Red Fort Blast: अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाली डॉक्टर शाहीन शाहिद को दिल्ली के एक बड़े टेरर प्लॉट से जोड़कर गिरफ्तार किया गया है। वो पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में लगी हुई थीं और जांच एजेंसियों को शक था कि वो दुबई भागने की तैयारी कर रही थीं। लेकिन जम्मू-कश्मीर, सहारनपुर और फरीदाबाद में हुई गिरफ्तारियों ने उनके इस ग्रुप को बेनकाब कर दिया। शाहीन को 11 नवंबर को लखनऊ से पकड़ा गया। वो ग्रुप के डॉक्टरों का लीडर जैसी भूमिका निभा रही थीं और यूनिवर्सिटी कैंपस में ही कई गतिविधियां चल रही थीं।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान ट्रैकिंग
शाहीन ने हाल ही में पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था। 3 नवंबर को फरीदाबाद के एक पुलिस वाले ने अल-फलाह कैंपस जाकर उनकी फोटो ली, ठीक उसी वक्त जब एंटी-टेरर टीमें उन्हें तलाश रही थीं। जांच में पता चला कि उनका सहकर्मी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई 30 अक्टूबर को गिरफ्तार हुआ था। उसके पास शाहीन की स्विफ्ट डिजायर कार मिली, जिसमें एक असॉल्ट राइफल छिपी हुई थी। मुजम्मिल ही अमोनियम नाइट्रेट का स्टॉक जमा करने में लगा था। 9 नवंबर को फरीदाबाद के दो किराए के ठिकानों से करीब 3,000 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक बरामद हुए। उसी दिन शाहीन की एक और कार, मारुति ब्रेजा, 10 नवंबर के दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी बताई गई। ये कार सितंबर में शाहीन के नाम रजिस्टर हुई थी और कैंपस के टावर 17 के पास मिली। जे एंड के पुलिस ने पूछताछ में पता लगाया कि चाबी कहां है, फिर उसे रिकवर किया।
ग्रुप के अंदरूनी झगड़े सुलझातीं शाहीन
जांचकर्ताओं के मुताबिक, शाहीन इस ‘व्हाइट-कोट’ टेरर मॉड्यूल की मुख्य लीडर थीं। ग्रुप में ज्यादातर डॉक्टर और स्टूडेंट्स कश्मीर या अपने इलाके से थे। जब भी डॉक्टरों के बीच झगड़े होते, शाहीन बीच में आकर सुलझातीं। उनका फोकस यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स और डॉक्टरों पर था। अब कई और नामों पर नजर है। शुरू में जे एंड के पुलिस ने सिर्फ इतना बताया कि वो एक मेल डॉक्टर को पकड़ने आई हैं, जो कश्मीर में आपत्तिजनक पोस्टर्स लगाने के आरोपी हैं। लेकिन बाद में पूरा केस सामने आया।
नूह जिले में पांच हिरासतें
पिछले एक हफ्ते में नूह से पांच लोग हिरासत में लिए गए—तीन एमबीएस डॉक्टर, एक उर्वरक विक्रेता और एक मौलवी। गुरुवार रात फरीदाबाद झिरका से दो डॉक्टर पकड़े गए। एक सानेहरा का है, जिसने चीन से एमबीएस किया और 2 नवंबर तक अल-फलाह में इंटर्नशिप कर रहा था। दूसरा अहमदबास गांव का, वो भी यहीं का स्टूडेंट है। दोनों डॉक्टर उमर उन नबी के करीबी बताए जाते हैं, जिसकी हुंडई आई20 कार रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास फटी, जिसमें 13 लोग मारे गए। कार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और फरीदाबाद झिरका से दिल्ली की ओर जाती दिखी थी। तीसरा डॉक्टर तौऊ कस्बे से है, जो प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करता था और अल-फलाह का पूर्व स्टूडेंट रहा। शुक्रवार को एनआईए ने पिनंगवां समेत कई जगहें छानीं। एक उर्वरक दुकानदार को 300 किलो अमोनियम नाइट्रेट सप्लाई के लिए हिरासत में लिया। वो लाइसेंस्ड था, लेकिन खरीदारी का मकसद चेक नहीं किया। कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
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सुरक्षा के सख्त इंतजाम
जिले भर में हाई अलर्ट है। फरीदाबाद पुलिस ने एनआईटी, बल्लभगढ़ और सेंट्रल जोन में सघन चेकिंग शुरू की। संवेदनशील इलाकों, बाजारों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने कहा कि स्पेशल टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं ताकि कोई शक की चीज न छूटे। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने भारत नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 लागू की। इसके तहत होटल, गेस्ट हाउस, पीजी, किराएदारों, साइबर कैफे और पुरानी गाड़ियों के डीलरों पर सख्ती बरती जा रही है। हर जगह आईडी डिटेल्स रिकॉर्ड करने पड़ेंगे।
विदेशियों के लिए सी-फॉर्म जरूरी। घर मालिकों को किराएदारों की पुलिस वेरिफिकेशन करानी होगी। कार डीलरों को बिक्री की डिटेल्स पुलिस को देनी होंगी। मोबाइल वेंडर्स को पुराने फोन या सिम की हर डील का रिकॉर्ड रखना पड़ेगा, जिसमें नाम, एड्रेस, आईएमईआई और एफिडेविट शामिल। शुक्रवार को रिटायर्ड डिफेंस वाले कुछ रेसिडेंट्स ने पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता से मिलकर जांच में मदद की पेशकश की।

















