2014 के बाद भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है और देश इस क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बन चुका है। भारत की अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता मार्च 2014 में लगभग 76.37 गीगावाट थी, जो जून 2025 तक लगभग 226.79 गीगावाट हो गई। यानी लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। इसमें सौर ऊर्जा क्षमता 110.9 गीगावाट, पवन ऊर्जा की 1.3 गीगावाट और अन्य अक्षय स्रोतों की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
2025 की पहली छमाही में भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन में 25 प्रतिशत और पवन ऊर्जा उत्पादन में 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। अक्षय ऊर्जा का कुल बिजली उत्पादन में हिस्सा भी बढ़कर लगभग 22.2 प्रतिशत हो गया है। अक्षय ऊर्जा क्षमता में दुनिया में भारत का स्थान चौथा, पवन ऊर्जा में चौथा तथा सौर ऊर्जा तीसरा है।
भारत ने 2030 के लिए 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा था, जिसे 2025 में ही आधा पूरा कर लिया है। सरकार की कई योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, नीतिगत समर्थन और सौर-पवन प्रौद्योगिकी में लागत और दक्षता सुधार ने इस क्षेत्र की तेजी को संभव बनाया है।

















