इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1996 के मोदीनगर–गाजियाबाद बस बम धमाके मामले में दोषी ठहराए गए मोहम्मद इलियास को बरी कर दिया है। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने मोहम्मद इलियास की सजा को रद्द करते हुए कहा कि पुलिस के सामने दिया गया इकबालिया बयान स्वीकार्य नहीं है। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में बुरी तरह विफल रहा इसलिए अदालत भारी मन से दोषी को बरी करने का आदेश दे रही है, क्योंकि यह मामला इतना गंभीर था कि इसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया था। इस आतंकी हमले में 18 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर पाया
इलियास की अपील स्वीकार करते हुए अदालत ने 10 नवंबर को अपने फैसले में कहा कि पुलिस के समक्ष दिए गए इकबालिया बयान को हटा दिए जाने के बाद अपीलकर्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं बचा है। लगभग तीन दशक पुराने इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किया गया इलियास का इकबाल-ए-जुर्म भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के चलते कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। उस वक्त पुलिस के समक्ष दिया गया बयान एक वरिष्ठ अधिकारी ने टेप पर रिकॉर्ड किया था, लेकिन यह मामला वर्ष 1996 का है। उस समय टाडा कानून लागू नहीं था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिस के समक्ष दिया गया बयान रिकॉर्ड करने वाला टेप-रिकॉर्डर भी पेश नहीं किया गया। इस तरह बयान की सत्यता या वैधता की कोई पुष्टि अदालत के सामने नहीं हो सकी।
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यात्री, प्रत्यक्षदर्शी भी इलियास को नहीं पहचान पाए
लाइव लॉ के मुताबिक, अदालत ने रिकॉर्ड का निरीक्षण करते हुए पाया कि घटना से जुड़े यात्री और प्रत्यक्षदर्शी 29 वर्ष पूर्व हुए मोदीनगर–गाजियाबाद बस बम धमाके की पुष्टि करते हैं, परंतु कोई भी इलियास की पहचान नहीं कर पाया। बम बस में दिल्ली के कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर पहले से ही रखा गया था, इसलिए किसी भी यात्री का दोषी को ठीक पहचान पाना असंभव था। अभियोजन की ओर से जिन गवाहों को बाह्य-न्यायिक स्वीकारोक्ति का आधार बनाकर मुख्य गवाह बनाया गया था। उन्होंने अदालत में अपने बयान से मुकरकर पूरा मामला और कमजोर कर दिया।
टिकटें, डायरी किसी भी साजिश का सबूत नहीं
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत किए गए अन्य सबूत जैसे इलियास की जम्मू तवी की टिकटें या उसकी डायरी में सलीम करी नाम का जिक्र सिर्फ संदेह पैदा करते हैं। यह अपराध साबित नहीं करते। इस तरह इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलियास को वर्ष 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद और अन्य सजाएं रद्द कर दीं और आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में आवश्यक न हो, तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए। रिहा होने के बाद उसे धारा 437-A सीआरपीसी के तहत व्यक्तिगत बॉन्ड और दो जमानतदार देने होंगे।
क्या है मामला
दिल्ली से 27 अप्रैल 1996 को दोपहर 3:55 पर एक बस लगभग 53 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। बाद में 14 और यात्री बस में सवार हुए। शाम करीब पांच बजे जैसे ही बस मोदीनगर पुलिस स्टेशन (गाजियाबाद) से आगे निकली, बस के अगले हिस्से में एक जबरदस्त बम विस्फोट हुआ, जिसमें 10 व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई और करीब 48 यात्री घायल हो गए। बाद में मरने वाला का आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया था।

















