मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने के मुद्दे पर तनाव बढ़ता जा रहा है। खासकर पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बहस छिड़ गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसको लेकर एक झूठ फैला रही हैं कि ये बहुत ही खतरनाक और अव्यवस्थित है। अब उनके झूठ पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसे घुसपैठियों को रोकने का जरूरी कदम करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने ये बयान हाल ही में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर SIR अभियान पर सवाल उठाने के बाद दिया है।
अमित शाह का तीखा प्रहार
अमित शाह ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट डालकर साफ कहा कि भारत में घुसपैठ रोकना न सिर्फ देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि लोकतंत्र को खराब होने से बचाने के लिए भी। उन्होंने लिखा, “दुर्भाग्य से कुछ राजनीतिक दल इन घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं और चुनाव आयोग के मतदाता सूची शुद्धिकरण के खिलाफ खड़े हो गए हैं।” शाह ने किसी खास पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि कुछ दल वोट बैंक के चक्कर में अवैध प्रवासियों को संरक्षण दे रहे हैं। ये बयान ममता बनर्जी की चिट्ठी के ठीक एक दिन बाद आया, जो SIR को “खतरनाक” बताने वाली थी। शाह का मानना है कि वोटर लिस्ट में फर्जी नामों को हटाना डेमोक्रेसी की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है, वरना सिस्टम प्रदूषित हो जाएगा।
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ममता बनर्जी की शिकायतें
ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा, जिसमें SIR अभियान को “अनियोजित, खतरनाक और अव्यवस्थित” बताया। उन्होंने कहा कि ये मुहिम पहले दिन से ही सिस्टम को पंगु बना रही है। ममता के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को ठीक से ट्रेनिंग नहीं मिली, सर्वर बार-बार क्रैश हो रहे हैं और डेटा मिसमैच की समस्या आम है। इससे ऑनलाइन फॉर्म भरना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस गति से 4 दिसंबर तक वोटर डेटा को सही तरीके से अपलोड करना नामुमकिन है। ममता ने ये भी कहा कि अफसरों और लोगों पर दबाव डालकर गलत या अधूरी एंट्रीज करवाई जा रही हैं, जिससे असली वोटरों का हक छिन सकता है और लिस्ट की साख पर बट्टा लगेगा। उनका कहना था कि बिना तैयारी के ये प्रक्रिया थोपी जा रही है, जो न सिर्फ अव्यवस्था फैला रही बल्कि खतरनाक साबित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि जब से चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया को शुरू किया है, तभी से घुसपैठियों में भगदड़ सी मची हुई है। वे लगातार वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं। यहीं नहीं ममता बनर्जी पर भी समय-समय पर ऐसे ही आरोप लगते रहे हैं कि वो राज्य में घुसपैठियों की ही मदद से चुनाव जीतती हैं। ऐसे में उनका तिलमिलाना तो स्वाभाविक है।

















