वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह राष्ट्रप्रेम, त्याग और वीरता की भावना का प्रतीक है। ओडिशा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के राज्यस्तरीय समारोह का शुभारंभ लोक सेवा भवन परिसर में शुभारंभ करते हुए यह मुख्यमंत्री मोहन माझी ने यह बात कही। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘आनंद मठ’ उपन्यास से उत्पन्न यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के समयदौरान देशवासियों में जागृति, उत्साह और क्रांतिकारी भावना जगाने में एक प्रेरणास्रोत बना। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् की लोकप्रियता और प्रभाव देखकर ब्रिटिश शासकों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था, जो इस गीत की शक्ति और उसके प्रभाव का प्रमाण है।”
आज का यह ऐतिहासिक दिन हमारे लिए एक महासंकल्प का क्षण है। वह अमर वाणी “वंदे मातरम्” जिसने भारत को एक अखंड शक्ति के रूप में देखने का स्वप्न संजोया था, आज अपनी 150वीं वर्षगांठ मना रही है। यह केवल एक ऐतिहासिक दिन नहीं है; यह हमारे पूर्वजों के बलिदान और त्याग से जन्मे राष्ट्रीय संकल्प को स्मरण करने का दिन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से सृजित और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की स्वरशक्ति से अमर बना यह गीत, हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए मृत्युंजय मंत्र था। राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत यह महामंत्र, स्वतंत्रता संग्राम के सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे पर भी विजय की मुस्कान दे गया। जब अंग्रेज सरकार ने इस गीत पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, तब इसकी हर पंक्ति भारतीयों के लिए वज्र-संकल्प बन गई थी।
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उन्होंने आगे कहा कि देशप्रेम किसी भाषा, धर्म या क्षेत्र से बंधा नहीं है। बिना राष्ट्रप्रेम के देश की प्रगति संभव नहीं। वंदे मातरम् हमारे हृदयों में उस देशभक्ति की अग्नि को पुनः प्रज्वलित करता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं, विद्यार्थियों और बच्चों में राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करने के लिए इस वर्षभर चलने वाले उत्सव को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री मांझी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली से उद्घाटन किए गए राष्ट्रीय समारोह से वर्चुअल रूप से जुड़कर ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक देशभर के नागरिकों द्वारा एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन भारत की एकता और अखंडता का संदेश दे रहा है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष तक राज्य के सभी जिलों में स्कूल, कॉलेज, सरकारी और निजी संस्थानों में सामूहिक गायन, सांस्कृतिक आयोजन और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस राष्ट्रीय गीत की भावना को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से आह्वान किया कि वे इस वर्षभर चलने वाले उत्सव में सक्रिय रूप से भाग लें और भारत माता के गौरव को विश्वभर में फैलाने का संकल्प लें। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री मनोज आहूजा, विकास आयुक्त श्रीमती अनु गर्ग, ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. विजय केतन उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में उत्कल संगीत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का प्रस्तुतीकरण किया, जिससे पूरे परिसर में देशभक्ति का माहौल गूंज उठा।

















