दिल्ली दंगा-2020 : इस्लामी आग भड़काने का षड्यंत्र
June 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

दिल्ली दंगा-2020 : इस्लामी आग भड़काने का षड्यंत्र

दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र दिया है, जिसमें कहा गया है कि 2020 में दिल्ली में हुए दंगे केंद्र सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने के लिए कराए गए थे। आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त प्रमाण हैं। इसलिए ये एक दिन भी जेल से बाहर रहने लायक नहीं हैं

Written byआशीष रायआशीष राय
Nov 11, 2025, 02:49 pm IST
in विश्लेषण, दिल्ली
दिल्ली दंगे के दौरान शाहरुख पठान नामक एक दंगाई पुलिस पर पिस्ताैल तानते हुए

दिल्ली दंगे के दौरान शाहरुख पठान नामक एक दंगाई पुलिस पर पिस्ताैल तानते हुए

वर्ष 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के मुख्य अभियुक्तों उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा उर रहमान की जमानत याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा दायर किए गए 177 पृष्ठों के शपथपत्र ने देश को चौंका दिया है।

आशीष राय
अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय

शपथपत्र में दिल्ली पुलिस का कहना है कि 2020 के दिल्ली दंगे ‘स्वतःस्फूर्त’ नहीं थे, बल्कि एक गहरी सुनियोजित आपराधिक साजिश का परिणाम थे। इस साजिश का उद्देश्य राज्य को अस्थिर करके सत्ता परिवर्तन करना था। यह षड्यंत्र तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के वक्त रचा गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके और नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.), 2019 के विरोध प्रदर्शनों को एक सांप्रदायिक तनाव के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

पर्याप्त साक्ष्य

शपथपत्र में यह भी बताया गया है कि साक्ष्य (जैसे व्हाट्सएप चैट, दस्तावेज आदि) से यह पता चलता है कि ऐसी अशांति को पूरे देश में फैलाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका को ‘प्रथम दृष्टया गंभीर’ बताया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए, समुदायों के बीच तनाव पैदा किया और विरोध प्रदर्शन को हिंसक रूप देने की दिशा में समूहों को संगठित किया। पुलिस ने कहा है कि उनके पास मौखिक, दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि संविधान अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता की गारंटी तो देता है, लेकिन विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसक या षड्यंत्रकारी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं।

सीएए कानून

दरअसल, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 में दुबारा सत्ता में आई राजग सरकार ने जुलाई में तीन तलाक पर मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम संसद से पारित कराकर कानून बना दिया। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर, 2019 को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम संसद में प्रस्तुत किया। यह कानून कहता है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई मत के शरणार्थियों को, जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं, अब ‘गैरकानूनी प्रवासी’ नहीं माना जाएगा और वे भारतीय नागरिकता के पात्र होंगे। इस कानून में मुसलमानों को शामिल नहीं किया
गया था।

उत्तेजक भाषण

‘इकोसिस्टम’ ने षड्यंत्र पूर्वक सरकार के विरोध की कमान राजनैतिक हाथों में न देकर तथाकथित नागरिक संगठनों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं को सौंपी जिससे यह संदेश जाए कि यह विरोध देश का आम नागरिक कर रहा है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह डर दिखा कर कि सी.ए.ए. को एन.आर.सी. (नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन्स) से जोड़ कर देश के मुसलमानों को ‘डिटेंशन सेंटर’ में डाल दिया जाएगा। इसके विरोध की शुरुआत उत्तर-पूर्वी राज्यों से कराई गई। फिर उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, बिहार के साथ दिल्ली में प्रदर्शन शुरू हुए। दिल्ली के जामिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को केंद्र बना दिया गया।

15-16 दिसंबर, 2019 से दिल्ली के शाहीन बाग़ में लंबे समय तक सड़क बंद करके आंदोलन चलाया गया, फिर जाफराबाद दिल्ली को केंद्र बनाया। जनवरी–फरवरी 2020 के बीच मुंबई, लखनऊ, पटना, अमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु आदि में रैलियां करके सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने का प्रयास किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की यात्रा के दौरान 23-27 फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे कराए गए, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई।

751 एफ.आई.आर.

दिल्ली दंगों में 751 एफ. आई. आर. दर्ज हुई हैं। सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष अभियुक्तों के सभी अधिवक्ताओं ने यही प्रश्न बार-बार उठाया कि इतनी एफ. आई. आर. में सिर्फ एक एफ. आई. आर. में इनके नाम हैं, लेकिन शायद वे भूल जाते हैं कि आतंकी घटना की एक एफ. आई. आर. ही पूरी साजिश से पर्दा उठाने के लिए काफी है, क्योंकि वही एफ. आई. आर. इस पूरे षड्यंत्र को सामने लाने वाली है।

ये सारे अभियुक्त भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों को रोकने के लिए बनाए गए कानून अवैध गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के अंतर्गत निरुद्ध हैं। सभी अभियुक्त लगभग साढ़े पांच साल से जेल में हैं और इनकी इसी अवधि को आधार बनाकर उनके अधिवक्ता उनकी जमानत पर जोर दे रहे हैं, जबकि अवैध गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1967 की धारा 43 डी के अनुसार ऐसे मामलों में प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मजबूत होने पर जमानत नहीं मिलती है। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी से जुड़े इनके अधिवक्ताओं ने हिरासत की अवधि को आधार बनाकर अपनी बहस से अपराध की गंभीरता से पीठ का ध्यान भटकाने का प्रयास किया है।

न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास

शरजील इमाम की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार ने उसके अधिवक्ता से जब यह प्रश्न किया कि भाषण में उसने क्या कहा है तब उसके अधिवकता ने न्यायालय को यह कहकर भ्रमित करने का प्रयास किया कि उसने सिर्फ चक्का जाम की बात की थी, जबकि शरजील इमाम के अपने कुछ भाषणों में साफ कहते हुए दिख जाता है कि यह केवल सी.ए.ए. का मामला नहीं है। वह तीन तलाक के कानून की भी बात करता है।

सड़क के साथ शहर बंद करने के लिए उकसाता है। ‘डिटेंशन सेंटर’ को आग लगाने की बात करता है और तो और उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत से अलग करने की बात भी करते हुए कहता है, “हम हिंदुस्तान और नॉर्थ ईस्ट को हमेशा के लिए बंद कर रहे हैं, हमेशा के लिए नहीं तो 1-2 महीने के लिए तो कर ही सकते हैं…. इतना मलबा डालो पटरी पर कि इनको हटाने में 1 महीना लगे। असम इंडिया से कट के अलग हो जाएगा, तभी यह हमारी बात सुनेंगे।” ऐसे उसके अनेक भाषण हैं। उसके सभी भाषण देश-विरोधी और सरकार को सत्ता से हटाने वाले प्रतीत होते हैं।

शिफा उर रहमान के अधिवक्ता ने तो इन विरोध प्रदर्शनों को वियतनाम युद्ध के समय हुए शिकागो ट्रायल से जोड़ कर दूसरी दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सरकारें कभी-कभी राजनीतिक असहमति को साजिश मान लेती हैं, पर वियतनाम युद्ध विरोध और दिल्ली दंगों की साजिश को एकरूप करना कहीं से भी बौद्धिक तर्क नहीं लगता है। वियतनाम युद्ध एक विदेश नीति विरोधी आंदोलन था, जबकि दिल्ली दंगा मामला घरेलू सांप्रदायिक हिंसा और यू.ए.पी.ए. आरोपों से जुड़ा है। दोनों की परिस्थिति और परिणाम बिल्कुल अलग-अलग हैं।

बिगड़ा खेल

दिल्ली पुलिस के शपथपत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि उस देश विरोधी ‘इकोसिस्टम’ का उद्देश्य राज्य को अस्थिर करके सत्ता परिवर्तन करना था, परंतु दिल्ली पुलिस की तत्परता ने उसके पूरे खेल को बिगाड़ दिया। बाद के दिनों में देश ने देखा ही है कि कैसे श्रीलंका, बांग्लादेश फिर नेपाल में ऐसे ‘खेल’ सफल भी हुए हैं। इसीलिए सरकार ने उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा उर रहमान की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए स्पष्ट कहा कि इनके खिलाफ सारे सबूत मौजूद हैं और ये लोग एक दिन भी जेल से बाहर रहने के लायक नहीं हैं।

Topics: शिफा उर रहमानShifa Ur Rehman डोनाल्ड ट्रंपशरजील इमामउमर खालिदumar khalidदिल्ली दंगा-2020पाञ्चजन्य विशेषआशीष रायमीरान हैदरगुलफिशा फातिमा
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जनजाति सुरक्षा मंच का प्रतिनिधिमंडल

विशेष रिपोर्ट : जनजातीय पहचान बचाने की पहल

कौन हैं संदिग्ध घुसपैठिए और कैसे मची वापसी की होड़? : बंगाल के Deport Plan की परख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश : ‘सामने खर-दूषण हों तो शस्त्र भी उठाना होगा!’

संस्कारहीन सियासत, ओछे बोल

अपने साथी विधायकों के साथ कोलकाता में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए ऋतब्रत बनर्जी (मध्य में)

पश्चिम बंगाल : सत्ता गई, पार्टी टूटी

कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय में मार्को रुबियो और उनकी पत्नी जेनेट डी. रुबियो

मिशनरी धुरी पर मार्को

Load More

ताज़ा समाचार

पुस्तक का लोकार्पण करते (बाएं से) डॉ. शाम लाल कठपालिया,श्रीमती गीता कठपालिया,
श्री आलोक कुमार, श्री इंद्रेश कुमार और बाबा भूपिंदर सिंह पटियाला

‘किसी का अहित न करना ही सबसे बड़ी निरोगता’

Bangladesh halt Sriram statue contruction

क्या बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के आगे झुकी सरकार? बंद किया श्रीराम प्रतिमा का निर्माण

समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव की घटना में आरपीएफ ने दर्ज कराई एफआईआर 

Gold Silver Price Today

Gold Silver Price Today: आज फिर बदले सोने-चांदी के दाम, जानिए अपने शहर का भाव

Love Jihad Islamic conversion Bhopal

कर्नाटक लव जिहाद: नईम बेग ने दलित हिन्दू लड़की को फंसाया, रेप किया और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया

प्रतीकात्मक तस्वीर

अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी पर बड़ा एक्शन, भारत-बांग्लादेश ने बॉर्डर सुरक्षा को लेकर लिए अहम फैसले

सायोनी घोष के ममता बनर्जी से बगावत पर छलका महुआ मोइत्रा का दर्द, बोलीं- अब किस पर भरोसा करेंगे?

Jaspal Rana death

निशानेबाज पद्मश्री जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

विश्व बाल श्रम विरोध दिवस

विकसित भारत के लिए कठोर बालश्रम से मुक्त समाज की अनिवार्यता डॉ. निवेदिता शर्मा

TMC के 28 में से 19 सांसदों ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, इस टूट से ऐसे बदल जाएगा लोकसभा का गणित; NDA होगी और मजबूत

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies