औरंगजेब को महान मानने वालों ने किया देश का बंटवारा : डॉ. कृष्ण गोपाल जी
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औरंगजेब को महान मानने वालों ने किया देश का बंटवारा : डॉ. कृष्ण गोपाल जी

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने गुरु तेगबहादुर की 350वीं शहादत पर बताया उनका अद्वितीय संदेश, मानवता और धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रेरक उदाहरण।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Nov 27, 2025, 08:01 pm IST
in भारत, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया में दो विचार धाराएं हैं। एक जो अपनी बात को ही सही मानते हैं औऱ दूसरा जो सभी के विचार का सम्मान कर साथ चलने में विश्वास रखते हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि आज भी देश में औरंगजेब को महान मानने वाले लोग हैं। वो लोग छोटे नहीं बल्कि बुद्धिजीवी, प्रोफेसर जैसे लोग औरंगजेब को महान शासक मानते हैं। इसी तरह की विचार धारा ने देश का बंटवारा कर दिया।

डॉ. कृष्ण गोपाल गुरुवार को विज्ञान भवन में आयोजित गुरु तेग बहादुर जी महाराज की शहीदी के 350वें वर्ष को समर्पित नौवीं पातशाही शहीदी समागम के मौके पर मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पंजाब एंड सिंघ बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चरन सिंह के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तलवंत सिंह मौजूद रहे।

गुरुतेग बहादुर की शहादत की कहानी सुनाते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गुरुतेग बहादुर ने औरंगजेब के आगे घुटने नहीं टेके। उनके सामने उनके तीन शिष्यों को मारा गया औऱ वे शांत स्मरण कर रहे थे। फिर उन्हें भी मतांतरण करने को कहा लेकिन शहादत चुनी। विश्व के इतिहास में ऐसी घटना दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि गुरु का जीवन बलिदान विश्व की आंखे खोलने के लिए है। पूरी मानवता के कल्याण के लिए है जो अद्वितीय। उन्होंने मानवीय जीवन के मूल्यों की रक्षा के लिए अपने जीवन की शहादत दी। गुरु की घोषणा सनातन है। मानवता के कल्याण के लिए अपने शरीर का बलिदान देना ही इस देश की परंपरा रही है। विश्व के लिए यह एक बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर की परंपरा अध्यात्मिक बोध जगाने की परंपरा है। उनका संदेश समाज को भयमुक्त करता है, डराता नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुतेग बहादुर के जीवन से पूरे विश्व को उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए।

इस मौके पर पंजाब एंड सिंघ बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चरन सिंह ने मांग रखी कि विश्व को गुरु तेगबहादुर के शहादत दिवस को विश्व अंतरधार्मिक सद्भाव दिवस के रूप में घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि गुरु जी की शहादत अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि गुरु की सीख को अपनाते हुए एकजुट होकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। यह तभी संभव को होगा जब हम चुनौतियों को स्वीकार कर एकजुट होकर विकसित राष्ट्र का संकल्प लें और उस दिशा में काम करें।

Topics: Religious ToleranceMartyrdom350th AnniversaryKrishna Gopal SpeechInterfaith HarmonyPunjab & Sind BankSpiritual LeadershipGuru Teg BahadurIndian HeritageSikh history
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