Britain: मेयर सादिक खान और मजहबी उन्मादियों के यौन अपराधों का शिकार होतीं लड़कियां, फिर सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट
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Britain: मेयर सादिक खान और मजहबी उन्मादियों के यौन अपराधों का शिकार होतीं लड़कियां, फिर सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

कंजर्वेटिव सांसद ली एंडरसन ने तो लंदन के मेयर सादिक खान पर सीधा आरोप लगाया है कि उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर जानबूझकर चुप्पी साधी हुई है। पुलिस के पास कई शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण इन पर कार्रवाई नहीं की जाती

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Oct 28, 2025, 07:32 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
ब्रिटेन दौरे के दौरान मेयर खान को लेकर ट्रंप ने अनेक बयान दिए थे और उन्हें कट्टरपंथियों का हिमायती तक बताया था (File Photo)

ब्रिटेन दौरे के दौरान मेयर खान को लेकर ट्रंप ने अनेक बयान दिए थे और उन्हें कट्टरपंथियों का हिमायती तक बताया था (File Photo)

ब्रिटेन में यौन अपराध चरम पर हैं। धीरे धीरे करके यह बढ़ता गया है और निहित स्वार्थी तत्वों व रीढ़हीन नेताओं ने इसे बढ़ावा दिया है। इससे लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़े हुए हैं। इस संबंध में हाल की रिपोर्ट और जांचों ने इस बहस को फिर से हवा दी है कि आखिर सरकार, पुलिस और स्थानीय प्रशासन संगठित यौन शोषण गैंग्स से निपटने में इतने असफल क्यों साबित हो रहे हैं।

लंदन के पूर्वी हिस्से में हाल में सामने आए मामले ने ब्रिटिश समाज को झकझोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पांच नाबालिग लड़कियां एक ऐसे नेटवर्क के चंगुल में फंसी थीं जो उन्हें नशीले पदार्थ, धमकी और हिंसा के जरिये वेश्यावृत्ति में धकेल रहा था। यह नेटवर्क स्थानीय बार, कैब सर्विस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से सक्रिय था, जहां नाबालिगों को पहले ‘दोस्ती’ और ‘प्रेम’ के नाम पर फंसाया जाता था।

जांच एजेंसियों का कहना है कि इन मामलों में कई बार पीड़ितों ने स्थानीय प्रशासन को सूचित तो किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति उन पुरानी घटनाओं की याद दिलाती है जब रोथरहैम, रोचडेल और ऑक्सफोर्ड जैसे शहरों में भी सैकड़ों नाबालिग लड़कियां इसी तरह के इन गैंग्स का शिकार बनी थीं।

कंजर्वेटिव सांसद ली एंडरसन ने तो लंदन के मेयर सादिक खान पर सीधा आरोप लगाया है कि उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर जानबूझकर चुप्पी साधी हुई है। उन्होंने कहा कि लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस के पास कई शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव और गलत प्राथमिकताओं के कारण इन पर कार्रवाई नहीं की जाती।

दूसरी ओर, सूसान हाल ने भी मेयर खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कड़े कदम उठाए होते तो दर्जनों लड़कियों को यह भयावह अनुभव नहीं झेलना पड़ता। विपक्षी दल और कुछ मीडिया संस्थान इसे ‘लापरवाही नहीं, बल्कि राजनीतिक निष्क्रियता’ बता रहे हैं।

मेयर सादिक खान की ओर से अब तक यही कहा गया है कि पुलिस नीति स्वतंत्र है और उन्हें अपनी जांच पूरी करने दी जानी चाहिए। फिर भी, जनता में यह धारणा मजबूत हो रही है कि राजनीतिक नेतृत्व ने समस्या की गंभीरता को कमतर आंका है।

रोथरहैम, रोचडेल और ऑक्सफोर्ड जैसे शहरों में भी सैकड़ों नाबालिग लड़कियां इसी तरह के पाकिस्तानी तत्वों के गैंग्स का शिकार बनी थीं। (File Photo)

ग्रूमिंग गैंग से जुड़े अधिकांश मामलों में देखा गया है कि पीड़ित नाबालिग लड़कियां सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आती हैं, उनके परिवार अक्सर टूटे, आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से अलग-थलग होते हैं। अपराधी इस असुरक्षा का फायदा उठाते हैं और धीरे-धीरे पीड़ितों को भावनात्मक नियंत्रण में लेकर उनका शोषण करते हैं।

कई नेताओं और मीडिया के एक वर्ग में इस मुद्दे के पीछे छिपे मजहबी पहलू को रेखांकित किया है। ऐसे कई मामलों में अपराधी मुस्लिम वर्ग या कहें पाकिस्तानी पाए गए हैं। इसके पीछे मुख्य कारण सामाजिक नियंत्रण की कमी, कानून प्रवर्तन की सुस्ती बताई गई है। ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग से निपटने के लिए कई विस्तृत रिपोर्ट निकलीं, जांच आयोग गठित किए गए हैं। उदाहरण के लिए, रोथरहैम काउंसिल की रिपोर्ट (2014) में यह सामने आया था कि अधिकारी राजनीतिक संरक्षण छिन जाने के डर से कार्रवाई नहीं कर पाए। इसी तरह लंदन की स्थिति भी दिखाती है कि अक्सर पुलिस के भीतर संसाधनों की कमी और प्रक्रियागत देरी के चलते पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया।

मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में शोषण-विरोधी इकाइयों का विस्तार तो किया है, लेकिन हाल के मामलों से स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव सीमित है। मानव तस्करी और नाबालिग शोषण से जुड़ी जांचें अक्सर महीनों तक खिंच जाती हैं, जिससे अपराधियों को सबूत मिटाने का समय मिल जाता है।

ब्रिटिश मीडिया ने ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्टिंग में एक जटिल भूमिका निभाई है। जहां कुछ अखबारों और न्यूज़ चैनलों ने इस मुद्दे को उजागर करने में अग्रणी भूमिका निभाई, वहीं कुछ ने इसे ‘राजनीतिक रूप से संवेदनशील’ बताते हुए ज्यादा स्थान नहीं दिया। सोशल मीडिया ने पीड़ितों की आवाज को सामने लाने में मदद की, ब्रिटेन के नागरिकों में इस्लामी शरणार्थियों को लेकर वितृष्णा हो जाना स्वाभाविक ही है।

अनेक विश्लेषकों का मानना है कि लंदन और अन्य ब्रिटिश शहरों में इस समस्या से निपटने के लिए तीन स्तरों पर व्यापक सुधार आवश्यक हैं—कानूनी ढांचा, सामाजिक समर्थन प्रणाली और राजनीतिक पारदर्शिता। कानून के स्तर पर नाबालिगों से जुड़े यौन शोषण और मानव तस्करी के अपराधों की सजा और कठोर होनी चाहिए। पुलिस और सामाजिक सेवाओं के बीच डेटा साझा होना चाहिए, समन्वय बेहतर होना चाहिए। स्कूलों में बच्चों को सोशल मीडिया और रिश्तों की सुरक्षा पर अधिक जानकारी देकर जागरूक करना चाहिए। पीड़ितों को पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कानूनी परामर्श बिना डर के मिलना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण, नेताओं को इस विषय पर राजनीतिक जोखिम से ऊपर उठकर ईमानदारी से बात करनी चाहिए।

लंदन में सामने आया नया मामला यह दर्शाता है कि ग्रूमिंग गैंग की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। यह कोई साधारण अपराध का मामला नहीं है, इसके पीछे इस्लामवादी तत्व हैं जिनकी सोच ही दूषित है और महिलाओं के प्रति उनकी नजर में सम्मान नहीं है। जब राज्य और पुलिस सेकुलरवाद की घुट्टी पीकर अपराधी को सिर्फ उसके मुस्लिम होने के ​कारण अनदेखा करते हों तो अधिकांश यौन अपराधों में लिप्त पाए दिखे मुस्लिम तत्व लड़कियों की सुरक्षा ताक पर रखेंगे ही।

मेयर सादिक खान के अधीन लंदन में कट्टर इस्लामवादी तत्वों की मनमानी खुलकर दिख रही है। सड़कों पर फिलिस्तीन के समर्थन में जुटाई गई लाखों की भीड़ और पुलिस की मुस्लिम तत्वों के उपद्रवों को रोकने में रही नाकामी के पीछे मेयर का ही हाथ बताया जाता रहा है। सादिक खान के प्रति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ब्रिटेन को कई बार आगाह कर चुके हैं। अभी उनके पिछले ब्रिटेन दौरे के दौरान मेयर खान को लेकर ट्रंप ने अनेक बयान दिए थे और उन्हें कट्टरपंथियों का हिमायती तक बताया था। ऐसे मेयर तले लंदन का प्रशासन आपराधिक कट्टर मजहबी तत्वों और उनकी सोच से कैसे निपटता होगा, इसका अनुमान लगाना कोई मुश्किल बात नहीं है।

Topics: reportब्रिटेनlondonलंदनग्रूमिंग गैंगrapesGrooming Gangsमेयर सादिक खानmayor Sadiq khanbritain
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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