'राष्ट्र' से भिन्न है 'नेशन' की अवधारणा : मोहन भागवत
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‘राष्ट्र’ से भिन्न है ‘नेशन’ की अवधारणा : मोहन भागवत

नागपुर के राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में RSS सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने ‘राष्ट्र’ और ‘नेशन’ के मूलभूत अंतर को समझाते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रभाव सहयोग, बंधुता और एकात्म संस्कृति से जन्मा है जबकि पश्चिमी नेशन की अवधारणा संघर्ष और वर्चस्व पर आधारित है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 29, 2025, 06:25 pm IST
inभारत, संघ @100, महाराष्ट्र

नागपुर । शनिवार को नागपुर के रेशीमबाग में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘राष्ट्र’ और ‘नेशन’ की अवधारणाओं के मूलभूत अंतर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रभाव प्राचीन, आत्मीय और एकता पर आधारित है, जबकि पश्चिमी देशों की ‘नेशन’ की अवधारणा संघर्ष, वर्चस्व और आक्रामकता के इतिहास से उत्पन्न हुई है।

समाज में संघ के स्वयंसेवकों को ‘राष्ट्रवादी’ कहा जाता है, इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा- “हम विवाद उत्पन्न करने वाले नहीं हैं। संघर्ष भारत का स्वभाव ही नहीं है। हमारी परंपरा परस्पर सहयोग, मित्रता और सामूहिक यात्रा की है। भारत का ‘राष्ट्र’ सत्ता, सीमाओं या राजनीतिक संरचना पर आधारित नहीं है। यह संस्कार, परोपकार, विविधता में एकता और मानवता की भावना से जन्मा है।

उन्होंने कहा- ‘नेशन’ की अवधारणा अंग्रेजों ने हम पर थोपी, लेकिन ‘राष्ट्र’ सिर्फ नेशनलिज़्म नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रत्व’ है।

सरसंघचालक जी ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी राष्ट्रवाद की आक्रामकता दो महायुद्धों का कारण बनी, जबकि भारतीय राष्ट्रभाव में अहंकार नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुंबकम्” और “परोपकार” की चेतना है।

उन्होंने कहा- धर्म, भाषा, भोजन और क्षेत्रीय भिन्नताएं होने के बावजूद सभी भारतीय भारतमाता की संतान होने का एकात्म भाव साझा करते हैं, जो हमें जोड़कर रखता है।

उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा- “राज्य व्यवस्था बदली, पराधीनता और स्वतंत्रता के चरण आए, लेकिन भारतीय राष्ट्रभाव अखंड रहा। सत्ता स्थापित होने से पहले ही राष्ट्र अस्तित्व में था।

सरसंघचालक जी ने महात्मा गांधी का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन ने भारतीय विविधता को विभाजन का रूप दिया, जबकि भारत मूलतः एकात्म संस्कृति का देश है।

इस दौरान सरसंघचालक जी ने युवा साहित्यकारों को संबोधित करते हुए कहा कि नेशन’ का अनुवाद ‘राष्ट्र’ करने से अवधारणा का भावार्थ बदल जाता है। मैं राष्ट्रवादी नहीं, मैं राष्ट्रीय हूं। गलत शब्दों के उपयोग से समाज में भ्रम पैदा हो सकता है और संस्कृति पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने लेखक समुदाय से आग्रह किया कि वे मूल सिद्धांतों का अध्ययन कर अनुभव-आधारित लेखन करें।

उन्होंने कहा कि स्वातंत्र्य और समानता एक साथ नही आ सकती है, जब तक उसमें बंधुता न हो। जब लोग एक सामन होते हैं तो उसमें स्वतंत्रता नहीं रहती है वहीं जब लोग स्वतंत्र होते हैं, तब उसमें सामनता का अभाव होता है। इसलिए भारतीय अवधारणा में स्वतंत्रता और समानता के साथ बंधुता भी होती है।

Topics: Indian Nation ConceptWestern Nationalism CritiqueRashtra Not NationNagpur Book Festival SpeechBhagwat Remarks on NationalismIndian Unity Diversity ConceptMohan Bhagwat Rashtra vs NationRSS Chief Statement Nagpur
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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