चीन की ब्लैकमेल पॉलिसी होगी खत्म! : REPM में भारत का धमाका, समझें कैसे 5 साल में आत्मनिर्भर बनेगा राष्ट्र
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चीन की ब्लैकमेल पॉलिसी होगी खत्म! : REPM में भारत का धमाका, समझें कैसे 5 साल में आत्मनिर्भर बनेगा राष्ट्र

भारत में 7280 करोड़ की REPM स्कीम से दुर्लभ खनिज उत्पादन, आत्मनिर्भरता, रक्षा-टेक्नोलॉजी और एवी उद्योग में बड़ा बदलाव आने वाला है। जानें पूरी जानकारी...

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Nov 26, 2025, 08:20 pm IST
inभारत, दिल्ली
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली । भारत में दुर्लभ खनिजों का विश्व का तीसरा सबसे बड़ा भंडार लगभग 69 लाख टन का है जिससे हर साल करीब 20 हजार टन पर्मानेंट मैग्नेट का निर्माण किया जा सकता है, जो देश की जरूरत का करीब पांच गुना है। इस दिशा में सरकार ने देश काे पांच साल के भीतर न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाने बल्कि दुनिया के अन्य देशों को निर्यात करने की क्षमता विकसित करने की योजना बनायी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आरईपीएम स्कीम को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अगली पीढ़ी के विनिर्माण को बल देने के लिए देश को सेमीकंडक्टर मिशन को अंजाम तक पहुंचाने के बाद दुर्लभ खनिजों से बनने वाले पर्मानेंट मैग्नेट के निर्माण में भी आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 7280 करोड़ रुपये के निवेश वाली रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) स्कीम को मंजूरी दी।

दुर्लभ खनिजों का उपयोग और वैश्विक महत्व

दुर्लभ खनिजों का उपयोग अत्याधुनिक रक्षा उपकरण, इलैक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष यान एवं कृत्रिम उपग्रह आदि बनाने में होता है। वैश्विक राजनीति में दूरगामी महत्व के इस निर्णय से दुनिया की बड़ी ताकतों के बहुमूल्य संसाधनों के नाम पर भारत को ब्लैकमेल करने की ताकत निष्प्रभावी हो जाएगी।

भारत की वर्तमान आरईपीएम आवश्यकता और आयात

वर्तमान में भारत की जरूरत करीब 4000 टन आरईपीएम की पड़ रही है जिसकी भरपाई आयात से होती है। भारत अभी दुर्लभ खनिज एवं आरईपीएम की आपूर्ति के लिए चीन, जापान, विएतनाम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा एवं अमेरिका से खरीद कर रहा है।

देश में पांच संयंत्र स्थापित करने की योजना

कैबिनेट द्वारा आज लिये गये फैसले के अनुसार देश में क्रिटिकल मिनरल मिशन के अंतर्गत राजस्थान, महाराष्ट्र एवं गुजरात के पहाड़ी इलाकों में भारी दुर्लभ खनिजों एवं समुद्र तट पर रेत से हल्के दुर्लभ खनिजों के उत्खनन के बाद उनसे आरईपीएम बनाने के लिए देश में 1200 टन क्षमता वाले पांच संयंत्र स्थापित किये जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 6000 टन प्रतिवर्ष होगी। इन संयंत्रों से तीन से चार साल में उत्पादन शुरू होने की संभावना है और पांच साल के भीतर ही भारत इस मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।

आरईपीएम की खपत में बढ़ोतरी

इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक अनुप्रयोगों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की तेज़ी से बढ़ती मांग को देखते हुए भारत में आरईपीएम की खपत 2025 से 2030 में बढ़कर दोगुनी होने की संभावना है।

रोज़गार सृजन और नेट ज़ीरो उत्सर्जन में योगदान

इस पहल से स्थापित होने वाली एकीकृत आरईपीएम विनिर्माण इकाइयां न केवल रोज़गार सृजन करेंगी बल्कि इससे देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और 2070 तक वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के बीच संतुलन बनाने एवं नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की देश की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।

भारत में दुर्लभ खनिजों की कुल उपलब्धता

जानकार सूत्रों के अनुसार देश में भारी एवं हल्के दोनों प्रकार के दुर्लभ खनिजों की कुल अनुमानित उपलब्धता लगभग 69 लाख टन है जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा भंडार है जिसमें लीथियम शामिल नहीं है। दुर्लभ खनिजों की इस मात्रा से हर साल 20 हजार टन आरईपीएम बनाना संभव होगा जो मौजूदा आवश्यकता का पांच गुना है।

वैश्विक राजनीति और भारत की सुरक्षा

सूत्रों का मानना है कि हाल ही में चीन एवं अमेरिका के बीच टैरिफ वॉर में सबसे अहम मुद्दा दुर्लभ खनिजों एवं परमानेंट मैग्नेट की आपूर्ति था और दोनों देशों के बीच समझौता भी इसी मुद्दे के सुलझने के बाद हो पाया। अमेरिका के टैरिफ प्रहार से भारत भी अछूता नहीं रहा। यह एक खतरे की घंटी है, लिहाजा सरकार ने दुर्लभ खनिजों, परमानेंट मैग्नेट और सेमीकंडक्टर तीनों क्षेत्रों में जल्द से जल्द आत्मनिर्भरता हासिल करने की मुहिम पर जोर लगा दिया है।

आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य

सूत्रों ने कहा कि अगले पांच साल में भारत करीब इन तीनों मामलों में आत्मनिर्भर हो चुका होगा। इस प्रकार से दुनिया के किसी भी ताकतवर देश के पास भारत को किसी भी मुद्दे पर ब्लैकमेल करने की शक्ति नहीं बचेगी और 2047 तक भारत को विकसित बनाने के मिशन में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।

Topics: Permanent MagnetsModi governmentRare Earth MineralsDefence TechnologySemiconductor MissionREPM7280 Crore SchemeEV IndustryCritical Minerals MissionIndia vs ChinaStrategic Minerals‘आत्मनिर्भर भारत’
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