देश ने आत्मनिर्भर भारत की तरफ एक और कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत अब भारत देश में ही कॉमर्शियल विमानों का निर्माण करेगा। इसके लिए खबर आ रही है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने मॉस्को में एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किया है। इसके तहत SJ-100 नाम के सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट यानि कि छोटे विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये भारत के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि 1988 में एव्रो HS-748 प्रोजेक्ट के खत्म होने के बाद पहली बार कोई पूरा पैसेंजर एयरक्राफ्ट यहां बनेगा। HAL के मुताबिक, ये सौदा दोनों कंपनियों के बीच आपसी भरोसे का नतीजा है और सिविल एविएशन में गहरी साझेदारी को बढ़ावा देगा।
समझौते की मुख्य बातें
मंगलवार को मॉस्को में ये दोनों देशों की कंपनियों के बीच MoU साइन हुआ। HAL की तरफ से प्रभात रंजन ने और UAC की तरफ से ओलेग बोगोमोलोव ने दस्तखत किए। HAL के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील और UAC के डिप्टी जनरल डायरेक्टर वादिम बदेखा की मौजूदगी में ये हुआ। HAL को अब भारतीय ग्राहकों के लिए SJ-100 बनाने का हक मिलेगा। कंपनी का कहना है कि ये मॉडल केंद्र सरकार की UDAN स्कीम के तहत रीजनल एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, जहां छोटे शहरों को हवाई यात्रा से जोड़ने का फोकस है। अभी तक HAL ज्यादातर डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर काम करता रहा है, लेकिन ये सौदा सिविल साइड में एंट्री का संकेत देता है।
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SJ-100 विमान क्या है?
SJ-100 एक ट्विन-इंजन वाला नैरो-बॉडी एयरक्राफ्ट है, जो पहले से ही कमर्शियल सर्विस में चल रहा है। दुनिया भर में 16 एयरलाइन्स के पास इसके 200 से ज्यादा यूनिट्स हैं। ये रीजनल फ्लाइट्स के लिए डिजाइन किया गया है, यानी छोटी-मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए इसे बेहतर माना जाता है। उल्लेखनीय है कि भारत जैसे देश में क्षेत्रीय मांग तेजी से बढ़ रही है और उस जरूरत के लिए इस तरह के विमानों को फिट माना जाता है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, अगले दशक में भारत को इस कैटेगरी के 200 से ज्यादा जेट्स चाहिए होंगे। इसके अलावा, इंडियन ओशन रीजन के शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल रूट्स के लिए 350 और एयरक्राफ्ट्स की जरूरत पड़ेगी। SJ-100 को भारत में बनाना मतलब लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को सफल बनाता है।
भारत के एविएशन इंडस्ट्री पर असर
जानकारों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट देश की एविएशन इंडस्ट्री के लिए नया दौर शुरू करेगा। HAL के अनुसार, इससे जॉब्स क्रिएट होंगी और प्राइवेट सेक्टर को एयरोस्पेस प्रोडक्शन में ज्यादा मौके मिलेंगे। भारत अब डिफेंस से आगे बढ़कर कमर्शियल और रीजनल यूज के लिए एयरक्राफ्ट बनाने की तरफ कदम रख रहा है। सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग में फुटप्रिंट बढ़ाने का ये अच्छा तरीका है। हालांकि, HAL ने MoU को असली एग्रीमेंट में बदलने की टाइमलाइन या किस यूनिट में प्रोडक्शन होगा, इस पर डिटेल नहीं दी। वैसे, HAL पहले से ही फाइटर एयरक्राफ्ट्स के प्रोडक्शन टारगेट्स से जूझ रहा है, जहां कैपेसिटी की कमी है।

















