भुवनेश्वर । ओडिशा विधानसभा गुरुवार को एक ऐतिहासिक और अत्यंत भावनात्मक क्षण का साक्षी बना , जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में पहली बार सदन को संबोधित किया। यह अवसर न केवल औपचारिक महत्व का था, बल्कि राष्ट्रपति के लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास रहा। उन्होंने इस संबोधन को “होमकमिंग” यानी घर वापसी करार दिया और कहा कि इसी सदन ने उनके राजनीतिक जीवन की नींव रखी थी।
जिन्होंने रायरंगपुर से विधायक के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने व बाद में ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा का हर मोड़ इस विधानसभा के अनुभवों से प्रभावित रहा। उन्होंने कहा कि आज मैं जो भी हूं, उसका श्रेय इस सदन को जाता है। कई राज्यों की विधानसभाओं को संबोधित करने का अवसर मिला है, लेकिन ओडिशा विधानसभा को संबोधित करना मेरे लिए अत्यंत विशेष है। यह सचमुच घर वापस लौटने जैसा है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा विधानसभा ने उन्हें न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण दिया, बल्कि नेतृत्व, संवैधानिक जिम्मेदारियों और जनसेवा के मूल्यों को भी सिखाया। उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद को भी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
विधायकों को जिम्मेदारी निभाने और मर्यादा बनाए रखने की अपील
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने विधायकों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए कहा कि लोग आपको कई सपनों के साथ यहां भेजते हैं। उनका विश्वास बनाए रखना और उनके चेहरों पर मुस्कान लाना आपका दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल युग की पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा में बोला गया हर शब्द अब तत्काल जनता तक पहुंचता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपने वक्तव्य और व्यवहार में उच्चतम स्तर की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सदन के अंदर और बाहर—आपके शब्द और आपके कर्म समाज के लिए उदाहरण स्थापित करते हैं। अतः हर समय अत्यंत सावधानी बरतना आवश्यक है। राष्ट्रपति ने विधायकों से आग्रह किया कि वे जनता के हित और राज्य के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
पुराने साथियों को देखकर भावुक हुईं राष्ट्रपति
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने अपने विधायक और मंत्री काल की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने कहा कि एक समय वे विपक्ष से सरकार से सवाल पूछती थीं और बाद में मंत्री बनने के बाद उन्हीं सवालों का जवाब भी देती थीं। गैलरी में बैठे कई पूर्व सहयोगियों को देखकर राष्ट्रपति मुर्मू भावुक हो उठीं और कहा कि उनकी उपस्थिति ने इस अवसर को और भी खास बना दिया।
ओडिशा की विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और ऐतिहासिक योगदान पर डाला प्रकाश
राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का समुद्री इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रनिर्माण में योगदान अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने मधुसूदन दास, गोपाबंधु दास, हरेकृष्ण महताब और बिजू पटनायक जैसे महान नेताओं के योगदान को याद किया और कहा कि इन व्यक्तित्वों ने आधुनिक ओडिशा की नींव रखी।
उन्होंने 1857 के संग्राम और ब्रिटिश शासन के खिलाफ ओडिशा की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। वीर सुरेंद्र साई, बाजी राउत और लक्ष्मण नायक जैसे अमर स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में ओडिशा के लोगों का योगदान अतुलनीय है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर, ‘सुभद्रा योजना’ की सराहना
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ओडिशा में शासन और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि विधानसभा की अध्यक्षता एक महिला के हाथों में होना राज्य के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने राज्य सरकार की सुभद्रा योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
उन्होंने कहा कि सुभद्रा योजना के माध्यम से अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनी हैं, जो राज्य के विकास और महिला सशक्तिकरण का मजबूत संकेत है ।
ओडिशा के भविष्य पर विश्वास, 2036 तक समृद्ध राज्य का संकल्प
राष्ट्रपति ने ओडिशा के विकास पथ पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में विभिन्न सरकारों ने मिलकर विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को श्रद्धांजलि दी और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सरकार की जनहितकारी पहलों की भी सराहना की।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ओडिशा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहां के लोग मेहनती और दूरदर्शी हैं। इसलिए आने वाले वर्षों में ओडिशा देश के अग्रणी राज्यों में स्थान प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर 2036 तक—जब राज्य अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा—एक समृद्ध, विकसित और अग्रणी ओडिशा के निर्माण में योगदान दें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह भावनात्मक, विचारशील और प्रेरक संबोधन ओडिशा विधानसभा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। सदन ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके संदेशों का स्वागत किया, और यह दिन लंबे समय तक याद किया जाएगा।
राजभवन परिसर में नव-निर्मित अतिथि गृह ‘कलिंग अतिथि निवास’ का किया उद्घाटन
इससे पहले राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भुवनेश्वर स्थित राजभवन परिसर में नव-निर्मित वीवीआईपी अतिथि गृह ‘कलिंग अतिथि निवास’ का उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरी बाबू कुंबमपाटि, प्रथम महिला श्रीमती जयश्री कंबमपाटि, मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान, केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम, ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष श्रीमती सुरमा पाधी तथा राज्य के कानून, वर्क्स एवं आबकारी मंत्री श्री पृथ्वीराज हरिचंदन सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
राजभवन के हरे-भरे शांत वातावरण में बना कलिंग अतिथि निवास ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक वास्तुकला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसकी बाहरी एवं आंतरिक संरचना में ओड़िया शिल्पकला की सूक्ष्म कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ और पारंपरिक डिजाइन को आधुनिक सुविधाओं के साथ खूबसूरती से समाहित किया गया है। प्रत्येक कक्ष ओडिशा की पहचान, कला और सांस्कृतिक गौरव को प्रतिबिंबित करने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किया गया है।

















