इन दिनों अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अखबारों की सुर्खियां कई तरह के दृश्य प्रस्तुत कर रही हैं। इसमें संदेह नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से साफ झलक रहा है कि वे वेनेजुएला का ‘सबक’ सिखाने के मूड में हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादूरो उन्हें फूटी आंख नहीं सुहाते क्योंकि ट्रंप उन्हें ‘ड्रग्स की तस्करी और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा’ बताते हैं। अमेरिकी युद्धपोत वेनेजुएला की सीमा के आसपास मंडरा रहे हैं और माहौल को आक्रामक बना रहे हैं। लेकिन तो भी रक्षा विशेषज्ञ पूर्ण युद्ध की बजाय आर्थिक दबाव और सीमित सैन्य टकराव की संभावना जता रहे हैं। राष्ट्रपति की धमकियों के जवाब में निकोलस मादुरो ने सैन्य तैयारी की घोषणा करके यह दिखाने की कोशिश की है कि वे ट्रंप की धमकियों में नहीं आने वाले। उधर चीन ने वेनेजुएला की संप्रभुता का समर्थन किया है। इन सबको देखें तो क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा तो मंडराता दिख ही रहा है।
अमेरिका ने वेनेजुएला के समुद्री क्षेत्र में अनेक युद्धपोत उतार दिए हैं, जैसे यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड व अन्य। इसके अलावा अमेरिकी लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं, जिन्हें ‘ड्रग तस्करी रोकने की तैयारी’ बताया जा रहा है। वेनेजुएला ने इसे ‘अघोषित युद्ध’ करार दिया है और नागरिकों से सैन्य प्रशिक्षण लेने और सेना में भर्ती होने का आह्वान किया है। इधर संयुक्त राष्ट्र ने इन कार्रवाइयों से ‘क्षेत्रीय शांति को खतरे’ की चेतावनी दी है। यूएन के सहायक महासचिव मिरोसलाव जेंका ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
मादुरो ने ट्रंप को यह सलाह भी दी है कि अफगानिस्तान जैसी लंबी जंग से बचें। लेकिन साथ ही यह दावा भी किया है कि उनकी 5000 मिसाइलें और लाखों मिलिशिया तैयार हैं। ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को ड्रग माफिया से जोड़ रखा है। उसके तेल आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए हुए हैं।

भू राजनीति के जानकारों का मानना है कि अमेरिका हमले के लिए ड्रग तस्करी जैसे बहाने तलाश रहा है, लेकिन पूर्ण आक्रमण की बजाय वह दबाव की रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। मादूरो ने तो इसे ‘हॉलीवुड स्टाइल स्क्रिप्ट’ बताया है, जो सैन्य हस्तक्षेप का रास्ता साफ करती है।

कई विशेषज्ञों के अनुसार, चीन द्वारा वेनेजुएला की संप्रभुता रक्षा की धमकी से अमेरिका हिचकिचा सकता है, लेकिन ट्रंप की आक्रामक नीति से सीमित टकराव संभव है। दक्षिण अमेरिकी भू-राजनीति में यह हलचल बड़ा संकट पैदा कर सकती है। दरअसल हाल ही में, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मादुरो को उनकी सालगिरह की बधाई देते हुए संदेश में कहा कि चीन वेनेजुएला की संप्रभुता का समर्थक है। यह एक प्रकार से अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी टकराव का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन तेल हितों के कारण सीधे आमने-सामने नहीं आएगा, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक समर्थन देगा। इससे वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध की संभावना कम है।
बहरहाल, आज की परिस्थिति में तो लगता है अमेरिका अपने तेवर और आक्रामक करेगा जिससे मादूरो नरम पड़ें। यानी तनाव बढ़ने की पूरी आशंका है। सीधे युद्ध भले न हो, लेकिन प्रतिबंध और नौसेना की गतिविधियों के बढ़ने की संभावना तो है। वेनेजुएला की सैन्य तैयारी और अमेरिकी तैनाती से कैरेबियाई क्षेत्र में अस्थिरता व्याप्त है।

















