Gujarat Hospital Porn Scandal:एक साधारण डिफॉल्ट पासवर्ड “admin123” ने पूरे देश को हिला दिया। राजकोट के पायल मेटर्निटी हॉस्पिटल से शुरू हुआ ये मामला जल्दी ही एक बड़ा साइबर घोटाला बन गया। हैकर्स ने हॉस्पिटल के सीसीटीवी सिस्टम में घुसपैठ की, गायनेकोलॉजी वार्ड में महिलाओं की जांच के दौरान की घंटों की निजी फुटेज चुरा ली और उसे अंतरराष्ट्रीय पॉर्न नेटवर्क में बेच दिया। एक्सेस लॉग्स जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक के थे, जब तक फरवरी 2025 में आरोपी पकड़े गए। इन हैकर्स ने नौ महीनों में कम से कम 50,000 क्लिप्स चुराए, जो पूरे देश के अलग-अलग जगहों से थे।
जांचकर्ताओं ने पाया: 80 सीसीटीवी डैशबोर्ड्स हैक
ये घोटाला तब सामने आया जब राजकोट हॉस्पिटल की टीजर क्लिप्स “मेघा एमबीबीएस” और “सीपी मोंडा” जैसे यूट्यूब चैनलों पर पोस्ट हुईं। ग्राहकों को टेलीग्राम ग्रुप्स में ले जाकर फुटेज 700 से 4,000 रुपये के बीच बेची जा रही थी। जांच में पता चला कि देशभर में करीब 80 सीसीटीवी डैशबोर्ड्स हैक हो चुके थे, जिनमें पुणे, मुंबई, नासिक, सूरत, अहमदाबाद और दिल्ली शामिल थे। पीड़ित 20 राज्यों से थे, जिनमें हॉस्पिटल्स, स्कूल्स, कॉर्पोरेट हाउस, सिनेमा हॉल, फैक्टरियां और प्राइवेट घर तक फैले थे। हालांकि मुख्य गिरफ्तारियां 2025 की शुरुआत में हुईं, लेकिन जून तक ये अवैध क्लिप्स टेलीग्राम ग्रुप्स पर उपलब्ध थीं।
जांचकर्ताओं ने देखा कि ज्यादातर सीसीटीवी सिस्टम्स अभी भी फैक्ट्री सेट पासवर्ड जैसे “admin123” यूज कर रहे थे। अहमदाबाद साइबरक्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया, “मुख्य तरीका ‘ब्रूट फोर्स अटैक’ था, जहां हैकर्स ने प्रोग्राम या बॉट से हर संभावित अक्षर-संख्या का कॉम्बिनेशन ट्राई किया।”
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इस ऑपरेशन का मुख्य हैकर परित धमेलिया था, जो बीकॉम ग्रेजुएट है। उसने तीन अलग-अलग सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स का इस्तेमाल किया। चुराए गए क्रेडेंशियल्स से एक और आरोपी रोहित सिसोदिया ने एक्सेस लिया। रोहित को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया, जो मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी का डिप्लोमा होल्डर था और कवर के लिए ये इस्तेमाल करता था। उसने वैध रिमोट व्यूइंग टूल का गलत यूज करके चुराए लॉगिन डिटेल्स डालकर हॉस्पिटल के कैमरों में घुसा।
साइबरक्राइम के तहत गिरफ्तारियां
FIR रजिस्टर होने के 39 घंटों के अंदर ही कई आरोपी पकड़े गए। इसमें प्रजवाल टेली, प्रज पटिल और चंद्रप्रकाश फूलचंद शामिल हैं। इन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की कई धाराओं के तहत चार्ज किया गया, खासकर साइबर टेररिज्म से जुड़ी। साइबरक्राइम यूनिट्स ने तेजी से ऐक्शन लिया। दिल्ली में रोहित सिसोदिया को DMSS ऐप के इस्तेमाल से पकड़ा गया।

















