नई दिल्ली: पाकिस्तान ने गुरुवार को युद्धविराम लागू होने के बाद भी अफगानिस्तान में गोले दागे। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर यह गोलीबारी तुर्की में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता से ठीक पहले की थी। अफगान सैन्य सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया और नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह गोलाबारी 10-15 मिनट तक चली। बता दें कि दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू है। लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधर रहा है और पाक-अफगान के बीच तनाव बढ़ रहा है।
पाकिस्तान ने शांति वार्ता से पहले तोड़ा युद्धविराम….अफगानिस्तान पर दागे गोले
न्यूज एजेंसी रॉयटर के मुताबिक, इस्तांबुल में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने को लेकर वार्ता शुरू हुई लेकिन इसी दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच सीमा पर फायरिंग हो गई। पाकिस्तान ने युद्धविराम के नियम को तोड़ते हुए अफगानिस्तान पर गोलीबारी की। फायरिंग में पांच लोगों के मारे जाने की सूचना है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले महीने की शुरुआत में काबुल में हुए विस्फोटों के बाद सीमा पर हुई झड़पों में करीब 50 अफगान नागरिकों सहित 70 से अधिक लोग मारे गए थे। सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच 11 अक्टूबर को हुई झड़प में दोनों देशों की जनहानि हुई थी। पाकिस्तान का दावा है कि इस झड़प में कम से कम 206 अफगान तालिबान और 110 तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सदस्य मारे गए थे, जबकि पाकिस्तान के 23 सैनिकों की भी मौत हुई थी। दोनों पक्षों के बीच 15 अक्टूबर को संघर्षविराम पर सहमति बनी थी। जिसे 19 अक्टूबर को दोहा और 25 अक्टूबर को इस्तांबुल में हुई वार्ताओं के दौरान आगे बढ़ा दिया गया था।
तुर्किये कर रहा है दोनों देशों के बीच शांति समझौता की मध्यस्थता
तुर्किये पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति समझौते की मध्यस्थता कर रहा है। लेकिन छठे दौर की बातचीत से पहले ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर गोले दाग दिये। इस शांति समझौते में पाकिस्तानी दल का नेतृत्व पाकिस्तान की सेना की सैन्य खुफिया इकाई के प्रमुख आसिम मलिक कर रहे हैं जबकि अफगान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के खुफिया संगठन के प्रमुख अब्दुल हक वासिक कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा संघर्षों को कम करने और सीमा-पार उग्रवाद को रोकने के उद्देश्य से चल रही द्विपक्षीय शांति वार्ता का छठा दौर गुरुवार को इस्तांबुल में शुरू हुआ।
ये दाे दिवसीय वार्ता इस्तांबुल के ऐतिहासिक बेयोग्लू जिले में एक गोपनीय स्थान पर शुरू हुई। इसमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा ले रहे हैं। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश सचिव अमना बलोच ने किया। जिसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। अफगान प्रतिनिधिमंडल कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के नेतृत्व में आया है, जिसमें कबायली बुजुर्ग और सुरक्षा अधिकारी भी वार्ता में भाग ले रहे हैं। बयान के मुताबिक इस दौर की बातचीत तीन प्रमुख मसलाें पर आधारित है जिसमें अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना, डूरंड लाइन सीमा पर विवादों का समाधान, और बंद व्यापारिक गलियारों काे दाेबारा खाेलना । इससे द्विपक्षीय व्यापार सालाना पांच अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। वार्ता के आरंभ में तुर्कियें के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने कहा कि इस्तांबुल प्रक्रिया ने मुश्किल समय में बातचीत की शुरूआत की है। तुर्किये दाेनाें देशाें के बीच संयुक्त सीमा गश्त से लेकर आर्थिक प्रोत्साहनों तक विश्वास-निर्माण उपायों को सुगम बनाने के लिए तैयार है। गाैरतलब है कि दाेनाें देशाे के बीच शांति वार्ताओं का यह दाैर 2,600 किलोमीटर (1,600 मील) लंबी सीमा पर झड़पाे के बाद आरंभ हुआ है।

















