नई दिल्ली, (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने छह दिसंबर को समाप्त हो रही वक्फ संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कारण से उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है, तो समय सीमा बढ़ाने की मांग वक्फ ट्रिब्यूनल से की जा सकती है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये समय-सीमा बढ़ाने से इनकार किया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इस पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए छह महीने का समय दिया गया था, लेकिन वक्फ कानून पर अंतरिम फैसला आने के ही पांच महीने बीत गए। ऐसे में अब रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी देने में बहुत कम वक्त रह गया है। इस समय सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से उम्मीद पोर्टल के सर्वर में हो रही समस्या का मसला उठाया गया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि संशोधन 8 अप्रैल से लागू हुआ और पोर्टल 6 जून को बना। नियम 3 जुलाई को आए और कानून को लेकर अंतरिम आदेश 15 सितंबर को आया। उन्होंने कहा कि छह महीने की समय-सीमा काफी कम है, क्योंकि सौ डेढ़ सौ साल पुराने वक्फों में वक्फ की जानकारी मिल पाना कठिन है और बिना इन विवरणों के पोर्टल अपलोड स्वीकार नहीं करता है।
तुषार मेहता ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बड़ी संख्या में वक्फ पहले ही रजिस्टर्ड हो चुके हैं। तब वकील एमआर शमशाद ने कहा कि मुद्दा रजिस्ट्रेशन का नहीं है बल्कि रजिस्टर्ड संपत्तियों के डिजिटाइजेशन का है और यह पहलू अंतरिम आदेश में नहीं देखा गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि धारा 3बी के प्रावधान के मुताबिक ट्रिब्यूनल समय सीमा बढ़ा सकता है, इसलिए सभी आवेदक अंतिम तिथि से पहले ट्रिब्यूनल से संपर्क करें।















