वंदे मातरम् बोलने पर मिलती थी, कोड़े खाने और जेल जाने की सजा, कैसे अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था इस गीत ने?
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वंदे मातरम् बोलने पर मिलती थी, कोड़े खाने और जेल जाने की सजा, कैसे अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था इस गीत ने?

प्रधानमंत्री ने बच्चों की बहादुरी का भी जिक्र किया। उस समय बच्चे भी जेल जाते, कोड़े खाते लेकिन फिर भी प्रभात फेरियों में 'वंदे मातरम्' का नारा लगाते। वे कहते थे कि जीवन भी चले जाए लेकिन मां और देश के लिए यह गीत बोलना जरूरी है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Dec 8, 2025, 01:19 pm IST
in भारत
प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बीते पांच दिनों में से तीन दिन हंगामेदार रहे। इस दौरान कई बिल पास कर राज्यसभा भेजे गए। साथ ही अब सोमवार को संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा अंग्रेजों ने भारत में “बांटो और राज करो” की नीति अपनाई। वे जानते थे कि बंगाल का बौद्धिक और सांस्कृतिक सामर्थ्य पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसलिए उन्होंने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, ताकि देश कमजोर हो। लेकिन अंग्रेजों का यह प्रयास सफल नहीं हुआ। ‘वंदे मातरम्’ गीत उस समय बंगाल और देश में एकजुटता का प्रतीक बन गया। यह गीत हर गली में गूंजने लगा और लोगों को प्रेरित करता रहा। अंग्रेज इस गीत से इतने डर गए कि उन्होंने इसे गाने और बोलने पर सजा का कानून बना दिया।

यह भी पढ़ें- Parliament Winter Session: पीएम मोदी ने बताया वंदे मातरम् की ताकत, कैसे यह गीत बना आजादी का प्रतीक?

प्रधानमंत्री मोदी ने सरोजनी बोष का उदाहरण दिया। बारिसाल की यह वीरांगना कहती थी कि जब तक वंदे मातरम् पर प्रतिबंध है, वह अपनी चूड़ियां उतार देंगी। उस समय चूड़ी उतारना महिला के जीवन की बड़ी घटना थी। यह दर्शाता है कि लोगों ने अपनी हिम्मत और जज़्बा कभी नहीं छोड़ा। प्रधानमंत्री ने बच्चों की बहादुरी का भी जिक्र किया। उस समय बच्चे भी जेल जाते, कोड़े खाते लेकिन फिर भी प्रभात फेरियों में ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाते। वे कहते थे कि जीवन भी चले जाए लेकिन मां और देश के लिए यह गीत बोलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि लोगों को एकजुट करने और देशभक्ति की प्रेरणा देने वाला भाव गीत है। यह दुनिया के इतिहास में अनोखा है क्योंकि इसने सदियों तक करोड़ों लोगों को प्रेरित किया और देश की आजादी की दिशा में शक्ति दी।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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