Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में एक बार फिर से “गणित” बिगड़ गया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में एक भाषण में सरकार के बजट को लेकर ऐसा बयान दिया कि सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें “9वीं फेल का गणित” कहना शुरू कर दिया। मंच पर तेजस्वी यादव हाथ में माइक लिए गर्व से बोल रहे थे- “सरकार के पास 3 लाख 95 हजार करोड़ हैं। उसमें से 2 लाख करोड़ कमिटेड एक्सपेंडिचर है… यानी बाकी बचा सिर्फ 1 लाख 16 हजार करोड़ स्कीम एक्सपेंडिचर के लिए।”
भीड़ तालियां बजा रही थी, लेकिन कुछ लोग पीछे खड़े कान खुजला रहे थे- “भइया, ये हिसाब गड़बड़ नहीं है क्या?” किसी ने फुसफुसाकर कहा- “गणित तो 9वीं में ही छोड़ दिए होंगे।” आम जनता से लेकर राजनीतिक विरोधियों तक, सबने इस गणित पर हंसी उड़ाई और कहा कि “तेजस्वी यादव का गणित तो कुछ अलग ही चलता है।” यही वजह है कि लोग सोशल मीडिया पर मजाक में कह रहे हैं- “9वीं फेल का गणित देखिए।”
झूठे सपने बिहार में बेचे जा रहे हैं- बिहार की राजनीति इन दिनों वादों और सपनों के जाल में उलझी हुई है। चुनावी मंचों पर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं- मुफ्त नौकरियां, बेहतर शिक्षा, अस्पताल, सड़कों का जाल लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है: “पैसा कहां से आएगा?” एनडीए (NDA) सरकार के नेता लगातार कह रहे हैं कि योजनाएं तो बहुत हैं, पर बजट सीमित है। ऐसे में जब हर ओर से सवाल उठते हैं कि इन सपनों को पूरा करने के लिए धन आखिर आएगा कहां से।
तेजस्वी यादव बार-बार सरकार पर निशाना साधते हैं लेकिन जब जनता उनसे पूछती है कि “आपके पास इन वादों को पूरा करने का ठोस प्लान क्या है?” तो उनके जवाब अधूरे दिखाई देते हैं। जनता अब केवल वादों से नहीं, ठोस योजनाओं और उनके वित्तीय स्रोतों से जवाब चाहती है। बिहार की जनता थक चुकी है झूठे सपनों के इस बाजार से। अब वक्त है कि कोई भी दल मंच से भाषण देने से पहले यह बताए- “बजट कहां से आएगा?” तेजस्वी यादव के पास सवालों का जवाब ही नहीं है।
लालटेन और लाठी का डर दिखा रहे हैं राजद के गुंडे- बिहार में जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की बयानबाज़ी और हरकतें भी चर्चा में आने लगी हैं। हाल ही में कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकर्ताओं द्वारा खुलेआम गुंडागर्दी और विरोधियों को डराने-धमकाने की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में राजद समर्थकों ने सड़कों और चौराहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंकने जैसी गतिविधियाँ कीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मोड़ और चौक पर “अबकी बार लालटेन और लाठी का बोल चलेगा” जैसे नारे लगाए जा रहे हैं। इन घटनाओं को लेकर जनता में नाराजगी देखी जा रही है। किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा डर और हिंसा का माहौल बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। बिहार की जनता विकास और शांति चाहती है, बुझती लालटेन की राजनीति की वापसी।

















