सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मिलिट्री एरिया की मस्जिद में आम नागरिकों की एंट्री पर रोक बरकरार, जानें पूरा मामला
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मिलिट्री एरिया की मस्जिद में आम नागरिकों की एंट्री पर रोक बरकरार, जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चेन्नई के सैन्य परिसर (मिलिट्री एरिया) के भीतर स्थित मस्जिद में आम नागरिकों को नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

Written byMahak SinghMahak Singh
Nov 18, 2025, 12:10 pm IST
inभारत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चेन्नई के सैन्य परिसर (मिलिट्री एरिया) के भीतर स्थित मस्जिद में आम नागरिकों को नमाज अदा करने की अनुमति देने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि सैन्य क्षेत्र बेहद संवेदनशील इलाका होता है और वहां सुरक्षा की दृष्टि से कई तरह की पाबंदियाँ जरूरी होती हैं। ऐसे में अदालत किसी ऐसे आदेश को पारित नहीं कर सकती, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़े।

यह मामला मद्रास हाई कोर्ट से शुरू हुआ था। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पहले ही याचिका खारिज कर दी थी। बाद में इस आदेश के खिलाफ अपील की गई, लेकिन हाई कोर्ट की खंडपीठ ने भी यही कहा कि सेना के प्रशासनिक निर्णय में न्यायालय दखल नहीं दे सकता। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील से स्पष्ट रूप से कहा कि सैन्य क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। “सुरक्षा और कई अन्य मुद्दे होते हैं, ऐसे में हम कैसे अनुमति दे सकते हैं?” पीठ का यही कहना था।

याचिकाकर्ता की दलील थी कि चेन्नई मिलिट्री एरिया स्थित “मस्जिद-ए-आलीशान” में आम लोगों के प्रवेश पर कभी कोई रोक नहीं थी। वकील ने बताया कि 1877 से लेकर 2022 तक नागरिक वहां नियमित रूप से नमाज अदा करते आए थे और कोविड-19 महामारी के दौरान ही अस्थायी तौर पर रोक लगाई गई थी। उनका कहना था कि महामारी समाप्त होने के बाद भी प्रतिबंध हटाया नहीं गया। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब मस्जिद सैन्य परिसर के भीतर स्थित है, तो सेना को यह अधिकार है कि वह सुरक्षा कारणों से बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाए। न्यायालय ने यह भी माना कि सेना द्वारा लिया गया निर्णय प्रशासनिक और नीतिगत है, जिसमें अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती जब तक कोई गंभीर कानूनी त्रुटि न हो। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने भी अपने आदेश में यह बात दोहराई थी कि स्टेशन कमांडर ने जून 2021 में मौखिक रूप से साफ कर दिया था कि मस्जिद मुख्य रूप से सैन्य यूनिट से जुड़े लोगों के उपयोग के लिए है। 1937 के कैंटोनमेंट लैंड एडमिनिस्ट्रेशन रूल्स के अनुसार, सैन्य क्षेत्र में स्थित धार्मिक स्थलों का उपयोग आम नागरिकों द्वारा नहीं किया जा सकता, जब तक सेना विशेष अनुमति न दे।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा को सर्वोपरि माना। अदालत ने कहा कि सेना जिन कारणों से प्रतिबंध लगा रही है, वे सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि सैन्य परिसर के अंदर स्थित मस्जिद में आम नागरिकों को प्रवेश देने का निर्णय सेना का ही होगा। कानून और सुरक्षा दोनों की दृष्टि से यह विषय सैन्य प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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