भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम तैनात करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मामलों से संबंधित स्थायी समिति ने डीआरडीओ को विभिन्न उपलब्धियों के लिए बधाई दी है। समिति ने मंगलवार (10 दिसंबर) को संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) पिछले पांच वर्षों में अपने स्वदेशी अनुसंधान के कारण 2,64,156 करोड़ रुपये बचाने में कामयाब रहा है।
DRDO ने स्वदेशी अनुसंधान से बचाए 2,64,156 करोड़ रुपये
समिति ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि पिछले, इस वर्ष में डीआरडीओ ने अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और मिसाइलों को विकसित करने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान डीआरडीओ अपने स्वदेशी अनुसंधान के कारण 2,64,156 करोड़ रुपये बचाने में कामयाब रहा है। समिति ने DRDO को उसकी विभिन्न उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि उसे पूरा विश्वास है कि पर्याप्त वित्तीय सहायता और कुशल मैनपावर मिलने पर डीआरडीओ देश के स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और विकास क्षमताओं को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी सफल प्रगति जारी रखेगा। सरकार ने अपने उत्तर में समिति को हाल के समय में हासिल की गई डीआरडीओ की कुछ और उपलब्धियों के बारे में भी बताया है।

2024 में पहली हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण
समिति को यह भी बताया गया कि लंबी दूरी की पहली हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का नवंबर 2024 में सफल परीक्षण किया गया था। मार्च 2024 में, डीआरडीओ ने अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग करते हुए अपनी पहली मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआइआरवी) प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण किया। यह प्रौद्योगिकी एक ही मिसाइल को विभिन्न लक्ष्यों पर कई वारहेड ले जाने और तैनात करने में सक्षम बनाती है।
वायु रक्षा प्रणाली को स्वदेशी रूप से विकसित किया
इसके अलावा, कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है और इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। यही नहीं मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ने भारतीय सेना के प्रोविजनल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (PSQR) मान्यता परीक्षणों को पूरा किया है।

ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों से हुआ फायदा
हाल ही में दिल्ली-एनसीआर को हवाई खतरों से बचाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया। इसके तहत देश दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए अपनी स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तैनात करेगा। यानी एनसीआर की सुरक्षा के लिए मल्टीलेयर इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (आइएडीडब्ल्यूएस) स्वदेशी एयर डिफेंस मिसाइलों जैसे क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (क्यूआरएसएएम) सिस्टम और वेरी शार्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम के साथ तैनात होगा। आइएडीडब्ल्यूएस पर एनसीआर में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी और यह भारतीय वायुसेना के अधीन होगा। दरअसल, इस साल मई में पाकिस्तान ने भारत को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था। इस दौरान भारत सरकार को स्वदेशी हथियारों से काफी फायदा हुआ था। स्वदेशी हथियार प्रणाली तैनात करने की योजना घरेलू रक्षा प्रणालियों के लिए को बढ़ावा देगी।
















