भुवनेश्वर: ओडिशा के कई जिलों विशेषकर भद्रक में बढ़ते गौवंश तस्करी मामलों ने स्थानीय लोगों में आक्रोश बढता जा रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के बीच भद्रक जिले में एक और बड़ा मामला सामने आया। यहां अवैध रूप से 18 गौवंशों को ले जा रही एक पिकअप वैन अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 12 गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद नाराज़ ग्रामीणों ने वाहन को आग के हवाले कर दिया और पुलिस पर भारी लापरवाही का आरोप लगाया।
गेलटुआ के पास हादसा, पुलिस पर ढिलाई के आरोप
घटना भद्रक ग्रामीण थाना क्षेत्र के अंतर्गत गेलटुआ गांव के निकट हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिकअप वैन में 18 गौवंशों को अवैध रूप से भद्रक शहर की ओर ले जाया जा रहा था। राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर सक्रिय गोरक्षा कार्यकर्ताओं की निगरानी से बचने के लिए तस्कर वाहन को गांवों की संकरी सड़कों से ले जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार में चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क किनारे पलट गया।
टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि 12 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अनेक गौवंश एक-दूसरे के ऊपर दबने के कारण कुचल गए, क्योंकि वाहन में अत्यधिक भीड़ और पर्याप्त वेंटिलेशन की कमी थी। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे, उन्होंने घायल गौवंशों को बाहर निकाला और पुलिस व प्रशासन को इसकी सूचना दी। लेकिन कुछ ही देर में लोगों का गुस्सा भड़क उठा और भीड़ ने पलट चुकी वैन में आग लगा दी। ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से अवैध गौवंश परिवहन की शिकायतें दे रहे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
सूचना मिलने पर भद्रक ग्रामीण थाना पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है, हालांकि हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।

पिछला मामला उजागर करता है बढ़ती तस्करी का पैटर्न
घटना के ठीक एक सप्ताह पहले भी भद्रक जिले के धुसुरी थाना क्षेत्र में इसी तरह का मामला सामने आया था। धामनगर ब्लॉक के अंतर्गत धुसुरी क्षेत्र से अवैध रूप से 18 मवेशी ले जा रही एक पिकअप वैन पर गोरक्षकों ने शक जताया और उसे रोकने की कोशिश की थी ।रोकने के प्रयास के दौरान चालक घबरा गया था और वाहन को तेज गति से भगाने लगा। पीछा के दौरान वैन गोबिंदपुर पंचायत बाजार के पास कोरुआ नहर के किनारे कीचड़ में फंस गई। चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया था ।
धुसुरी थाना के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच में पाया कि मवेशियों को अत्यंत अमानवीय परिस्थितियों में ठूंस-ठूंसकर रखा गया था। दम घुटने और चोटों के कारण दो मवेशियों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि बाकी गंभीर रूप से थके । जीवित मवेशियों को स्थानीय गौशाला में उपचार के लिए भेजा गया था । इस घटना के बाद भी ग्रामीणों ने पुलिस पर कड़ा आरोप लगाया था कि बढ़ती तस्करी के बावजूद पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं कर रही।
राज्यभर में बढ़ रही घटनाएं, कानून व्यवस्था पर सवाल
भद्रक की ये लगातार दो घटनाएं कोई अलग-थलग मामले नहीं हैं। आसपास के जिलों से भी इसी तरह की तस्करी और हिंसा से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं । पिछले दिनों केंद्रापड़ा जिले में स्थानीय लोगों द्वारा रोकने की कोशिश करने पर गौवंश तस्करों ने गोलीबारी की, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था । केन्दुझर जिले में दो अलग-अलग मामलों में अवैध गौवंश ले जा रहे वाहन पलट गए, जिनमें कम से कम तीन मवेशियों की मौत हो गई थी ।जगतसिंहपुर जिले में हाल ही में पुलिस ने अवैध रूप से काटा गया बीफ बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिससे एक सक्रिय अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ।
इन घटनाओं ने राज्य में संगठित मवेशी तस्करी गिरोहों के बढ़ते प्रभाव और कानून-व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है।
स्थानीयों का आक्रोश, प्रशासन की सतर्कता पर सवाल
ग्रामीण और स्थानीय संगठन लंबे समय से पुलिस और प्रशासन को अवैध गौवंश परिवहन में वृद्धि की जानकारी देते रहे हैं, लेकिन कार्रवाई न के बराबर हो रही है। गोरक्षा संगठनों का कहना है कि ओडिशा में गौवंश परिवहन और वध को लेकर स्पष्ट कानून मौजूद हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें ठीक से लागू नहीं कर रही है। हाल ही में ओडिशा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए थे कि गौवंश परिवहन पर निगरानी मजबूत की जाए, जिलों में मॉनिटरिंग मैकेनिज्म को उन्नत किया जाए, अंतरराज्यीय समन्वय बढ़ाया जाए और बिना परमिट परिवहन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का असर बहुत कम दिखाई दे रहा है जिससे जनता में असंतोष और बढ़ गया है।











