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सूडान में नरसंहार: तीन दिन में 2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सूडान पिछले ढाई साल से गृहयुद्ध से जूझ रहा है, जिससे करीब 40,000 लोगों की मौत हुई है और 12 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं।

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Nov 1, 2025, 10:47 am IST
in विश्व

उत्तरी अफ्रीका के सूडान देश से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार सूडान के नॉर्थ दारफुर के अल-फशर शहर में एक बड़े मैटरनिटी अस्पताल में 460 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई है। सूडान के डॉक्टर्स नेटवर्क ने दावा किया है कि अल-फशर में मात्र तीन दिनों में 2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या हुई है। यह भयावह घटना उस वक्त हुई जब सूडानी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) ने शहर पर कब्जा कर लिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने सूडान के दारफुर क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, “हम इन खबरों से स्तब्ध और गहरे सदमे में हैं। यह मानवता के खिलाफ अपराध है।” इस ताजा हमले से पहले, डब्ल्यूएचओ ने सूडान में हेल्थकेयर पर 285 हमलों की पुष्टि की, जिसमें संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 1,204 मौतें हुई हैं और 400 से ज्यादा हेल्थ वर्कर और मरीज घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सूडान पिछले ढाई साल से गृह युद्ध से जूझ रहा है, जिससे करीब 40,000 लोगों की मौत हुई है और 12 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं। येल की ह्यूमैनिटेरियन रिसर्च लैब (HRL) के एक एनालिसिस से सैटेलाइट इमेज और रिमोट-सेंसिंग डेटा का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर हुई हत्याओं की रिपोर्ट की पुष्टि की गई है। वहीं, सेना के साथ लड़ने वाले एक सैन्य समूह ज्वाइंट फोर्स का कहना है कि RSF ने अल-फशर शहर में निर्दोष नागरिकों के खिलाफ जघन्य अपराध किए हैं।

अल-फशर में क्या हुआ?

विदेशी मीडिया के अनुसार सूडानी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स ने रविवार (26 अक्टूबर) को अल-फशर पर कब्जा कर लिया। इसके बाद दारफुर इलाके में एसएएफ (SAF) की बची हुई आखिरी जगहों को भी उसने अपने कब्जे में ले लिया। सूडान के डॉक्टर्स नेटवर्क ने दावा किया है कि अल-फशर में मात्र तीन दिनों में 2,000 से अधिक नागरिक मारे गए हैं। आरएसएफ ने शहर से भागने की कोशिश कर रहे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस घटना की दुनियाभर में निंदा की जा रही है। इसे नरसंहार और विनाश की सुनियोजित साजिश बताया जा रहा है।

शहर में तबाही का मंजर

अल-फशर दारफुर के उत्तरी हिस्से का एक प्रमुख शहर है। पिछले 18 महीनों के क्रूर युद्ध के बाद अल-फशर शहर पर अब आरएसएफ ने कब्जा कर लिया है और वो वहां नरसंहार कर रहा है। शहर में करीब 12 लाख से अधिक लोग उसके कब्जे में है, उन्हें जानवरों का चारा खाकर गुजारा करना पड़ रहा है क्योंकि RSF की वजह से खाने-पीने का सामान और दवाएं अंदर नहीं आ पा रही हैं और भागने के सभी रास्ते भी बंद हो गए हैं। यह वही इलाका है, जहां सूडान की सेना और आरएसएफ के बीच अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। आरएसएफ पूर्व जनरल मोहम्मद हमदान दागलो (हेमेदती) के नेतृत्व में है। दागलो ने सूडानी सेना के खिलाफ विद्रोह किया था। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हो चुके हैं।

लोगों पर अत्याचार करते हुए कई वीडियो शेयर किए

विदेशी मीडिया के अनुसार जब उन्होंने ऑनलाइन शेयर किए गए वीडियो का वेरिफिकेशन तो उन्होंने आरएसएफ के लड़ाकों को निर्दोष लोगों को मारते और टॉर्चर करते हुए देखा। आरएसएफ के सदस्य पहले भी कई बार लोगों पर अत्याचार करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर चुके हैं।

RSF कौन है?

यह पैरामिलिट्री ग्रुप शुरू में जंजावीद के तौर पर बना था। जंजावीद सूडान में स्थित खानाबदोश हथियारबंद समूह थे, जिन्होंने 2003 में शुरू हुए दारफुर युद्ध के दौरान लंबे समय तक राष्ट्रपति रहे उमर अल-बशीर के लिए लड़ाई लड़ी। कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इसे नरसंहार बताया था, जिसमें 1,00,000 से 3,00,000 लोग मारे गए और 2.5 मिलियन लोग विस्थापित हुए थे। 2013 में अल-बशीर ने जंजावीद को RSF के तौर पर औपचारिक मान्यता दी। फिर 2017 के एक कानून ने इसे एक स्वतंत्र सुरक्षा बल के तौर पर और ज्यादा ताकत दी।

स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप, महामारी फैलने का खतरा बढ़ा

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस मैटरनिटी हॉस्पिटल पर हमला हुआ है, वह महिलाओं और बच्चों के इलाज का प्रमुख केंद्र था। हमले में अस्पताल की इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। मारे गए लोगों में ज्यादातर मरीज गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल मानवीय सहायता नहीं पहुंचाई गई, तो क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक 2.5 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी और बीमारियों की चपेट में हैं।

दुनियाभर में निंदा और जांच की मांग

इस नरसंहार के बाद संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ ने कड़ी निंदा की है।अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने पहले भी सूडान के नेताओं पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। अब इस नए नरसंहार की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठ रही है।

जाने कैसे शुरू हुआ खूनी यूद्ध

एक रिपोर्ट के मुताबिक सूडान सरकार ने डब्ल्यूएचओ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां गलत सूचना फैला रही हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट फोटो से मिल रहे सबूत इसकी सच्चाई बयां कर रहे हैं। ऐसे में दारफुर के लाखों नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। दरअसल, सूडान में चल रहा यह भीषण गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ, जब देश की सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच सत्ता संघर्ष छिड़ गया। दोनों कभी एक साथ काम करते थे, लेकिन RSF के प्रमुख मोहम्मद दागलो (हेमेदती) ने सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान के खिलाफ बगावत कर दी। RSF चाहती थी कि उसे सेना में बराबरी का दर्जा और शासन में हिस्सेदारी मिले, लेकिन सेना के इनकार के बाद यह टकराव खूनी युद्ध में बदल गया।

Topics: WHOरैपिड सपोर्ट फोर्सSudan civil warRapid Support ForcesRSF seized el-FasherMassacre in el-Fasherसूडान में नरंसहारअल-फशर में हिंसा
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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