पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े मानव तस्करी और सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। ईडी की कोलकाता ज़ोनल टीम ने 7 नवंबर को बिधाननगर, कोलकाता और सिलीगुड़ी समेत कई इलाकों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने 1 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद, दो लग्जरी गाड़ियां, कई डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों से जुड़ी अहम जानकारी बरामद की है।
रोजगार का झांसा देकर महिलाओं को धंधे में धकेला- जांच में ईडी को यह पता चला कि यह गिरोह बार-कम-रेस्टोरेंट और डांस बारों के जरिए महिलाओं का शोषण करता था। आरोपी पहले महिलाओं को नौकरी देने का झांसा देते थे और फिर उन्हें जबरदस्ती इस गैरकानूनी धंधे में धकेल देते थे। कई बार महिलाओं को धमकाकर और ब्लैकमेल करके उनसे जबरन काम करवाया जाता था। इस गिरोह ने इसी रास्ते से कई करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी। ईडी ने बताया कि इस रैकेट के मुख्य आरोपी जगजीत सिंह, अजमल सिद्दीकी और बिश्नु मुंद्रा हैं। ये तीनों और इनके सहयोगी मिलकर कई बार और रेस्टोरेंट चलाते थे, जिनका इस्तेमाल मानव तस्करी और सेक्स रैकेट चलाने के लिए किया जा रहा था। इन जगहों पर बाहरी राज्यों से लड़कियों को बुलाया जाता था और फिर उन्हें बंधक बनाकर ग्राहकों के साथ भेजा जाता था। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने अवैध पैसों को वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा ले रहे थे। वे नकद में कमाए गए करोड़ों रुपये को कई शेल कंपनियों (कागज़ी कंपनियों) के खातों में जमा करते थे और वहां से लेन-देन दिखाकर उसे वैध आय की तरह पेश करते थे। इस तरह वे अपराध से कमाए गए पैसों को सिस्टम में घुमा-फिराकर सफेद बना लेते थे।
छापेमारी में बरामद हुआ भारी कैश और लग्जरी गाड़ियां- ईडी की छापेमारी में कुल 1.01 करोड़ रुपये नकद मिले। इसके अलावा दो लग्जरी गाड़ियां एक Land Rover Defender और एक Jaguar जब्त की गई हैं। साथ ही, एजेंसी को कई डिजिटल डिवाइस, प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारियां भी मिली हैं। इन सबकी जांच फिलहाल जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितनी बड़ी रकम अब तक विदेशों या अन्य राज्यों में भेजी गई है। ईडी ने यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल पुलिस की कई एफआईआर और चार्जशीट्स के आधार पर शुरू की थी। पुलिस ने इन मामलों को आईपीसी (Indian Penal Code), आर्म्स एक्ट और Immoral Traffic Prevention Act (ITPA) के तहत दर्ज किया था। इन एफआईआर में भी इन्हीं तीन मुख्य आरोपियों जगजीत सिंह, अजमल सिद्दीकी और बिश्नु मुंद्रा के नाम थे।
महिलाओं के शोषण से बना करोड़ों का नेटवर्क- एजेंसी का कहना है कि यह संगठित नेटवर्क लंबे समय से पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों में सक्रिय था। यह गिरोह महिलाओं को बहला-फुसलाकर या रोजगार के झूठे वादों से अपने जाल में फँसाता था। फिर उनसे जबरन अवैध काम करवाकर मोटी रकम कमाई जाती थी। जो महिलाएं विरोध करतीं, उन्हें डराया-धमकाया जाता था या उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती थी। ईडी ने कहा है कि यह मामला सिर्फ मानव तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े वित्तीय अपराध से जुड़ा हुआ है। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन से लोग शामिल हैं, और क्या इसमें किसी राजनैतिक या प्रशासनिक स्तर पर सहयोग मिला था। फिलहाल, जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि महिलाओं और समाज को इस तरह के शोषण से बचाया जा सके।

















