बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ एक बार फिर हिंसा भड़काई गई है। ताजा मामला भक्ति गीत बाउल गायक अबुल सरकार की गिरफ्तारी को लेकर है। उनको ईशनिंदा के तहत पकड़े जाने के विरोध में जुटे उनके प्रशंसकों, समर्थकों पर मजहबी कट्टर इस्लामी गुट ने हमला बोलकर कई लोगों को घायल कर दिया है। पिछले दिनों बाउल गायक अबुल सरकार को गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद मानिकगंज में अबुल सरकार की रिहाई की मांग कर रहे उनके समर्थकों पर ‘तौहीदी जनता’ नामक इस्लामी समूह ने हमला किया। हमलावर खुलेआम हिंसक नारे लगा रहे थे। यह ‘तौहीदी जनता’ नामक कट्टर इस्लामी गुट पिछले कुछ महीनों से हिन्दुओं पर हमले करता आ रहा है। जनवरी 2025 में उस इस्लामी देश में बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्ति गिराने की घटना में भी इसी गुट का हाथ माना जाता है।

दरअसल अगस्त 2024 के बाद से उस देश में हिन्दू अल्पसंख्यकों का मजहबी हिंसा का निशाना बनाया जा रहा है। इसमें धीरे धीरे वृद्धि ही देखी गई है। हिन्दुओं पर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनमें हिन्दुओं के धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों, लोगों और उनके प्रतिष्ठानों पर हमले करने की अनेक घटनाएं शामिल हैं। इसके खिलाफ बुद्धिजीवी, कलाकार और नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

बांग्लादेश में लोकप्रिय बाउल गायक अबुल सरकार को गत 19 नवंबर 2025 को ‘ईशनिंदा’ की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अबुल सरकार ने इस्लाम और अल्लाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है, जबकि गायक के सहायक ने आरोपों को झूठा और संदर्भ से परे बताया था। लेकिन अबुल की गिरफ्तारी हुई। उसके तुरंत बाद अदालत परिसर और आसपास के इलाकों में कुछ इस्लामी गुटों ने अबुल सरकार के समर्थकों को धमकाना शुरू कर दिया।
‘तौहीदी जनता’ गुट और उसकी हिंसा
‘तौहीदी जनता’ नामक इस्लामी गुट अपनी कट्टर मजहबी सोच के लिए जाना जाता है। इस साल जनवरी से ही वह लगातार हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा में सक्रिय रहा है। जनवरी 2025 में शेख मुजीबुर्रहमान की प्रतिमा को ढहाने में भी इसी गुट का नाम आया था। अब इस महीने इसी गुट ने अबुल सरकार के समर्थकों पर हमला किया, इस पूरे कृत्य के दौरान खुलेआम हिंसक नारे लगाए गए और लाठी-डंडों से हिन्दुओं को घायल किया गया। चार लोग तो गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस हिंसा ने एक बार फिर दिखाया है कि उस देश में मजहबी असहिष्णुता चरम पर है।

वैसे भी, बांग्लादेश में लगभग दो साल से पांथिक अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के खिलाफ हिंसा बढ़ती ही गई है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के बाद से 200 से अधिक ठिकानों पर तोड़—फोड़ हुई है, सांस्कृतिक कार्यक्रमों समेत कई जगहों पर हमले हुए हैं। हिन्दुओं के घरों और व्यवसायों पर भी कई बार हमले और तोड़फोड़ हुई है।
कहना न होगा, शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने और मोहम्मद यूनुस की सरकार के आने के बाद कट्टरपंथी ताकतें और सक्रिय हुई हैं। बहुत से इलाके भय और दमन का अनुभव कर रहे हैं। विरोध में बुद्धिजीवियों, छात्रों और सांस्कृतिक संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं और सरकार से सुरक्षा की मांग की है।

हिन्दुओं पर बढ़ती हिंसा की वजह से देश के अंदर सभ्य समाज और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है। बुद्धिजीवी, कलाकार और नागरिक समूहों ने हिंसा की निंदा करते हुए सरकार के कदमों पर सवाल उठाए हैं। जबकि सरकार ने कुछ मामलों को राजनीतिक संघर्ष बताया है। लेकिन इसके पीछे कुछ है तो वह है मजहबी उन्माद।

















