बरेली की रहने वाली 24 साल की नूरजहां ने हाल ही में धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपना लिया और पूनम नाम लेकर मंदिर में शादी कर ली। नूरजहां और उनके पति धर्मपाल की कहानी कुछ अलग ही है। दोनों करीब 7-8 महीने से रिलेशनशिप में थे और अब अपने नए जीवन की शुरुआत करने को तैयार हैं। पूनम का कहना है कि उन्होंने इस्लाम मत छोड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वे तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं से परेशान थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें इस्लाम में तीन बार तलाक दिया जा चुका है और हलाला की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ी। इसके अलावा, हिजाब और बुर्का पहनना पसंद नहीं था। इन सभी कारणों ने उन्हें हिंदू धर्म अपनाने की ओर प्रेरित किया।
पूनम ने आगे कहा कि वे पिछले पांच साल से भगवान राम की भक्ति करती रही हैं। वे नियमित रूप से मंदिर जाती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं। यही वजह थी कि उनके परिवार वाले अक्सर उन्हें इस धार्मिक गतिविधि के लिए डांटते थे। अपने आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के कारण पूनम ने हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया विधिपूर्वक पंडित केके शंखधार ने पूरी की। उन्होंने गायत्री मंत्र का जाप कर उन्हें हिंदू धर्म में शामिल किया। इसके बाद दोनों की शादी भी विधि-विधान से मंदिर में संपन्न हुई। इस शादी में लड़के और लड़की दोनों के परिवार के कोई सदस्य शामिल नहीं हुए। यह विवाह सुभाषनगर थाना क्षेत्र में संपन्न हुआ।
मूलरूप से लखीमपुर खीरी की रहने वाली नूरजहां दिल्ली के मुंडेरा इलाके में किराए पर रहती थीं। वे एक खिलौना बनाने वाली फैक्ट्री में काम करती थीं। यहीं उनकी मुलाकात बरेली के रहने वाले धर्मपाल से हुई। धर्मपाल भी दिल्ली में मजदूरी करते थे और किराए के कमरे में रहते थे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी हुई और प्यार में बदल गई। धर्मपाल ने नूरजहां को लेकर बरेली में पंडित केके शंखधार से संपर्क किया और दोनों की शादी की इच्छा जताई। शुक्रवार की शाम, पंडित जी ने विधि-विधान से दोनों की शादी संपन्न कराई। इस अवसर पर केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए गए, परिवारजन या रिश्तेदार शामिल नहीं हुए।
पूनम ने बताया कि उनका और धर्मपाल का रिश्ता 5 साल पुराना है। दोनों ने स्पष्ट किया कि यह विवाह पूरी तरह से उनकी अपनी इच्छा से हुआ है और किसी के दबाव में नहीं किया गया। उन्होंने कचहरी से हलफनामा भी तैयार किया जिसमें स्पष्ट लिखा गया कि उन्हें इस्लाम की प्रथाएं पसंद नहीं हैं। नूरजहां अपने परिवार के बारे में भी खुलकर बताती हैं। वे लखीमपुर खीरी के रहने वाले आसिफ अली की सबसे छोटी बेटी हैं। उनके परिवार में छह भाई-बहन हैं और वे सबसे छोटी हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।

















