भारतीय नौसेना दिवस: अब स्वदेशी ध्वज, आज ही के दिन पाकिस्तान की आधी नौसेना को किया ध्वस्त, गाजी का काम तमाम
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भारतीय नौसेना दिवस: अब स्वदेशी ध्वज, आज ही के दिन पाकिस्तान की आधी नौसेना को किया ध्वस्त, गाजी का काम तमाम

बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ( बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) में 4 दिसंबर सन् 1971 को भारतीय नौसेना ने "आपरेशन ट्राइडेंट" के अंतर्गत पाकिस्तान के कराची नौसैनिक अड्डे पर भयंकर आक्रमण करके ध्वस्त कर दिया था।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Dec 4, 2025, 09:17 am IST
inरक्षा
भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना 4 दिसम्बर 1971 क़ो पाकिस्तान के लिए काल बनकर उतरी थी। बांग्लादेश लिबरेशन वॉर में पाकिस्तान की आधी नौसेना को सूपड़ा साफ कर दिया था। 4 दिसम्बर को पाकिस्तानी नौसेना पर एकतरफा विजय के उपलक्ष्य में भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है, परन्तु सन 2022 से औपनिवेशिक प्रतीक भी ध्वस्त हुआ। अब नए स्वदेशी ध्वज के साथ यह दिवस मनाया जाता है।

“शं नो वरुणः” का तात्पर्य है, ‘जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें।’ यह भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य है,जो ‘तैत्तिरीय उपनिषद’ से लिया गया है। वरुण देव को जल का देवता माना जाता है। आज (4 दिसंबर) नौसेना दिवस है। आइये इस पावन दिन पर भारतीय नौसेना और इसकी ताकत के बारे में जानते हैं।

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारतीय नौसेना

बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ( बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) में 4 दिसंबर सन् 1971 को भारतीय नौसेना ने “आपरेशन ट्राइडेंट” के अंतर्गत पाकिस्तान के कराची नौसैनिक अड्डे पर भयंकर आक्रमण करके ध्वस्त कर दिया था। साथ ही 4 जहाज समुद्र में डुबो दिए एवं 2 जहाज नष्ट कर दिए थे। भारतीय नौसेना को कोई क्षति नहीं पहुंची थी। गौरतलब है कि इस आक्रमण में न केवल पाकिस्तान की आधी नौसेना का विध्वंस हुआ था, वरन् अर्थव्यवस्था की भी कमर टूट गई थी। इसलिए 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस के रूप में चुना गया,जिसे ऑपरेशन ट्राइडेंट के नाम से जाना जाता है।

1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध

सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय इसी दिन भारतीय नौसेना ने अपने सबसे बड़े अभियानों में से एक को अंजाम दिया और युद्ध में जीत सुनिश्चित की। 3 दिसंबर, 1971 की शाम पाकिस्तानी वायुसेना ने छह भारतीय हवाई अड्डों पर हमला किया। रात को तीन भारतीय युद्धक जहाजों- आइएनएस निर्घाट, आइएनएस निपाट और आईएनएस वीर ने मुंबई से कराची की ओर प्रस्थान किया। इन जहाजों ने दो पनडुब्बीरोधी युद्धपोतों- आइएनएस किल्तान और आइएनएस कैट्चाल के साथ मिलकर ट्राइडेंट टीम बनाई।

4 दिसंबर सन् 1971 की रात में इस अभियान के तहत भारतीय बेड़े ने चार पाकिस्तानी जहाजों को डुबा दिया और दो जहाजों को नष्ट कर दिया। कराची बंदरगाह और ईंधन डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया। खास बात यह रही कि भारतीय नौसेना को किसी तरह की क्षति नहीं हुई।

पीएनएस गाजी का हुआ यह हाल

युद्ध आगे बढ़ा, पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 वर्ष के लिए उधार ली पनडुब्बी पी. एन. एस. गाजी को भारत के जहाजी बेड़े आई एन एस विक्रांत को नष्ट करने के लिए लिए भेजा तब आई एन एस राजपूत को विक्रांत का स्वरूप देकर आगे बढ़ाया गया। आखिरकार राजपूत ने गाजी को खोज लिया और काल की तरह टूटा गाजी पनडुब्बी स्वाहा हो गयी।

आपरेशन ट्राइडेंट और आपरेशन पायथन के अंतर्गत एडमिरल कुरुविल्ला और वाइस एडमिरल कोहली के नेतृत्व में नेवी ने कहर बरपाया। 10 पाकिस्तानी युद्धपोत दफन कर करांची बेस के चिथड़े उड़ा दिए थे पाकिस्तान की आधी नेवी तबाह हो गयी थी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर ही टूट गई थी।

भारतीय नौसेना को मिला नया ध्वज

सन 1972 से प्रतिवर्ष 4 दिसंबर क़ो भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाने लगा था परंतु नौसेना का ध्वज तो विदेशी ही था, इसलिए सन 2022 में स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के आलोक में स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर प्रस्थान करते हुए, एक और दासता प्रतीक ध्वस्त कर दिया गया है। भारतीय नौसेना को मिला नया ध्वज।

भारतीय नौसेना को 2 सितम्बर 2022 को यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नया ध्वज प्राप्त हुआ और औपनिवेशिक रायल नेवी का अंतिम प्रतीक ध्वस्त हो गया। ध्वज का अनावरण कोच्चि में स्वदेशी विमान वाहक – 1(आई.ए.सी.)को ‘आई. एन. एस. विक्रांत को नौसेना में सम्मिलित करने दौरान हुआ है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की राजकीय मुहर

एक सेंट जार्ज के क्रास को दर्शाने वाली लाल पट्टी को अब छत्रपति शिवाजी महाराज की राजकीय मुहर के निशान से बदला गया है। नए ध्वज के ऊपरी कोने पर भारत के राष्ट्रीय तिरंगे झंडे और अशोक के चिन्ह को यथास्थिति रखा गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज की राजकीय मुहर को नीले और सोने के अष्टकोण के साथ दर्शाया गया है। यद्यपि परम श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय 2001 में इसे बदला गया था, परंतु सन् 2004 में पुनः ध्वज मूल स्वरूप में आ गया था।

औपनिवेशिक ध्वज इस तरह था

यह था औपनिवेशिक रायल नेवी का ध्वज जिसे बदला गया – एक सफेद पृष्ठभूमि पर रेड क्रॉस को सेंट जॉर्ज क्रॉस के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, इसका नाम एक ईसाई योद्धा के नाम पर रखा गया था , जो ईसाईयों के तृतीय धर्मयुद्ध में शामिल एक वीर योद्धा था। यह क्रॉस इंग्लैंड के ध्वज के रूप में भी कार्य करता है जो यूनाइटेड किंगडम का एक घटक है। इसे इंग्लैंड और लंदन शहर ने वर्ष 1190 में भूमध्य सागर में प्रवेश करने वाले अंग्रेजी जहाज़ों की पहचान करने के लिये अपनाया था।

अधिकांश राष्ट्रमंडल देशों ने अपनी स्वतंत्रता के समय रेड जॉर्ज क्रॉस को बरकरार रखा है, हालाँकि कई देशों ने वर्षों से अपने संबंधित नौसैनिकों पर रेड जॉर्ज क्रॉस को हटा दिया है। उनमें से प्रमुख हैं ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और कनाडा।अब दिनांक 2 सितंबर 2022 को भारत ने भी इस दासता के प्रतीक से मुक्ति प्राप्त कर ली है ।अतः 4 दिसंबर सन् 2022 से नए स्वदेशी ध्वज के साथ जल सेना दिवस मनाया जाता है।

 

Topics: ऑपरेशन ट्राइडेंटआईएनएस विराटस्वदेशी ध्वजपीएनएस गाजीइंडियन नेवीभारतीय नौसेना दिवसबांग्लादेश मुक्ति संग्रामपाकिस्तान नौसेना
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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