राजद्रोह में फंसी नेहा सिंह राठौर! UP पुलिस ने कस दिया शिकंजा!
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होम भारत उत्तर प्रदेश

राजद्रोह में फंसी नेहा सिंह राठौर! UP पुलिस ने कस दिया शिकंजा!

दो नोटिस जारी होने, हाईकोर्ट के सख्त आदेश और अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद बयान दर्ज न कराने पर अब गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Nov 24, 2025, 09:57 pm IST
in उत्तर प्रदेश

भोजपुरी की तुकबंदी गायिका और राजनीतिक पक्षकार नेहा सिंह राठौर की मुश्किलें अब बढ़ गई हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर किए गए उनके भड़काऊ और राष्ट्र-विरोधी पोस्ट के मामले में यूपी पुलिस ने कमर कस ली है। दो नोटिस जारी होने, हाईकोर्ट के सख्त आदेश और अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद बयान दर्ज न कराने पर अब उनकी गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने दो विशेष टीमें गठित कर दी हैं, जो नेहा के अंबेडकरनगर स्थित गांव सहित संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

विवादित पोस्‍ट का पाकिस्‍तान ने किया इस्‍तेमाल

यह मामला 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस भयानक आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें 26 निर्दोष भारतीय पर्यटकों की क्रूर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना साधा था, जिससे पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। इसी संवेदनशील माहौल में नेहा सिंह राठौर ने अपने एक्स हैंडल से एक के बाद एक विवादित पोस्ट किए। इनमें उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोला, हमले को खुफिया विफलता बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार इसे वोटों के लिए भुनाएगी, जैसे पुलवामा हमले के बाद किया था। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “पुलवामा का खून अभी सूखा भी नहीं, पहलगाम का खून बह रहा है। मोदी जी, क्या ये भी वोट बैंक है?”

एक वीडियो में तो उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “रूस-यूक्रेन युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन अपने देश में आतंकी हमला नहीं?”

इन पोस्ट्स ने न सिर्फ धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का काम किया, बल्कि पाकिस्तान में भारत-विरोधी प्रचार का हथियार भी बन गए।

तीन लोगों ने की थी शिकायत

इन पोस्ट्स के खिलाफ सबसे पहले कुर्सी रोड स्थित वुडलैंड पैराडाइज अपार्टमेंट के निवासी अभय प्रताप सिंह ने हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी। उन्होंने शिकायत की कि नेहा के पोस्ट राष्ट्रीय एकता को खतरे में डाल रहे हैं और एक खास समुदाय को निशाना बना रहे हैं।

इसके बाद रानीगंज के सौरव, दुर्विजयगंज के हिमांशु वर्मा और दुगांवा के अर्जुन गुप्ता ने भी अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। पुलिस ने सभी तहरीरों को एक साथ जोड़ते हुए 27 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 (राजद्रोह के समकक्ष), आईटी एक्ट की धाराएं और अन्य प्रावधान शामिल हैं।

डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता हुई सिद्ध

जांच के दौरान पुलिस ने नेहा के सभी डिजिटल साक्ष्यों-पोस्ट, वीडियो और कमेंट्स को एक पेन ड्राइव में संकलित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा। रिपोर्ट में इनकी प्रामाणिकता सिद्ध हुई, कोई छेड़छाड़ नहीं पाई गई।नेहा ने गिरफ्तारी की आशंका से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

फिर भी, उन्होंने पुलिस नोटिस का पालन नहीं किया। अंबेडकरनगर पुलिस ने उनके गांव में नोटिस चस्पा किया, हाईकोर्ट ने पेशी का आदेश दिया, लेकिन नेहा ने बीमारी का बहाना बनाकर टालमटोल की। हजरतगंज के एसएचओ मुताबिक, “वे जांच से बच रही हैं, अब सारे रास्ते बंद हैं। टीमें उनके लोकेशन ट्रैक कर रही हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने भी अक्टूबर में एफआईआर रद्द करने की याचिका ठुकरा दी, जिसमें नेहा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दिया था।

विवादों से घिरी रही हैं नेहा

नेहा सिंह राठौर पहले भी विवादों से घिरी रही हैं। 2023 में ‘यूपी में का बा-सीजन 2’ गाने पर पुलिस नोटिस मिला था, जिसमें उन्होंने कानपुर देहात में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान दो महिलाओं की मौत पर सवाल उठाए थे।

2020 के ‘बिहार में का बा’ और 2022 के ‘यूपी में का बा’ गानों से वे राजनीतिक कमेंट्री के लिए मशहूर हुईं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये राष्ट्र-विरोधी प्रचार का माध्यम बन गए। अब पहलगाम मामले ने उनके पुराने कदमों को फिर उजागर कर दिया है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक उन्हें ‘आवाज’ बता रहे हैं, लेकिन ज्यादातर यूजर्स उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ करार दे रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि नेहा के पोस्ट्स ने न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब की। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उनके अन्य पुराने मामलों की भी पड़ताल होगी। क्या नेहा अब भी ट्वीट्स से बच निकल पाएंगी, या कानून का शिकंजा उन्हें जकड़ लेगा? मामला गरमाता जा रहा है।

नेहा सिंह राठौर से जुड़े प्रमुख विवाद

• नेहा सिंह राठौर, एक भोजपुरी की तुकबंदी गायिका और राजनीतिक पक्षकार हैं, अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स और गीतों में महागठबंधन की पैरवी के कारण बार-बार विवादों में घिरी रहीं। पोस्ट्स को अक्सर धार्मिक, जातिगत या राजनीतिक तनाव फैलाने वाला माना गया, जिसके चलते उन पर कई एफआईआर दर्ज हुईं। नीचे उनके प्रमुख विवादों का उल्लेख है, जो मुख्य रूप से 2023 से 2025 तक के हैं। ये विवाद सरकारी एजेंसियों, अदालतों और सोशल मीडिया पर आधारित हैं।

• नेहा के साथ जुड़ा पहला विवाद यूपी में का बा की तुकबंदी थी। उन पर आरोप लगा कि उनकी तुकबंदी नफरत फैलाने वाली है। कानपुर पुलिस ने नोटिस जारी किया। तुकबंदी में एक पंक्ति है कि कोरोना से लाखों की मृत्यु हुई। गंगा लाशों से भर गई। उत्तर प्रदेश में लाशों के ऊपर से कुत्ते और बिल्ली कफन नोच रहे थे।

• कोविड के समय का उत्तर प्रदेश को लेकर जो चित्रण नेहा ने अपनी तुकबंदी में किया था, वह सच्चाई नहीं बल्कि अतिश्योक्ति थी। वर्ष 2023 में नेहा ने एक कैरिकेचर पोस्ट किया जिसमें आरएसएस के ड्रेस पहने व्यक्ति को एक अनुसूचित जनजाति से संबंध रखने वाले व्यक्ति पर पेशाब करते दिखाया गया। यह कैरिकेचर जानबुझकर नेहा ने आरएसएस और जनजातीय समुदाय के बीच वैमनस्यता बढ़ाने की नियत से डाला। इस मामले में एफआईआर भोपाल के हबीबगंज थाने में आईपीसी की धारा 153ए के तहत दर्ज है।

• इस तरह विवादों में रहने की वजह से महागठबंधन के नेताओं के बीच वह लोकप्रिय हुईं। राजनीतिक दलों के कार्यक्रम में वह जाने लगीं। एक मामले में महागठबंधन के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल नेहा के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस से मिल रहे समर्थन ने उसका मनोबल बढ़ाया। उसे पता चल गया कि तुकबंदी जितना ही अधिक अनर्गल होगी, उसे सोशल मीडिया पर उतना ही अधिक वायरल किया जाएगा। वर्ष 2025 में अभद्रता की सारी सीमाएं पार कर दी।

• 22 अप्रैल को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकी हमले (26 मौतें) पर अपने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें मोदी सरकार के इंटेलिजेंस फेलियर की, पुलवामा से तुलना की और वोटबैंक के लिए हमले का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह टिप्पणी राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक-जातिगत हिंसा को भड़काने वाली थी। इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज थाने में बीएनएस की धाराओं (देशद्रोह सहित) के अन्तर्गत एफआईआर दर्ज हुई। उसकी टिप्पणी पाकिस्तानी हैंडल्स पर वायरल होने से विवाद और बढ़ गया।

• मई 2025 में फिर एक वीडियो में पीएम मोदी को ‘कायर’ कह दिया और जलियांवाला बाग के जनरल डायर से तुलना की। इस मामले में वाराणसी के लंका थाने में बीएनएस की धाराओं 197(1)(a), 197(1)(d) और 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज हुई। यह वीडियो भी पाकिस्तान में वायरल हुआ। भारत से अधिक नेहा पाकिस्तान में लोकप्रिय होने लगी थीं।

• मोदी सरकार द्वारा मई 2025 में महिलाओं के बीच सिंदूर वितरण जैसा कोई अभियान चलाने की कहीं कोई बात नहीं थी। ना ऐसा अभियान कभी चलाया गया लेकिन कांग्रेस के आईटी सेल के अफवाह तंत्र के साथ मिलकर नेहा ने अपनी तुकबंदी जारी की, जिसमें बीजेपी नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी की। जो अभियान कभी चला नहीं, जिसकी कोई आधिकारिक घोषणा तक नहीं हुई। उस पर विवादित तुकबंदी और उसे कांग्रेस आईटी सेल हैंडल द्वारा प्रमोट किए जाने पर विवाद बढ़ना ही था। वह बढ़ा। इस मामले में नेहा की खूब आलोचना हुई।

मतलब इस विवाद ने उसे चर्चित भी बनाया और सोशल मीडिया पर कमाई भी कराई। कोई एफआईआर भी नहीं हुई। मई में ही सोफिया कुरैशी को अपनी बहन बताते हुए भाजपा के एक नेता के खिलाफ राजनीतिक स्टंट किया। हिमांशु सिंह को दृष्टि कोचिंग से निकाला गया था। अपने यू ट्यूब वीडियो में विकास दिव्यकृति ने नेहा के पोस्ट पर व्यंग्य किया। जिसे हिमांशु को दृष्टि से निकाले जाने से वाले बयान से जोड़कर सोशल मीडिया पर देखा गया।

• सितम्बर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम मामले में हुई एफआईआर क्वाश करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि पोस्ट्स में पीएम का अपमानजनक उल्लेख और धर्म-राजनीति का मिश्रण है। न्यायालय ने जांच जारी रखने का आदेश दिया। अक्टूबर में पहलगाम पोस्ट्स पर सुप्रिम कोर्ट ने भी एफआईआर क्वाश करने से इनकार किया।

• पहलगाम मामले में लखनऊ पुलिस ने तलाशी शुरू की। नेहा ने बीमारी का हवाला देकर पेश न होने पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज की। हजरतगंज थाने में एफआईआर के आधार पर नेहा की तलाश जारी है। नेहा उत्तर प्रदेश की पुलिस को मिल नहीं रही। वे लापता हैं या फरार। इस बात की जानकारी एक दो दिनों में चल लाएगा लेकिन इस बार उनका गिरफ्तारी से बचना मुश्किल है।

Topics: भोजपुरी गायिकाराष्ट्रदोह का केसनेहा सिंह राठौर
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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