 500 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है – यानी मौजूदा 191 बिलियन से दोगुना से ज्यादा। अमेरिका चौथे साल भी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में दोतरफा ट्रेड 131.84 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत ने 86.5 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया था।















