काहिरा से आई एक भयावह खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने सूडान के दारफुर क्षेत्र की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी दारफुर के अल-फशर शहर के “सऊदी मैटरनिटी हॉस्पिटल” में 460 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई। यह हमला तब हुआ जब सूडान के अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’ (RSF) ने शहर पर कब्जा कर लिया। टेड्रोस ने इस घटना को “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है।
अल-फशर शहर पिछले 500 दिनों से सैन्य घेराबंदी में था और यह दारफुर का सबसे बड़ा सैन्य गढ़ माना जाता था। RSF के कब्जे के बाद यहां हालात पूरी तरह बिगड़ गए हैं। RSF का नेतृत्व मोहम्मद हमदान दागलो, जिसे ‘हेमेदती’ कहा जाता है, कर रहा है। उन्होंने सूडानी सेना के खिलाफ विद्रोह कर इस युद्ध को जन्म दिया था। हमले में जिस अस्पताल को निशाना बनाया गया, वह महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए प्रमुख केंद्र था। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले में ज्यादातर मरीज, गर्भवती महिलाएं और बच्चे मारे गए। अस्पताल की इमारत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है और वहां की सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद हो गई हैं। WHO ने चेतावनी दी है कि यदि मानवीय सहायता जल्द नहीं पहुंची, तो क्षेत्र में महामारी फैल सकती है।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अप्रैल 2023 में शुरू हुए इस गृहयुद्ध में अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और करीब ढाई करोड़ लोग भुखमरी व बीमारियों से जूझ रहे हैं। दारफुर, जो पहले भी संघर्ष का केंद्र रहा है, अब एक बार फिर खूनखराबे में डूब गया है। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इसे युद्ध अपराध बताया और स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि सूडान सरकार ने WHO के दावों को “गलत सूचना” कहा है, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरें और स्थानीय रिपोर्टें इस घटना की भयावह सच्चाई उजागर कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह हिंसा नहीं रुकी, तो सूडान का भविष्य गहरे संकट में पड़ सकता है और इसका असर पूरे अफ्रीका की स्थिरता पर पड़ सकता है।

















