भोपाल: पाञ्चजन्य के ‘मध्य प्रदेश सुशासन संवाद 2.0’ में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हमने राजस्थान और सूबे का जल विवाद खत्म किया। मध्य प्रदेश नदियों का मायका है और हमने कहा कि अगर राजस्थान को थोड़ा ज्यादा पानी दे दें तो कोई दिक्कत नहीं है। हम प्रदेश के अंदर गीता जयंती भी मना रहे हैं और गीता भवन भी बना रहे हैं।
UP, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ नदी जोड़ो अभियान किया शुरू
उन्होंने कहा कि हर गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाना राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य है। सत्ता के माध्यम से व्यवस्थाओं में सुधार करना और आम जनता के सुख के लिए हर संभव प्रयास करना हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने कई नवाचार किए हैं। प्राकृतिक संसाधनों के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के साथ नदी जोड़ो अभियान शुरू किया गया है।
पाञ्चजन्य पत्रिका भारतीय विचार परंपरा का सशक्त संवाहक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पाञ्चजन्य समय से पहले चेतावनी देने और धर्म के मार्ग पर चलने का प्रतीक है। यह पत्रिका भारतीय विचार परंपरा का सशक्त संवाहक है और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रही है। भगवान कृष्ण ने पाञ्चजन्य और सुदर्शन चक्र सदैव अपने साथ रखा, जो उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता का प्रतीक हैं। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि उज्जैनी के संदीपनि आश्रम में प्राप्त शिक्षा और दीक्षा का योगदान उनके व्यक्तित्व में महत्वपूर्ण रहा।

कुलपति की जगह कुलगुरु शब्द दिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कुलपति से कुलगुरु शब्द भी सरकार के माध्यम से ही दिया गया। विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर को कुलगुरु नामित कर शिक्षा संस्थानों में भारतीयता की भावना बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गुरूपूर्णिमा, गीता जयंती सहित अन्य प्रमुख त्यौहार समाज के साथ मिलकर मनाने की परंपरा शुरू की है। इसका उद्देश्य समाज में आनंद और उत्सवी माहौल बनाना है।
उन्होंने कहा कि अपने सूबे के विकास के लिए कई प्रयोग किए। नारी सशक्तिकरण योजना के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया। रोजगार आधारित उद्योग लगाए। रोजगार आधारित उद्योग के लिए सरकार पैसे दे रही है। बस हमारी शर्त है कि बेरोजगारों को कारखाने में नौकरी दीजिए तो हम आपको सब्सिडी देंगे। रोजगार आधारित कामों को सरकार बढ़ावा दे रही है।
कश्मीर की डल झील क्यों…भोपाल की झील का आनंद लीजिए
उन्होंने कहा कि कश्मीर का डल झील का आनंद लेना जरूरी थोड़ी है भोपाल की झील का आनंद लीजिए। राजधानी की पहचान देश की संस्कृति से जुड़कर होनी चाहिए। एक द्वारा राजा भोज और एक विक्रमादित्य के नाम से उसी तरह भगवान कृष्ण और राम के नाम से भी बनाया। 7 अलग-अलग रोड़ों पर अलग अलग द्वार बनाकर राजधानी का गौरव बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि कपास 13 जिलों में आदिवासी अंचल में होता है। लेकिन कांग्रेस ने इसे बर्बाद कर दिया। हमारा कपास तमिलनाडु जा रहा है और वहां कपड़े बन रहे हैं और हमारा कपास हमारे यहां कोई काम का नहीं। यह कांग्रेस के कारण हुआ। लेकिन हमने अपने कपास को अपने ही यहां उपयोग किया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं संघ के सह कार्यवाह मध्य क्षेत्र हेमंत मुक्तिबोध, प्रांत संघचालक अशोक पांडे और पाञ्चजन्य के संपादक हितेष शंकर ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया। पाञ्चजन्य संपादक हितेश शंकर ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पाञ्चजन्य का विशेष अंक भेंट किया गया। इसके अलावा, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी, निदेशक विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी प्रवीण रेड्डी और डीबीजी टेक्नॉलाजी के प्रबंध निदेशक अभिशेक गर्ग का भी सम्मान किया गया।















