साउथईस्ट एशिया में भारी मानसून की बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया में बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 460 लोग मारे जा चुके हैं। ये सब एक ट्रॉपिकल स्टॉर्म की वजह से और बिगड़ गया। लाखों लोग बेघर हो गए, हजारों छतों पर फंसे हुए हैं, रेस्क्यू टीमों का इंतजार कर रहे हैं। हर साल जून से सितंबर तक मानसून आता है, लेकिन क्लाइमेट चेंज ने इसे और खतरनाक बना दिया है—बारिश ज्यादा तेज, बाढ़ अचानक, हवाएं तूफानी। इंडोनेशिया और थाईलैंड में ये मौतें हाल के सालों की सबसे ज्यादा हैं।
मौतों का आंकड़ा और प्रभावित इलाके
कुल मौतें 460 से ऊपर पहुंच गई हैं। इंडोनेशिया में सुमात्रा द्वीप पर सबसे ज्यादा तबाही हुई। यहां 300 से ज्यादा लोग मर चुके हैं—उत्तर सुमात्रा में 303 मौतें, पश्चिम सुमात्रा में 61, और अचे प्रांत में कम से कम 35। 279 लोग अभी भी लापता हैं। थाईलैंड में आठ प्रांतों में 162 मौतें हुईं, जिनमें से 145 सिर्फ सोंगख्ला प्रांत में। वहां पानी 3 मीटर तक ऊंचा हो गया, दस सालों में सबसे भयानक बाढ़। मलेशिया के उत्तरी पेरलिस राज्य में दो लोग मारे गए। थाईलैंड में 14 लाख घर (38 लाख लोग) प्रभावित हुए। सुमात्रा के तीन प्रांतों में 80,000 लोग बेघर हो गए, सैकड़ों अभी भी फंसे हैं।
300 साल की बारिश का रिकॉर्ड तोड़ा
ये बाढ़ ने आम जिंदगियों को उजाड़ दिया। थाईलैंड के हत याई शहर में शुक्रवार को 335 मिमी बारिश हुई—300 सालों में सबसे ज्यादा। वहां एम्फॉर्न काओफेंगक्रो नाम की एक औरत और उसके सात परिवार वालों ने 48 घंटे घर की दूसरी मंजिल पर टेबल, खिड़की के फ्रेम और वॉशिंग मशीन पर चढ़े रहकर जिंदगी बचाई। दुकानदार राचाने रेम्स्रिंगम की जनरल स्टोर ‘मैडम यॉन्ग’ लूटी गई, तोड़ी गई—हजारों डॉलर का नुकसान। हत याई के अस्पताल का मोर्चरी भर गया, तो बॉडीज को रेफ्रिजरेटेड ट्रकों में रखना पड़ा। सुमात्रा में 28,400 लोग सरकारी शेल्टर्स में भागे। गाड़ियां, बाइक सब बह गईं, जैसे पानी घटा तो मलबा नजर आया।
रेस्क्यू की कोशिशें
रेस्क्यू टीमें जी-जान लगा रही हैं। इंडोनेशिया में सुमात्रा के सबसे बुरे इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। 3,500 पुलिस वाले तैनात हैं—लापता लोगों की तलाश, राहत सामान बांट रहे। उत्तर सुमात्रा के लंगकट में लोगों को निकाला गया। शनिवार तक पानी थोड़ा घटा, तो सर्च और क्लीन-अप शुरू हो गया। पश्चिम सुमात्रा में क्लाउड-सीडिंग ऑपरेशन प्लान किया—बारिश कम करने के लिए। थाईलैंड में भी रेस्क्यू चल रहा, लेकिन सरकार पर सवाल उठ रहे।चुनौतियांसबसे बड़ी दिक्कत है पहुंच।
सुमात्रा के पहाड़ी इलाकों में रास्ते बंद, भूस्खलन ने सब रोक दिया। थाईलैंड में जनता गुस्से में—सरकार ने हालात का अंदाजा गलत लगाया, क्राइसिस हैंडलिंग में गलतियां कीं। दो लोकल अफसर सस्पेंड हो चुके। हत याई जैसे शहरों में लोग घरेलू सामान से चिपककर बचे, लेकिन कई जगह मदद देर से पहुंची। बारिश रुक गई, लेकिन मलबा साफ करना और बीमारियां फैलने का डर सता रहा।












