उत्तराखंड । देहरादून में पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक के मामले ने अब अवैध कन्वर्जन और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने का बड़ा नेटवर्क उजागर कर दिया है। पुलिस को जांच में ऐसे कई अहम सुराग मिले हैं जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं।
फर्जी भारतीय दस्तावेज़ और अवैध रूप से भारत में रहना
दून पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपित बांग्लादेशी नागरिक फर्जी भारतीय दस्तावेज़ बनाकर देहरादून में अवैध रूप से रह रहा था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और बांग्लादेश की संबंधित एजेंसियों से लगातार संपर्क बनाए हुए है।
महिला का कन्वर्जन कर बना दिया फरजाना अख्तर
जांच में यह भी सामने आया है कि सह-अभियुक्ता रीना चौहान का मतांतरण कर उसे फर्जी दस्तावेज़ों में फरजाना अख्तर के नाम से दर्शाया गया। आरोपित ने उसको इस्लाम में मतांतरित करके बांग्लादेश में उससे निकाह किया था। पुलिस के हाथ महिला के कन्वर्जन संबंधी फर्जी बांग्लादेशी प्रमाण पत्र भी लगे हैं।
बांग्लादेशी निकाहनामे सहित कई दस्तावेज़ बरामद
पुलिस को आरोपितों का 10 अप्रैल 2022 का बांग्लादेशी निकाहनामा और उससे जुड़े कई दस्तावेज़ मिले हैं। जांच में पता चला कि दोनों पहले फेसबुक पर मिले थे, फिर अवैध रूप से बांग्लादेश गए और निकाह करके दोबारा अवैध तौर पर भारत वापस आ गए।
फर्जी पहचान बनाकर तैयार किए गए भारतीय दस्तावेज़
भारत लौटने के बाद आरोपितों ने रीना चौहान के पूर्व पति के नाम पर नए भारतीय पहचान पत्र तैयार करवाए, जिसमें बांग्लादेशी युवक को भारतीय नागरिक दिखाया गया। पुलिस अब हर कड़ी को जोड़कर पूरे गैंग का पर्दाफाश करने में जुटी है।
ऑपरेशन कालनेमि के तहत गिरफ्तारी
21 नवंबर को ऑपरेशन कालनेमि के तहत नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने बांग्लादेशी युवक ममून हसन और उस महिला को गिरफ्तार किया था। दोनों की गहन पूछताछ जारी है और पुलिस इस मामले को अवैध कन्वर्जन व फर्जी दस्तावेज़ों की बड़ी साजिश के रूप में देख रही है।

















