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बिहार विधानसभा चुनाव-2025 : नवाचार से नई पहचान

बिहार में अब नवाचार की नई लहर दिख रही है। कभी उपेक्षा और जड़ता से जूझता यह राज्य अब अपने सृजन और तकनीकी सोच से नई पहचान बना रहा है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 3, 2025, 12:58 pm IST
inविश्लेषण, बिहार

बिहार की नवाचार यात्रा ‘जड़ता से जागरण’ का प्रतीक है। इसने सिद्ध किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी के संयोजन से दबा हुआ नवाचार फिर से अंकुरित हो सकता है। आज बदलते बिहार में यह स्पष्ट है कि राज्य अपनी सशक्त नवाचार पहचान गढ़ने को तैयार है।
आइंस्टीन ने कहा था, “किसी समस्या का समाधान उसी सोच से नहीं किया जा सकता, जिसने उसे जन्म दिया हो।” यानी नई सोच और व्यापक दृष्टिकोण ही नवाचार का सार है। यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक मानसिकता है जो मनुष्य को सृजनशीलता की ओर प्रेरित करती है। स्टीव जॉब्स के शब्दों में, नवाचार ही वह रेखा है जो एक नेता और एक अनुयायी के बीच अंतर बनाती है।
जिस समाज में शिक्षा, शोध, तकनीकी ढांचा और नीतिगत समर्थन नवाचार को पोषित करते हैं, वही वैश्विक प्रगति का मार्ग निर्धारित करता है। विश्व नवाचार सूचकांक 2023 में भारत 40वें स्थान पर है, जबकि स्विट्जरलैंड, स्वीडन और अमेरिका शीर्ष पर हैं। देश में कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र अग्रणी हैं, पर बिहार लंबे समय तक उपेक्षित रहा। लालू–राबड़ी शासन का काल ‘जड़ता का युग’ रहा, जब शिक्षा, तकनीक और उद्यमशीलता प्राथमिकता से बाहर थे। विश्वविद्यालय और कॉलेज संसाधनविहीन व शिक्षकविहीन हो गए, जिससे गुणवत्ता गिरी और युवाओं का पलायन बढ़ा। इस कारण बिहार की नवाचार क्षमता गहराई से प्रभावित हुई। बिजली संकट ने उद्योग व तकनीकी शिक्षा को पंगु कर दिया। इंटरनेट और कंप्यूटर विलासिता माने जाते थे, जबकि शासन का ध्यान सामाजिक समीकरणों पर था, न कि ज्ञान-अर्थव्यवस्था पर। 15 वर्ष तक न कोई नवाचार नीति बनी, न शोध या उद्यम प्रोत्साहन कार्यक्रम चला। इस जड़ता ने सूबे को नवाचार की दौड़ से बाहर कर दिया और प्रतिभा ने अन्य राज्यों का रुख किया।
एनडीए सरकार के आने पर नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था, सड़क और बिजली सुधार कर नवाचार के लिए आधार तैयार किया। इसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ योजनाओं ने नवाचार संस्कृति को गति दी, जिसका लाभ बिहार ने उठाना शुरू किया।

कचरे से पेट्रोल बनाने का कमाल

मुजफ्फरपुर के कुछ युवाओं ने ‘ग्रैविटी एग्रो एंड एनर्जी’ नामक संस्था के माध्यम से प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल बनाने की तकनीक विकसित की है। आशुतोष मंगलम और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत 25 लाख का लोन लेकर मुजफ्फरपुर के कुढ़नी क्षेत्र में प्लांट स्थापित किया। यह तकनीक 6 रुपए के प्लास्टिक कचरे से 70 से 79 रुपए प्रति लीटर मूल्य का पेट्रोल-डीजल तैयार करती है। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने इसकी गुणवत्ता और माइलेज दोनों को प्रमाणित किया है। प्रतिदिन 40 किलो प्लास्टिक से लगभग 37 लीटर पेट्रोल-डीजल तैयार कर यह प्लांट किसानों और नगर निगम को 70 रुपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने इसका उद्घाटन किया था।

शिक्षा की अंधेरी गलियों से उजाले की ओर

लालू-राबड़ी शासन (1990–2005) में बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त थी। 2005 के बाद नीतीश कुमार की एनडीए सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। नकल पर रोक, अध्यापक बहाली और उपस्थिति की निगरानी शुरू हुई। ‘साइकिल’ और ‘पोशाक’ योजनाओं ने लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहन दिया, जबकि आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों ने उच्च शिक्षा को मजबूती दी। आज शिक्षा फिर से बिहार की उम्मीद का केंद्र बन चुकी है।

परिवारवाद बनाम पीढ़ीवाद

लालू परिवार ने सत्ता को निजी संपत्ति बना लिया था। राज्य के संसाधन राजनीतिक लाभ में झोंक दिए गए, जबकि आम लोग शिक्षा और रोजगार के लिए संघर्ष करते रहे। उस दौर में पिता बेटी की सुरक्षा से भयभीत था, मां बेटे के पलायन से दुखी, और युवा निराश।

संस्थागत ढांचे की स्थापना

  •  बिहार इनोवेशन फंड : यह नवाचारी विचारों को वित्तीय सहायता प्रदान कर उद्यमशीलता व स्टार्टअप को प्रोत्साहित करता है।
  •  स्टार्टअप नीति 2017 : यह नीति राज्य में जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर है। इसमें नवप्रवर्तकों को अनुदान, इन्क्यूबेशन सुविधाएं, कर छूट और परामर्श जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
  •  इनोवेशन हब और इन्क्यूबेटर : आईआईटी पटना, नालंदा यूनिवर्सिटी और चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी के नवाचार केंद्रों में विद्यार्थी अपने विचारों को हकीकत बना रहे हैं।
  •  उच्च शिक्षा में नवोन्मेष : आईआईटी पटना, आईआईएम बोध गया, नालंदा विश्वविद्यालय और एनआईटी पटना आज बिहार की नई पहचान हैं, जो उच्च शिक्षा और शोध के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
  •  डिजिटल लर्निंग का प्रसार : कोविड-19 में ‘बिहार शिक्षा’ एप और ऑनलाइन पोर्टल्स ने डिजिटल शिक्षा को नया आयाम दिया, जिससे शिक्षण अधिक पारदर्शी और लचीला हुआ।
  •  स्टैंडअप इंडिया योजना : इसके तहत एससी, एसटी और महिलाओं को ऋ ण देकर हजारों छोटे उद्योग शुरू हुए।
  • अटल इनोवेशन मिशन : इस मिशन के तहत स्कूलों में ‘अटल टिंकरिंग लैब’ खोली जा रही हैं, जहां बच्चों में नवाचार और विज्ञान की भावना जगाई जाती है।
  •  डिजिटल इंडिया : इस पहल से बिहार में ई-गवर्नेंस को नई दिशा मिली, भूमि रजिस्ट्री से पेंशन तक अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन होकर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी।

बिहार में लगेंगे हाईटेक उद्योगः अमित शाह

केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि बिहार अब उच्च तकनीक आधारित उद्योगों का केंद्र बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में भूमि की सीमित उपलब्धता को देखते हुए ऐसे उद्योग विकसित किए जाएंगे जिनमें कम भूमि की आवश्यकता हो-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, और टेक्नोलॉजी आधारित सेवा उद्योग।

अमित शाह ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने बिहार की विकास यात्रा की मजबूत नींव रखी है। अब केंद्र सरकार की दृष्टि इसे आगे बढ़ाकर राज्य को तकनीकी, ज्ञान और कौशल का हब बनाना है। उन्होंने यह भी कहा युवाओं को इस दिशा में प्रशिक्षण देकर रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा। उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक गौरव, नालंदा और तक्षशिला का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय है जब बिहार फिर से ज्ञान और नवाचार का केंद्र बने। शाह ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए हजारों करोड़ की योजनाएं चल रही हैं, जिससे 50 हजार हेक्टेयर भूमि खेती योग्य बन रही है। आने वाले वर्षों में बिहार को बाढ़ की विभिषिका से मुक्त कर लिया जाएगा। आधुनिक सड़कें, पुल, हवाई अड्डे और मेडिकल सुविधाएं बिहार की नई पहचान बन रही हैं। लालू-राबड़ी का दौर अराजकता और भ्रष्टाचार का प्रतीक था, जबकि आज का बिहार सुशासन और अवसर का प्रतीक बन रहा है। अब हमें ऐसे उद्योग चाहिए जो कम भूमि पर अधिक रोजगार दें, यह दिशा बिहार को आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति की ओर ले जाएगी।

नवाचारी प्रयास

कृषि में ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के तहत सौर पंपों से सिंचाई को बढ़ावा दिया गया, जिससे डीजल पर निर्भरता और लागत घटी। स्वास्थ्य में ‘हर घर बिहार स्वास्थ्य मिशन’ के मोबाइल यूनिट ग्रामीण इलाकों में पहुंच रही हैं और टेलीमेडिसिन सेवाएं शुरू हुई हैं। पटना के स्टार्ट-अप एग्री-टेक, एड-टेक और फिन-टेक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। जैसे ‘बिहारील्स’ पारंपरिक मिठाइयों को ऑनलाइन देशभर में पहुंचा रहा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में पारदर्शी प्रशासन और प्रभावी योजनाओं से युवाओं में भरोसा जगा है। अब वे अवसर खोजने के बजाय खुद अवसर बना रहे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, डिजिटल मंचों पर काम कर रहे हैं। बेरोजगारी और पलायन की चुनौतियां अभी हैं, पर दिशा सही है। बिहार का युवा अब नारों से आगे बढ़ चुका है। उसे पता है कि विकास वंशवाद से नहीं, सुशासन और आत्मबल से होता है। यही आत्मविश्वास नया बिहार गढ़ रहा है, जहां हर युवा अपने गांव में रहकर भविष्य
बना सके।

Topics: राजनीतिक इच्छाशक्तिशिक्षाअटल टिंकरिंग लैबनवाचारनई सोचपाञ्चजन्य विशेषएनडीए सरकारजनभागीदारीबिहार विधानसभा चुनाव 2025डिजिटल लर्निंगलालू-राबड़ी शासनजड़ता से जागरणडिजिटल इंडिया
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