बिहार के एक बेटे ने अपने मित्र के साथ मिलकर राज्य के किसानों की हालत को बदलने का संकल्प लिया। पूंजी की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए उन्होंने अनाज बैंक का विकल्प सुझाया। ‘एर्गोस’ के लिए अनाज एक संपत्ति है और ‘अनाज बैंक’ के माध्यम से उसे पैसे में बदला जा सकता है। आज इसके सफल प्रयोग के कारण ढाई सौ स्थान के डेढ़ लाख किसान जुड़े हुए हैं। एर्गोस में 243 कर्मचारी काम कर रहे हैं और गत वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 159 करोड़ रुपए की कमाई की है।
एर्गोस की स्थापना किशोर झा और प्रवीण कुमार ने मिलकर वर्ष 2012 में की थी। यह दोनों बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र के जानकार थे। दोनों कृषि परिवार से आते थे और बचपन से ही इन लोगों ने देखा था कि किसानों को अनाज बेचने में और उससे पैसा प्राप्त करने में कितनी दिक्कतें होती थीं। देश के किसानों में अधिकतर सीमांत किसान हैं। ऐसे किसानों की संख्या 80 प्रतिशत है। अनाज उत्पादन के बाद ऐसे किसान सीधे उसे बेचने के लिए दौड़ पड़ते हैं, ताकि कर्ज चुका सकें। लेकिन वहां भी उन्हें बेइज्जती झेलनी पड़ती है। बेचे गए अनाज का पैसा लेने के लिए पापड़ बेलने पड़ते हैं।
किसान अपनी खेती के लिए जो कर्ज लेते हैं, वह काफी महंगा पड़ता है। दोनों दोस्तों ने किसानों विशेषकर सीमांत किसानों को उनके हालात से उबारने के लिए ही अनाज बैंक का मॉडल विकसित किया। यह अनाज बैंक किसानों को उनके घर तक उपलब्ध है।
अपने बचपन के सपने को साकार करने के लिए किशोर ने अपने मित्र के साथ मिलकर काम करना शुरू किया। अप्रैल 2012 में कंपनी बनाई। कुछ समय मार्केट सर्वे किया। उसके बाद मई, 2013 में एक वेयरहाउस को लीज पर लिया और छोटे किसानों को उसमें अनाज जमा करने को प्रेरित किया। अनाज की गुणवत्ता के आधार पर वे लोग एक खाता उपलब्ध कराते थे और उसमें पासबुक सदृश्य अनाज के बारे में लिखा रहता था। इससे खरीदारों को भी सुविधा हुई। कई किसानों के पास दौड़ने के बाद उन्हें मुश्किल से 50 बोरी अनाज उपलब्ध हो पाता था लेकिन अनाज बैंक बन जाने के बाद खरीददारों को एक जगह पर सैकड़ों बोरे अनाज आसानी से मिलने लगा।
वर्ष 2015 तक सब कुछ ऑफ़लाइन उपलब्ध था लेकिन मार्च 2015 में आविष्कार कैपिटल द्वारा चार करोड़ की पूंजी मिलने के बाद उनके सपनों को पंख लग गए। नई तकनीक का उपयोग कर उन लोगों ने ऑनलाइन पासबुक बनाई, जिससे किसान एक क्लिक पर कोई भी ट्रांजैक्शन कर सकता था। नवंबर 2016 में उन लोगों ने एक टेक प्लेटफार्म भी शुरू किया।
कृषि-वित्तपोषण, कृषि-खरीद, कमोडिटी ट्रेडिंग और वेयर हाउसिंग में अपनी व्यापक विशेषज्ञता के लिए जाने जाने वाले किशोर ने कृषि परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय और वैश्विक कॉर्पोरेट संस्थाओं के साथ सहयोग किया और कृषि-वस्तुओं की खरीद, भंडारण और वेयर हाउसिंग में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
















