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India से बढ़ाओ रक्षा सहयोग, America के नए National Defense Authorization Act में सांसदों ने की Trump सरकार से अपील

विधेयक में चीन की सेना की बढ़ती ताकत और इलाके को लेकर उपजीं महत्वाकांक्षाओं को चुनौती देने के लिए एक समग्र रणनीति तैयार करने की बात की गई है। इस रणनीति के केन्द्र में भारत का होना दिखाता है कि भारत अब महाशक्ति है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Dec 8, 2025, 03:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
Representational Image

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अमेरिकी संसद में प्रस्तुत किए गए नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट 2026 विधेयक में अमेरिकी संसद ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक रक्षा नीतियों का विस्तार करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक साझेदारियों को मजबूत करने के प्रयास अपनाने पर जोर दिया है। यह एक्ट भारत के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। कल यानी 7 दिसंबर को अमेरिकी सांसदों की ओर से प्रस्तुत यह विधेयक अमेरिकी सुरक्षा और विदेश नीति की समीक्षा करके उसमें आवश्यक सुधार करने की सिफारिश करता है। इसके माध्यम से एक बार फिर चीन के साथ बढ़ते रणनीतिक टकराव के बीच अमेरिका की सामरिक स्थिति को और पुख्ता करने का प्रयास किया गया है।

नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट विधेयक हर साल अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए मुख्यत: बजट और नीति निर्धारण करता है। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए यह विधेयक खास तौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करता है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक महत्व का केंद्र बन चुका है। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और क्षेत्रीय दावों के प्रत्युत्तर में अमेरिका अपनी रक्षा साझेदारियों को मजबूत कर इस क्षेत्र में स्थिरता और अपनी पकड़ बढ़ाना चाहता है।

पिछले दिनों भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के सेक्रेटरी आफ वॉर पीट हेग्सेथ ने दोनों देशों के बीच 10 वर्ष के रक्षा सहयोग पर हस्ताक्षर किए

ये हैं एक्ट के मुख्य प्रावधान
इस विधेयक में अमेरिकी सांसदों ने रक्षा मंत्री को निर्देशित किया है कि वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी रक्षा गठबंधनों और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने के लिए प्रयास तेज करें। क्योंकि, इसका मकसद चीन के साथ लंबे वक्त से चले आ रहे रणनीतिक टकराव में अमेरिका को सामने वाले के मुकाबले मजबूत स्थिति में लाया जा सके। विधेयक पर गौर करें तो इसमें कुछ विशेष बिन्दु उभरते हैं, जैसे—
-रक्षा गठबंधन बढ़ाना: विधेयक में अमेरिका द्वारा स्थापित मौजूदा रक्षा गठबंधनों, जैसे क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया है। इन मंचों को क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक माना गया है।
-भारत के साथ रक्षा सहयोग को बढ़ावा: ट्रंप प्रशासन की नीतियों को जारी रखते हुए, कांग्रेस ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को और बढ़ाने की मांग की है। इसमें सैन्य अभ्यास, तकनीकी साझेदारी, हथियार प्रणालियों का आदान-प्रदान और सामरिक वार्ताओं को और अधिक करना शामिल है।
-प्रौद्योगिकी और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका द्वारा नई तकनीक और रक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्राथमिकता देने की बात की गई है ताकि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की उपस्थिति को और प्रभावी बनाया जा सके।
-साझेदार देशों को सना के लिहाज से और सक्षम बनाना: विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका को ऐसे सहयोगात्मक प्रयास करने चाहिए जिससे क्षेत्रीय साझेदारों की सेनाओं की ताकत बढ़े ताकि वे अपने क्षेत्र की रक्षा करने में अधिक प्रभावी हों सकें और वे इस हेतु अमेरिका पर कम निर्भर रहें।

सांसद ब्राड शेरमन भारत अमेरिकी रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं (फाइल चित्र)

चीन के साथ रणनीतिक टकराव
विधेयक में चीन की सेना की बढ़ती ताकत और इलाके को लेकर उपजीं महत्वाकांक्षाओं को चुनौती देने के लिए एक समग्र रणनीति तैयार करने की बात की गई है। इसमें आतंकवाद, समुद्री सीमा विवाद, साइबर सुरक्षा और सैन्य विस्तार जैसे अनेक क्षेत्रों का जिक्र आता है। अमेरिकी संसद ने स्पष्ट कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत करके ही चीन के बढ़ते प्रभाव को रोक सकता है।

भारत की भूमिका
विधेयक में बेशक, भारत के प्रमुख साझेदार के रूप में पहचाना गया है। अमेरिकी सांसदों ने यह माना है कि भारत क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए एक अहम कड़ी है। भारत-अमेरिकी रक्षा सहयोग के बढ़ने से दोनों देशों को सामरिक रूप से मजबूती मिल रही है। यह सहयोग खासकर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को रोकने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया है।

विधेयक में अमेरिकी संसद ने यह दर्शाया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा गठबंधनों को सुदृढ़ करना केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। चीन के साथ प्रतियोगिता की यह लड़ाई आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चों पर भी जारी रहने वाली है, लेकिन इसके केंद्र में सेनाओं में साझेदारी ही रहेगी।

नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट 2026 नि:संदेह अमेरिका की हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर सामरिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखते हुए एक रणनीति दर्शाता है। सामरिक दृष्टि से देखें तो इसका मकसद क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर चीन के प्रभाव को सीमित करना और अमेरिका को वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में एक कदम आगे रखना है। भारत के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी इस नीति का आधार दिखाई दे रहा है। हो न हो, यह दोनों देशों के लिए लंबे वक्त तक सामरिक लाभ सुनिश्चित करेगा।

Topics: हिंद-प्रशांतChinaरक्षा साझेदारीnational defense authorization act 2026indo us defense tiesभारतअमेरिकाModitrumpindo-pacific
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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