राजधानी दिल्ली में ब्लास्ट के पीछे की असली कहानी देश में पूरब से पश्चिम तक छिपे उन गद्दारों से जुड़ी है, जो भारत की शांति, समद्धि, एवं सशक्त सरकार से चिढ़ते हैं और बर्बादी के रोज नए षडयंत्र रचते हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते कश्मीर घाटी, गुजरात से उत्तर प्रदेश तक आतंकियों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कर विस्फोटकों का जखीरा न पकड़ा होता तो हालात कहीं ज्यादा विनाशक हो सकते थे। जांच में यह बात भी साफ हो गई है कि अहमदाबाद से आतंकी डॉ. मोहिउद्दीन सैयद, आजाद सुलेमान शेख, मोहम्मद सुहेल सलीम की गिरफ्तारी, फिर फरीदाबाद में डॉ. मुजम्मिल और लखनऊ की महिला आतंकी शाहीन पर शिकंजा कस जाने से पूरा आतंकी मॉड्यूल घबरा गया था।
लालकिले के पास धमाका उसी घबराहट व बौखलाहट का नतीजा माना जा रहा है। यह बात अब और पुख्ता इसलिए भी हो गई है कि अब दिल्ली ब्लास्ट में शामिल डॉ. उमर के मारे जाने की पुष्टि हो गई है, DNA जांच से साफ हुआ कि धमाके की जगह मिले अज्ञात शव के अवशेष उमर की ही थे।
आतंक के विरूद्ध मोर्चे पर भारत ने 2014 के बाद जिस तरह से आक्रामक रुख अपनाया है, इस सच्चाई को पूरा विश्व जानता है। उरी, पुलवामा और पहलगाम में घटनाओं के बाद भारत की जमीनी-हवाई स्ट्राइक और फिर ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में फल-फूल रही आतंक की नर्सरी पर एक से बढ़कर एक चोट करके दिखाई है। भारतीय सेनाओं के मारक प्रहार की वजह से सीमा पार से आतंकी घुसपैठ में कमी आई है, जिसकी वजह से आतंक के आका बौखला रहे हैं और जिहादी जाल में फंसाकर भारत के अंदर भारत के गद्दारों की नई पौध खड़ी कर रहे हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कश्मीर, गुजरात, हरियाणा, यूपी में आतंकियों का तोड़ा-फोड़ा गया आतंक का माड्यूल सीमा पार से रचे जा रहे षडयंत्रों की बानगी बनकर फिर सामने आया है। आतंकवाद रोधी अभियान में देश के कई राज्यों से 2900 किलो ग्राम विस्फोटक, अत्याधुनिक हथियार, घातक रसायन, इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों की बरामदगी ने देश पर मंडरा रहे बड़े खतरे को टाला है।
जिहादी नर्सरी, जहरीली सोच
राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों को दहलाने के षडयंत्रों में जुटे आतंकी नेटवर्क पर जिस तरह से शिकंजा कसा है, उसे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर घाटी में लगाए गए कुछ नफरती पोस्टरों के जरिए देश में तैयार हो रहे आतंक के नए माड्यूल पर एजेंसियों ने एकजुटता के साथ आक्रामक चोट की है। चरणबद्ध रूप से देखें तो एजेंसियों ने 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बनपोरा नौगाम क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे ऐसे पोस्टरों के जरिए अपनी जांच को आगे बढ़ाया थी।
उर्दू में लिखे उन पर्चों में स्थानीय लोगों को सुरक्षा बलों का सहयोग न करने की धमकी दी गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने छानबीन के बाद षडयंत्र में शामिल मौलवी इरफान अहमद बाघे को शोपियां से 20 अक्टूबर और जमीर अहमद को गांदरबल से 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद 5 नवंबर को यूपी के सहारनपुर से डॉ. अदील पर शिकंजा कसा गया, जो गोपनीय तरीके से आतंकी नेटवर्क के लिए काम कर रहा था।
इसी क्रम में 7 नवंबर को अनंतनाग के एक हॉस्पिटल से एके-56 के साथ गोला-बारूद की बरामद की गई। अगले ही दिन फरीदाबाद के अल फलाह मेडिकल कॉलेज से विस्फोटक के साथ कई हथियार जब्त किए गए। जिहादी मौलवी बाघे ने सुरक्षा एजेंसियों को फरीदाबाद के मेडिकल प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल राज तक पहुंचाया था। डॉ. मुजम्मिल की गिरफ्तारी व पूछताछ से और भी हैरान कर देने वाले आतंकी रहस्य उजागर हुए थे।
केन्द्रीय एजेंसियों के साझा अभियान में इसके बाद 10 नवंबर को जैश की महिला आतंकी डॉ. शाहीन भी पकड़ ली गई, जो डॉ. मुज्जमिल की प्रेमिका निकली। शाहीन की कार से एके-47 की बरामदगी से लखनऊ में जड़े जमा रहे आतंकी नेटवर्क का स्याह सच सामने आ गया। पकड़े गए आतंकियों के फोन से तमाम पाकिस्तानी नंबर मिले हैं जो आतंकी हैंडलर के हो सकते हैं। चौंका देने वाली बात ये है कि अलग-अलग जगहों से पकड़े गए 8 में 7 आतंकी कश्मीर घाटी से ही जुड़े पाए गए हैं।
श्रीनगर के नौगाम से आरिफ निसार डार, यासिर उल अशरफ, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, शोपियां से मौलवी इरफान अहमद, गांदरबल से जमीर अहमद अहंगर, पुलवामा से डॉ. मुजम्मिल गनई और कुलगाम से डॉ. आदिल के अलावा डॉ. शाहीन लखनऊ की रहने वाली निकली है।
सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई और संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं और जल्द ही ऐसे कई दुश्मन चेहरे कानून के शिकंजे में नजर आ सकते हैं। अभी तक की संयुक्त ऑपरेशन में सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी आतंकी गुट जैश व आईएस से जुड़े अंसार गजवत-उल-हिन्द के खतरनाक मंसूबों को नाकाम कर दिया है। पकड़ा तो दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर भी जाता, लेकिन उसको अलग-अलग जगहों से आतंकी साथियों की गिरफ्तारी की भनक लग गई थी और फरार होकर उसने कार से ब्लास्ट कर डाला, जिसमें वह खुद भी मारा गया।
कट्टरपंथी षडयंत्र पुराना
पुलिस सूत्रों का कहना है कि देश में धमाकों का साजिश और आतंकियों की भर्ती करीब दो साल से चल रही थी। व्हाइट कॉलर आतंकी नेटवर्क चला रहा ग्रुप लोगों को कट्टरपंथी बनाने, धन व रसद पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का सहारा ले रहा था। समाजसेवा एवं शैक्षणिक कार्यों के जरिए भी धन जुटाया जा रहा था। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और आतंकी नेटवर्क के जरिए भारत में बड़ा हमला कराने की फिराक में था। 2900 कुंतल विस्फोटक की बरामदगी इस बात को दर्शाती है कि आतंकी देश में कितनी जगह घटनाएं करना चाहते थे। नए आतंकी मॉड्यूल पर कार्रवाई से घबराए आतंकियों ने दिल्ली में ब्लास्ट कर दिया !
आतंक की नर्सरी में अब डॉक्टर
भारत से अमेरिका तक दुनिया भर में होती रहीं आतंकी घटनाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं के शामिल किए जाने का सच किसी से छिपा नही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में अब मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें जिहाद व आतंक की राह पर ले जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। देश में पनप रहे नए आतंकी माड्यूल में शामिल 4 डॉक्टरों की गिरफ्तारी होना बेहद गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रही है, जो जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवातुल हिंद जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़े निकले हैं। डॉक्टर का चोला पहनकर ये जहरीले चेहरे देश की कई मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को जिहाद व आतंक के रास्ते पर ले जाने का काम कर रहे थे। 25 से अधिक छात्र उनके बहकाबे में आकर आतंकी नेटवर्क में शामिल भी हो चुके थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में रचा-बुना जा रहा षडयंत्र दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, लखनऊ, हैदराबाद, अहमदाबाद जैसे बड़े महानगरों में हमले का था। भर्ती युवाओं को उसके लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही थी। लालकिले के पास धमाके में शामिल उमर मोहम्मद भी पेशे से डॉक्टर था और आतंकी नेटवर्क से सीधा जुड़ा था।
इतना विस्फोटक आया कहां से ?
सुरक्षा एजेंसियों के साझा अभियान में करीब 3 टन विस्फोटक की बरामदगी सबको सकते में डालने वाली है। फरीदाबाद में धरपकड़ एवं विस्फोटक की बरामदगी के कुछ ही घंटे बाद दिल्ली में लालकिले के धमाका यह बात साफ करने के लिए काफी है कि आतंकी नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई न होती तो उसके परिणाम बहुत भयावह होते। बड़ा सवाल ये है कि आतंकी संगठनों में शामिल डॉक्टर मॉड्यूल इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोट में प्रयोग होने वाला अमोनियम नाइट्रेट आखिर कहां से लेकर आया ? इस काम में कितनी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ, कितने लोग लेकर आए और भंडारण के लिए जगह की व्यवस्था किसने कराई, एजेंसियां इन सवालों के तह में जाने के प्रयास में जुटी नजर आ रही हैं। बता देना जरूरी है कि 2019 के पुलवामा हमले में भी आडीएक्स के साथ अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं, उससे पहले मुंबई व दिल्ली में हुए आतंकी हमलों में भी इंडियन मुजाहिदीन ने इसी घातक रसायन का प्रयोग किया था।
फरीदाबाद से तीन डॉक्टरों समेत 8 की गिरफ्तारी से खुलासा हुआ है कि आतंकी नेटवर्क कश्मीर से हरियाणा, यूपी, गुजरात, दिल्ली सहित कई राज्यों में फैला हुआ था। सफेदपोश आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ होने के बाद यह अंदेशा भी जताया जा रहाह कि फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में कहीं बड़े पैमाने पर आरडीएक्स बनाने का खेल तो नहीं चल रहा था ? इन सवालों को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंकि अल-फलाह विश्वविद्यालय की बिल्डिंग नंबर-17 का कमरा नंबर-13 में डॉ. मुजम्मिल अहमद गनोई उर्फ मसैब के नाम दर्ज था और सके बगल वालस कमरा डॉ. उमर के नाम अलॉट था लेकिन दोनों साथ रहते थे और हर षडयंत्र में शामिल थे। दिल्ली धमाके में डॉ. उमर के मारे जाने की चर्चा है। जितना विस्फोटक अभी तक की छापेमारी में मिला है, उससे 10-20 नहीं, बल्कि सैकड़ों बम बनाए जा सकते थे। आतंकी ग्रुप अगर अपने मंसूबों में कामयाब हो गए होते तो कई शहर दिल्ली जैसे धमाके झेलते !
तालीम की आड़ में तबाही के मंसूबे
गुजरात आतंकवादी निरोधक दस्ते (एटीएस) की छापेमारी में पकड़ा गया चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुका डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सैयद आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए रिसिन नाम का बेहद घातक जहर तैयार कर रहा था। रिसिन वही जहर है, जिसके जरिए 2013 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और 2020 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्राम को मारने की कोशिश की जा चुकी है। इसका इस्तेमाल युद्ध और जासूसी में होता रहा है। डॉ. मोहिउद्दीन के गिरफ्तार साथी यूपी में शामली का रहने वाला आजाद सुलेमान शेख और लखीमपुर खीरी निवासी मोहम्मद सुहैल भी षडयंत्र में शामिल थे। सुहैल ने मुजफ्फरनगर में इस्लामिक पढ़ाई की थी और आतंक की राह चलता हुआ गुजरात जा पहुंचा था, जहां से पकड़ा गया। गुजरात, हरियाणा, यूपी, कश्मीर पुलिस व एटीएस अब तक पकड़े गए सभी आतंकी व संदिग्ध चेहरों के कनेक्शन खंगालते हुए जांच को आगे बढ़ा रही हैं।
पाकिस्तान में सादिया, भारत में शाहीन
जांच एजेंसिया छानबीन पूरी होने तक दिल्ली की घटना को आत्मघाती हमला नहीं मान रही हैं। अफसरों का कहना है कि हालात देखते हुए लगता है कि डॉ. उमर गिरफ्तारी के डर से भागा था। बौखलाहट-घबराहट में विस्फोट हुआ। शुरूआती जांच में विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट, ईंधन तेल व डिटोनेटर के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। मौके से मिले क्षत-विक्षित शव के उमर का होने की आशंका जताई जा रही है और पहचान के लिए दिल्ली पुलिस कश्मीर की टीमों के संपर्क में है। इसी सिलसिले में उमर की मां का डीएनए नमूना भी लिया गया है। ब्लास्ट में इस्तेमाल कार खरीदने वाला आमिर आतंकी उमर का भाई निकला है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान स्थित जमात उल मोमीनात जैश का महिला संगठन है, जिसकी हैड सादिया अजहर कुख्यात आतंकी मसूद अजहर की बहन है और उसका शौहर यूसुफ अजहर कांधार विमान अपहरण का मास्टर माइंड आतंकी रहा है। हाल में पकड़ी गई डॉ. शाहीन जैश की महिला विंग की भारत में कमान संभाल रही थी।
दोषी बख्शे नहीं जाएंगे : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो टूक कहा है कि दिल्ली धमाके के दोषियों को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। साजिशकर्ता हों या धमाके में शामिल लोग, एक-एक को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी। घटना ने सभी को बहुत दुखी किया है। वह प्रभावित परिवारों का दुख समझते हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है। मैं घटना की जांच कर रही सभी एजेंसियों के संपर्क में हूं। सरकार इस घटना को बहुत गंभीरता से ले रही है।

















