नई दिल्ली (हि.स.) । बिहार चुनाव में कुल निर्वाचकों की संख्या में अंतर को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे, जिस पर चुनाव आयोग ने शनिवार को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि संख्या में अंतर निर्वाचन नियमों के अनुरूप मिले वैध आवेदनों के कारण हुआ है और यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमबद्ध है।
6 अक्टूबर की मतदाता सूची और अंतिम प्रकाशित संख्या में अंतर क्यों?
आयोग ने बताया कि 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस नोट में कुल निर्वाचकों की संख्या 7.42 करोड़ बताई थी। यह संख्या विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 30 सितंबर को प्रकाशित सूची पर आधारित थी। उस समय उपलब्ध आधिकारिक सूची के अनुसार यही अंतिम संख्या थी।
नामांकन की अंतिम तिथि तक नए आवेदन स्वीकारने का प्रावधान
निर्वाचन नियमों के अनुसार, चुनाव की घोषणा के बाद भी नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक पात्र नागरिक नए मतदाता के रूप में आवेदन कर सकते हैं। बिहार में नामांकन की अंतिम तिथियां थीं—पहला चरण: 17 अक्टूबर, दूसरा चरण: 20 अक्टूबर। इस अवधि में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए जिन्हें नियमों के अनुसार जांचकर सूची में जोड़ा गया।
नए मतदाताओं के जुड़ने से बढ़ी कुल संख्या
चुनाव आयोग के अनुसार, 01 अक्टूबर से लेकर दोनों चरणों के नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पूर्व तक बड़ी संख्या में आवेदन आए। इनमें से जो आवेदन वैध पाए गए, उन्हें सूची में शामिल किया गया। इसी वजह से कुल मतदाता सूची में लगभग तीन लाख नए नाम जुड़े और संशोधित संख्या 7.45 करोड़ हो गई, जिसका उल्लेख आयोग ने मतदान उपरांत जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में किया।
प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार
आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची में यह अद्यतन पूरी तरह पारदर्शी, नियम आधारित और समावेशी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित न रहने पाए।

















