राजस्थान के भरतपुर में पुलिस ने एक बड़े क्रिप्टो और फॉरेक्स निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया है। यहां के लोगों को बड़े-बड़े मुनाफे का लालच देकर ठगे गए। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क ने करीब 4.5 लाख लोगों से 3500 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। अभी तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सब आम आदमी से लेकर पुलिस वाले, वकील और सरकारी कर्मचारी तक ठगे गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
ये गिरोह लोगों को 15-20 फीसदी मासिक रिटर्न का वादा करता था। एक फर्जी वेबसाइट expo.com के जरिए ये काम चल रहा था। दावा किया जाता था कि पैसे विदेशी बाजारों में लगाए जा रहे हैं। असल में ये सब धोखा था। इसके अलावा एक और फर्जी साइट digix.com चलाई जाती थी, जहां से 9000 लोगों के 500 करोड़ रुपये इकट्ठे हो चुके थे। भरतपुर जिले में ही 8-10 हजार लोग फंस गए, और वहां से 100 करोड़ से ज्यादा उड़ाए गए। कुल मिलाकर 4.5 लाख लोग देशभर से प्रभावित हुए।
गिरोह कैसे चल रहा था
गिरोह का दावा था कि ये 2016 से रूस में काम कर रहा है, लेकिन असल में जयपुर से नवंबर 2022 में शुरू हुआ। एक फर्जी कंपनी बनाकर पैसे धोए जाते थे। वेबसाइट पर झूठा प्रचार था कि 47 लाख यूजर्स हैं और 4.3 अरब डॉलर का फंड मैनेज कर रहे हैं। हकीकत में सिर्फ 4.7 लाख यूजर्स थे और 3100 करोड़ रुपये इकट्ठे हुए। ये लोग क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश का लालच देते थे।
शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
11 नवंबर को एक शिकायत मथुरागेट थाने में दर्ज हुई। इसमें expo.com की पोल खुल गई। पुलिस ने तुरंत छानबीन शुरू की। एसपी दिगंत आनंद ने बताया कि ये नेटवर्क मनी लॉन्ड्रिंग के लिए फर्जी कंपनी चला रहा था। जांच में पता चला कि कंपनी भारत में रजिस्टर्ड ही नहीं थी। अब पूरे नेटवर्क की फाइनेंशियल डीलिंग्स और विदेशी कनेक्शन्स की पड़ताल हो रही है।
गिरफ्तारियां और बरामद सामान
पुलिस ने 5 मुख्य आरोपी पकड़े हैं। इनमें जयपुर के अतुल, शिवदासपुरा के कृष्णा कुमार, जयपुर के ही मुकुल कुमार, भुसावर के राकेश पांडेय और मानसरोवर के उमरावमल शामिल हैं। इनके पास से 40 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के जेवर, 5 गाड़ियां और 40 लाख की वैल्यू वाली क्रिप्टोकरेंसी जब्त हुई। आरोपी जयपुर और आसपास के इलाकों से पकड़े गए। एसपी दिगंत आनंद ने कहा कि ये फर्जी कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग का हथियार बनी हुई थी। अब एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) को चिट्ठी लिखी जा रही है। पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और विदेशी लिंक्स की जांच होगी। पुलिस को शक है कि और भी लोग इसमें लिप्त हो सकते हैं।

















