अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को चीन के शंघाई एयरपोर्ट पर करीब 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया। ये घटना 21 नवंबर 2025 की है। महिला का नाम पेमा वांग थोंगडोक है, जो ब्रिटेन में रहती हैं। चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को अवैध बता दिया, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसमें जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखा था। उनका कहना था कि अरुणाचल चीन का हिस्सा है। इस पर भारत ने तुरंत चीन को सख्त जवाब दिया। कहा गया कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है, इसमें कोई शक नहीं।
भारत ने बीजिंग और नई दिल्ली में चीनी अधिकारियों से विरोध दर्ज कराया। साथ ही, शिकागो-मॉन्ट्रियाल कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला दिया, जो यात्रियों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। शंघाई में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी स्थानीय स्तर पर मदद की और विरोध जताया।
क्या है पूरा मामला
ये सब तब हुआ जब पेमा शंघाई पुडोंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ट्रांजिट के लिए रुकीं। चीनी अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट चेक किया और तुरंत रोक लिया। उन्होंने साफ कहा कि अरुणाचल प्रदेश चीन का क्षेत्र है, इसलिए पासपोर्ट वैध नहीं माना जाएगा। पेमा ने बताया कि अधिकारी बार-बार यही बात दोहराते रहे और उनसे ये मानने को कहा। लेकिन पेमा ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें अलग कमरे में बंद कर दिया गया। करीब 18 घंटे तक कोई खाने-पानी का इंतजाम नहीं, बस पूछताछ चलती रही। भारत की तरफ से कहा गया कि ये बिल्कुल बेतुका और बिना आधार का व्यवहार था। अरुणाचल के लोग पूरे हक के साथ भारतीय पासपोर्ट इस्तेमाल कर सकते हैं और दुनिया में कहीं भी घूम सकते हैं।
ये चीनी कदम अंतरराष्ट्रीय उड्डयन नियमों का सीधा उल्लंघन है। शिकागो कन्वेंशन 1944 का और मॉन्ट्रियाल कन्वेंशन 1999 का जिक्र करते हुए भारत ने चेतावनी दी कि ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं होंगी। सूत्र बताते हैं कि ये विरोध इतना तेज था कि चीनी पक्ष को झुकना पड़ा और पेमा को रिहा किया गया। भारतीय दूतावास ने उन्हें हर तरह की मदद दी। उनकी फ्लाइट का इंतजाम किया गया और हर तरह की कानूनी मदद भी मुहैया कराई गई।
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लंदन से जापान जा रही थी महिला
पेमा वांग थोंगडोक मूल रूप से अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के रूपा गांव की रहने वाली हैं। वे ब्रिटेन में बसी हुई हैं। 21 नवंबर 2025 को वे लंदन से जापान के लिए निकलीं। शंघाई में उनका सिर्फ तीन घंटे का ट्रांजिट था, लेकिन ये सफर दर्दनाक हो गया। चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस के स्टाफ ने भी उनका साथ दिया चीनी अधिकारियों का। पेमा के पास जापान का वैध वीजा था, फिर भी उन्हें जापान वाली फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया। पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। घंटों की मशक्कत के बाद उन्होंने ब्रिटेन में रहने वाले एक दोस्त से शंघाई के भारतीय कंसुलेट को फोन करवाया। कंसुलेट वाले देर रात पहुंचे और अधिकारियों से बात की।
आखिरकार, पेमा को किसी दूसरी फ्लाइट से वापस भेजा गया। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पूरा किस्सा शेयर किया। लिखा, “21 नवंबर को शंघाई एयरपोर्ट पर चीन इमिग्रेशन और एयरलाइंस ने मुझे 18 घंटे से ज्यादा रोका। मेरा भारतीय पासपोर्ट अवैध बताया क्योंकि जन्मस्थान अरुणाचल है, जो उनके मुताबिक चीन का है।” पेमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य अधिकारियों को चिट्ठी लिखी। इसमें कहा कि ये घटना भारत की संप्रभुता और अरुणाचल के लोगों का अपमान है।

















