भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा आने वाले दिनों में पूर्वी भारत का ‘एमएसएमई गेटवे’ बनकर उभरेगा। वे स्थानीय रेल सदन में लघु उद्योग भारती ओडिशा द्वारा आयोजित ‘ओडिशा इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव 2025’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन प्रदेश में उद्यमिता और औद्योगिक नवाचार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपार संभावनाओं से परिपूर्ण ओडिशा आज देश के सबसे आकर्षक एमएसएमई निवेश गंतव्यों में शामिल हो चुका है।
उन्होंने कहा कि साढ़े चार करोड़ ओडियावासियों की आकांक्षाओं को साकार करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों के कारण यह परिवर्तन संभव हो पाया है। बीते वर्षों में राज्य ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। गो स्विफ्ट (Go-Swift) सिंगल विंडो प्रणाली की वजह से अब औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देने में महीनों नहीं, बल्कि एक दिन भी लग सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में राज्य ने बुनियादी ढांचा विकास पर अपने जीडीपी का 6.1 प्रतिशत निवेश किया है, जो देश में सर्वाधिक है।
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि ओडिशा के औद्योगिक विकास में लघु उद्योग भारती की अहम भूमिका रही है। संगठन ने अब तक 980 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को सहायता प्रदान की है और व्यापक रोजगार सृजित करने में योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि विश्व के कुल 90 प्रतिशत व्यवसाय और 50 प्रतिशत रोजगार लघु उद्योग क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि औपचारिक क्षेत्र की 10 में से 7 नौकरियां एमएसएमई से आती हैं। इसलिए लघु उद्योग न केवल अर्थव्यवस्था का आधार हैं बल्कि उसे समृद्ध भी करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा परिश्रम, नवाचार और उद्यमिता की भूमि है।
उन्होंने बताया कि लघु उद्योग भारती भुवनेश्वर में अपना क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने की योजना बना रहा है, जो औद्योगिक संस्थानों और प्रशासन के बीच जिला तथा जमीनी स्तर पर सहयोग को और मजबूत करेगा। “विकसित ओडिशा—विकसित भारत” केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है। हमारा लक्ष्य है कि ओडिशा पूर्वी भारत के एमएसएमई सेक्टर का प्रवेश द्वार बने।
राज्य के एमएसएमई क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिपिली, रघुराजपुर, संबलपुर और गोपालपुर के कारीगरों की कला आज विश्वभर में पहचानी जाती है। राज्य का युवा वर्ग IT, एनीमेशन, फिनटेक और स्टार्टअप सेक्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित SHG इकाइयाँ विश्वस्तरीय उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। सुଭद्रा योजना को आज हर घर में सराहा जा रहा है। यह गरीब, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म व्यवसायों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का साधन है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के चलते 17 लाख “लक्ष्मी दिदी” तैयार हुई हैं, और आने वाले दिनों में महिलाओं के बीच उद्यमिता की नई परंपरा विकसित होगी।
कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री गोकुलानंद मलिक ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा संभावनाओं की भूमि है और तेज विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। सरकार स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, एमएसएमई को सशक्त बनाने, कारीगरों को सहयोग देने और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है, जिससे राज्य का औद्योगिक परिदृश्य बदल जाएगा।
कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू, राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश चंद्र, और लघु उद्योग भारती ओडिशा के अध्यक्ष गोपाल दास अग्रवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

















