केरल काला जादू कांड: केरल में मोहम्मद सजीर ने अपनी बीवी रेजिला गफ़ूर की जीभ पर मछली का उबलता हुआ शोरबा इस बात को लेकर डाल दिया क्योंकि उसने अपने शौहर के उस्ताद के काले जादू की करतूतों को मानने से इनकार कर दिया था। यह घटना है कोल्लम की, जहां पर 34 वर्षीय मोहम्मद सजीर गफ़ूर ने अपनी बीवी की जीभ पर मछली का शोरबा डाल दिया था। उसकी बीवी रेजिला गफ़ूर ने अपने शौहर के काले जादू के उस्ताद की बात मानने से इनकार कर दिया था। काला जादू करने वाले ने उसे कुछ राख और एक प्लेट दी और घरेलू मामले को सुलझाने के लिए कुछ जादू करने के लिए कहा था।
जब रेजिला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और अपने चेहरे पर राख लगवाने से इनकार कर दिया, और जैसा काला जादू करने वाले ने कहा था, वैसे बाल बांधने से यह कहते हुए इनकार कर दिया, कि उसे जादू-टोने में यकीन नहीं है तो उसके शौहर ने उसके चेहरे पर मछली का गरम शोरबा डाल दिया। रेजिला का चेहरा इससे जल गया और उसके चोट आईं और अभी उसका इलाज चल रहा है। यह घटना है, मगर द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने मगर इस घटना के लिए हिन्दू दम्पत्ति की तस्वीर प्रयोग की। इसमें एक हिन्दू युवक बना हुआ है, जो अपनी पत्नी के मुंह में गरम सब्जी डाल रहा है।
अपराधी मुस्लिम, लेकिन हिन्दू प्रतीकों का इस्तेमाल
महिला बिंदी, सिंदूर और अन्य वह सभी प्रतीक धारण किये है, जो हिन्दू धर्म की पहचान है। और शीर्षक में भी यह कहीं नहीं लिखा है कि हमलावर शौहर का नाम क्या है? वही इस तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। दरअसल यह धार्मिक प्रतीकों के बहाने पूरी हिन्दू पहचान पर हमला है, जो यह स्थापित करने का प्रयास कर रहा है कि काला जादू हिन्दू करते हैं और इसके प्रभाव में आकर वे अपनी पत्नियों के साथ ऐसा कुकृत्य करते हैं। हालांकि तमाम हिन्दू भी तंत्र मंत्र और जादू टोने का इस्तेमाल करते हैं, मगर यह जो घटना हुई थी, वह एक मुस्लिम परिवार की घटना थी, मगर इसका प्रतिनिधित्व करने के लिए हिन्दू परिवार का प्रयोग क्यों किया गया?
लोगों ने सोशल मीडिया पर इसके विरोध में लिखा। लोगों ने लिखा कि यह हिंदुओं के प्रति घृणा का बहुत बड़ा उदाहरण है। ऐसा एक नहीं कई बार हुया है जब हिन्दू प्रतीकों की तस्वीर को मुस्लिम परिवार के लिए प्रयोग किया गया हो। ऐसा भी कई बार देखा गया है कि मुस्लिम कालाजादू करने वाले लोगों को “तांत्रिक” लिखा जाता है और उसमें हिन्दू साधु की तस्वीर लगाई जाती है।
हालांकि जब उसे पूरा पढ़ा जाए तो मामला पूरा उल्टा दिखता है और पता चलता है कि आखिर काला जादू करने वाला कौन था? मगर तब तक शीर्षक और चित्र से प्रतिनिधित्व और संदेश स्पष्ट हो जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि “केरल के व्यक्ति ने अपनी बीवी के चेहरे पर खौलता हुआ मछली का शोरबा डाला, क्योंकि उसने काला जादू करने से इनकार कर दिया था।“
इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग आलोचना कर रहे हैं। पत्रकार स्वाति गोयल ने एक्स पर पोस्ट लिखा, “केरल में मोहम्मद सजीर ने अपनी पत्नी रेजिला गफूर पर उबलती मछली की करी इसलिए डाल दी क्योंकि उसने उसके उस्ताद के काले जादू के करतबों को मानने से इनकार कर दिया था।“
In Kerala, Mohd Sajeer poured boiling fish curry on wife Rejila Gafoor for refusing to follow his Ustad’s black magic tricks
Look at the image used by @NewIndianXpress pic.twitter.com/R51zfSi8Hb
— Swati Goel Sharma (@swati_gs) October 31, 2025
संजीव नेवर ने भी लिखा कि “हिंदुओं को गैर-हिंदुओं द्वारा किये गए अपराधों के लिए आरोपी ठहराया जाता है। यह पत्रकारिता नहीं है। यह धोखा है!”
इसे लेकर शशांक शेखर झा ने भी लिखा कि केरल में, मोहम्मद सजीर काला जादू करना चाहता था। उसकी बीवी रेजिला गफूर ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। मोहम्मद सजीर ने अपनी पत्नी पर मछली की उबलती करी डाल दी। @NewIndianXpress ने एक हिंदू परिवार की तस्वीर के साथ इस घटना की रिपोर्ट की।“
इसे लेकर एक यूजर ने लिखा कि “हिन्दूफोबिया वास्तविकता है और सभी में भीतर तक घुसी हुई है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, आपको शर्म आनी चाहिए!”
मीडिया में हिन्दू विरोधी नैरेटिव बहुत आम है
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद संबंधित मीडिया ने उस खबर को ही हटा दिया है, लेकिन यह भी बात ध्यान रखी जाए कि मीडिया में हिन्दू विरोधी नैरेटिव बहुत असाधारण या असामान्य नहीं है, बल्कि यह बहुत आम है। इसकी बानगी एक नहीं कई घटनाओं में देखी जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बिंदू तो यही है कि हर अपराध को हिंदुओं के गले मढ़ने का प्रयास किया जाता है और दूसरा हिंदुओं की यदि मॉब लिंचिंग होती है, तो उस पर बहस नहीं होती है।
हिंदुओं के पर्वों पर हर बार जानबूझकर अपमानजनक विमर्श चलाया जाता है। जैसे दीपावली को प्रदूषण का पर्व कहा जाता है, करवाचौथ को स्त्री विरोधी, होली पर पानी बचाने का उपदेश, और रक्षाबंधन के लिए ऐसा विमर्श बनाया जाता है कि जैसे लड़कियां कमजोर होती हैं। कन्यादान जैसे संस्कारों को नकार कर कन्यामान जैसे शब्द गढ़े जाते हैं।

















