दिल्ली में सोमवार शाम लाल किला के पास हुए धमाके में इस्तेमाल हुई कार को लेकर जो खुलासे हुए हैं, उसने हर किसी को चौंका दिया। जांच में पता चला कि हरियाणा नंबर की आई-20 कार (HR 26 CE 7674) कई बार खरीदी और बेची गई थी। यह कार फरीदाबाद से दिल्ली फिर गुरुग्राम और आखिर में पुलवामा तक पहुंची और इस दौरान इसके करीब सात मालिक बदल चुके थे। अब जांच एजेंसियां इस कार के पहले से लेकर आखिरी तक सभी मालिकों से पूछताछ कर रही हैं।
दस्तावेज हों पूरी तरह सही और अपडेटेड। वाहन खरीदते या बेचते समय सबसे जरूरी चीज है दस्तावेज़ों की जांच। मूल आरसी हमेशा विक्रेता से लें। वाहन की जानकारी परिवहन सेवा पोर्टल (https://parivahan.gov.in) पर ऑनलाइन जांचें। यह सुनिश्चित करें कि वाहन पर कोई बकाया चालान, लोन या केस न हो। अगर वाहन पर पहले से कोई हाइपोथिकेशन (Loan lien) है, तो बैंक से उसका NOC जरूर लें। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 50 के तहत, वाहन बेचते या खरीदते समय मालिकाना हक़ का ट्रांसफर करवाना अनिवार्य है। इसके लिए आपको दो फॉर्म भरने होते हैं- फॉर्म 29: यह बताता है कि वाहन बेच दिया गया है। फॉर्म 30: यह बताता है कि वाहन का ट्रांसफर किसके नाम पर होना है। ये दोनों फॉर्म ऑनलाइन परिवहन सेवा पोर्टल पर या अपने संबंधित आरटीओ कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं।
अक्सर लोग वाहन बेचने के बाद केवल सेल एग्रीमेंट बनवाकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है। जब तक वाहन की आरसी में नया मालिक दर्ज नहीं होता, तब तक रिकॉर्ड में वही व्यक्ति मालिक माना जाता है जिसने वाहन बेचा था। अगर वाहन किसी अपराध में इस्तेमाल होता है, कोई दुर्घटना होती है या चालान बनता है तो जिम्मेदारी पुराने मालिक की होगी। वाहन बेचने के बाद एक सेल एग्रीमेंट या बिक्री प्रमाण पत्र तैयार करें और उसकी एक प्रति अपने पास रखें। इसमें निम्नलिखित बातें अवश्य हों- खरीदार और विक्रेता का पूरा नाम व पता। हन की पूरी जानकारी (नंबर, मॉडल, चेसिस नंबर आदि)। बिक्री की तारीख और राशि। दोनों पक्षों के हस्ताक्षर। यह दस्तावेज किसी विवाद या जांच के समय आपकी कानूनी सुरक्षा के लिए बहुत काम आता है।
वाहन बेचने के बाद ट्रांसफर का आवेदन 30 दिनों के भीतर संबंधित आरटीओ में कराना जरूरी है। अगर वाहन दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा रहा है, तो एनओसी लेना न भूलें। ट्रांसफर में देरी होने पर जुर्माना भी लग सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त अनिल छिकारा के मुताबिक, विक्रेता को वाहन बेचने के बाद आरटीओ को तुरंत सूचित करना चाहिए कि वाहन उसने बेच दिया है। साथ ही, हस्तांतरण वाले फॉर्म (29 और 30) की एक प्रति अपने पास रखें। इससे भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई या जांच में यह साबित किया जा सकता है कि वाहन अब आपके पास नहीं है। केवल विक्रेता ही नहीं, खरीदार को भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-
वाहन खरीदने से पहले चेसिस नंबर और इंजन नंबर मिलान करें। वाहन के सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी रखें। अगर सेकंड हैंड वाहन डीलर से खरीद रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह अधिकृत (Registered Dealer) हो।

















