महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई में 13 साल की मासूम को स्कूल बैग पीठ पर रखकर 100 उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है। महिला टीचर पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल में दस मिनट देर से पहुंचने पर छठी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को 100 उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया, जिसके बच्ची की हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वसई (ईस्ट) के श्री हनुमंत विद्या मंदिर स्कूल में कक्षा छठी की छात्रा के साथ देर से आने वाले अन्य छात्रों को टीचर ने 8 नवंबर को उठक-बैठक करने की सजा दी थी, जिससे उसकी तबीयत खराब हो गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। छात्रा की मौत पर सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर दिलीप घुगे का कहना है, “मामले की जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। स्कूल के अन्य शिक्षकों और दूसरे छात्रों समेत प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर टीचर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर मंगलवार (18 नवंबर) रात को गिरफ्तार कर लिया है। अगर स्कूल प्रशासन की तरफ से लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।”
आखिर हुआ क्या था?
पुलिस ने बताया, 8 नवंबर 2025 को बच्ची स्कूल में 10 मिनट देर से आई थी। स्कूल टीचर ने उसे और देर से आने वाले अन्य छात्रों को उठक-बैठक करवाकर सजा दी। लड़की की मां ने बताया कि जब उनकी बेटी घर पर पहुंची तो उसकी हालत बिगड़ गई। उसकी गर्दन से पीठ के नीचे तेज दर्द हो रहा था। उसके पैरों में सूजन आ गई थी। शाम तक उसकी हालत और खराब हो गई। बच्ची को ऐसी हालत में देखकर परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज किया गया। इसके बाद आराम न होने पर उसे 13 नवंबर को जेजे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। लड़की के माता-पिता का यह भी कहना है कि स्कूल में देर से पहुंचने के कारण टीचर ने उससे उठक-बैठक करवाए। इसी वजह से हमारी बेटी की जान चली गई।”
स्थानीय लोगों ने स्कूल पर लगाए गंभीर आरोप
इस घटना से गुस्साए स्थानीय लोगों ने स्कूल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल को सिर्फ आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने की इजाजत है, लेकिन उसने नौवीं और दसवीं क्लास के स्टूडेंट्स को भी एडमिशन दिया है। स्कूल मैनेजमेंट ने भी यह बात मानी है। एजुकेशन ऑफिसर गलांगे ने स्पष्ट किया कि यह तरीका गैर कानूनी है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
परिवार ने क्लास टीचर और स्कूल को ठहराया जिम्मेदार
बच्ची के परिवार ने क्लास टीचर और स्कूल को अपनी बेटी की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। वहीं स्थानीय मनसे कार्यकर्ता सचिन मोरे का दावा है कि लड़की को अस्थमा/सांस लेने में की दिक्कत थी और वह इतनी कड़ी सजा बर्दाश्त नहीं कर पाई, जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं, स्कूल के अधिकारी विकास यादव ने कहा कि अगर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह पता चलता है कि लड़की की मौत सजा की वजह से हुई है, तो स्कूल अपनी गलती स्वीकार करेगा।

















