मन की बात: छठ महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतीक: PM मोदी
July 21, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

मन की बात: छठ महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतीक: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में रविवार को छठ महापर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतीक बताया।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Mahak Singh
Oct 26, 2025, 04:57 pm IST
in भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली, (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में रविवार को छठ महापर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि छठ के घाटों पर समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा होता है, जो भारत की सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि यदि अवसर मिले तो इस पर्व में जरूर भाग लें। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय समाज की एकता और समरसता का भी प्रतीक है।

‘मन की बात’ के 127वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने त्योहारों, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं की पहल, देसी नस्ल के कुत्तों को बढ़ावा, संस्कृत का पुनर्जागरण और राष्ट्रगीत ‘वन्देमातरम्’ जैसे विषय शामिल किए। प्रधानमंत्री छठ महापर्व की शुभकामनाएँ देते हुए बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के लोगों को विशेष बधाई दी और देशवासियों से पर्व में हिस्सा लेने का आग्रह किया।

हैदराबाद का स्वतंत्रता संग्राम और कोमरम भीम

हैदराबाद के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने निजाम के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाले कोमरम भीम के बारे में बताया। 22 अक्टूबर को ही उनकी जन्म-जयंती मनाई गई थी। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के प्रारंभ में हैदराबाद में निज़ाम के अत्याचार के खिलाफ देशभक्तों का संघर्ष चरम पर था। गरीब और आदिवासी समुदायों पर अत्याचार और भारी कर लगाए जा रहे थे। उस समय कोमरम भीम ने सिद्दीकी नामक अधिकारी को चुनौती दी और निज़ाम के अत्याचार के खिलाफ कई वर्षों तक संघर्ष किया।

उन्होंने बताया कि उस दौर में जब निज़ाम के खिलाफ एक शब्द बोलना भी गुनाह था। उस नौजवान ने सिद्दीकी नाम के निज़ाम के एक अधिकारी को खुली चुनौती दे दी थी। निज़ाम ने सिद्दीकी को किसानों की फसलें जब्त करने के लिए भेजा था लेकिन अत्याचार के खिलाफ इस संघर्ष में उस नौजवान ने सिद्दीकी को मौत के घाट उतार दिया। वे गिरफ़्तारी से बच निकलने में भी कामयाब रहे। निज़ाम की अत्याचारी पुलिस से बचते हुए वे सैकड़ों किलोमीटर दूर असम जा पहुंचे। कोमरम भीम ने 40 वर्ष की आयु में कई आदिवासी समाजों में अमिट छाप छोड़ी। निज़ाम की सत्ता के लिए वे बहुत बड़ी चुनौती बन गए थे। 1940 में निज़ाम के लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी। उनके जीवन को प्रेरणादायक बताते हुए प्रधानमंत्री ने आग्रह किया कि युवा उनके बारे में अधिक से अधिक जानने का प्रयास करें।

स्वदेशी नस्ल के श्वानों को बढ़ावा देने पर जोर

प्रधानमंत्री ने आज सुरक्षा बलों में भारतीय नस्ल के श्वानों को अपनाने और प्रशिक्षित करने की सराहना की। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पहले उन्होंने देशवासियों और सुरक्षा बलों से भारतीय नस्ल के कुत्तों को अपनाने का आग्रह किया था। बीएसएफ और सीआरपीएफ ने अपने दस्तों में भारतीय नस्ल के कुत्तों की संख्या बढ़ाई है। बीएसएफ का नेशनल ट्रेनिंग सेंटर ग्वालियर के टेकनपुर में है। यहां रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड और अन्य भारतीय नस्लों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन श्वानों के लिए प्रशिक्षण मैनुअल को भी संशोधित किया गया है ताकि उनकी विशेष क्षमताओं को उजागर किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारतीय नस्ल के श्वान अपने परिवेश और परिस्थितियों के अनुसार जल्दी ढल जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के बेंगलुरु स्थित डॉग ब्रीडिंग और ट्रेनिंग स्कूल में मोंग्रेल्स, मुधोल हाउंड, कोम्बाई और पांडिकोना जैसी भारतीय नस्लों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लखनऊ में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में मुधोल हाउंड रिया ने विदेशी नस्लों को पीछे छोड़कर पहला पुरस्कार जीता था। न्होंने बताया कि अब बीएसएफ ने अपने श्वानों को विदेशी नामों के बजाय भारतीय नाम देने की परंपरा शुरू की है। हमारे यहाँ के देशी श्वान ने अद्भुत साहस भी दिखाया है। पिछले वर्ष, छतीसगढ़ के माओवाद से प्रभावित रहे क्षेत्र में गश्त के दौरान सीआरपीएफ के एक देसी श्वान ने 8 किलोग्राम विस्फोटक का पता लगाया था।

भारत का राष्ट्रगीत ‘वन्देमातरम्’

भारत का राष्ट्रगीत 7 नवंबर को ‘वन्देमातरम्’ 150 वर्ष पूरा करने जा रहा है। इस विषय पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत मातृभूमि के प्रति भाव और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार गाया। पीएम ने इस अवसर को यादगार बनाने के लिए #VandeMatram150 के तहत सुझाव भेजने का आग्रह किया। न्होंने कहा, “वन्देमातरम्’ भले ही 19वीं शताब्दी में लिखा गया था लेकिन इसकी भावना भारत की हजारों वर्ष पुरानी अमर चेतना से जुड़ी थी। वेदों ने जिस भाव को “माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:” कहकर भारतीय सभ्यता की नींव रखी थी। बंकिमचंद्र जी ने ‘वन्देमातरम्’ लिखकर मातृभूमि और उसकी संतानों के उसी रिश्ते को भाव विश्व में एक मंत्र के रूप में बांध दिया था।”

सरदार पटेल की जयंती और रन फॉर यूनिटी

प्रधानमंत्री ने कहा कि 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने का आग्रह किया। सरदार पटेल ने आधुनिक भारत के ब्यूरोक्रैटिक फ्रेमवर्क की नींव रखी और देश की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

संस्कृत पुनर्जागरण और युवा पहल

प्रधानमंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा को नई प्राणवायु देने के लिए युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी सभ्यता की पहचान होती है और युवाओं के प्रयास से संस्कृत फिर से लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिए। जैसे यश सालुंड्के क्रिकेट कमेंट्री संस्कृत में करते हैं, जबकि कमला और जान्हवी अध्यात्म और संगीत पर सामग्री प्रस्तुत करती हैं। ‘संस्कृत छात्रोहम्’ चैनल शिक्षण और हास-परिहास के माध्यम से संस्कृत का प्रचार कर रहा है। भावेश भीमनाथनी श्लोक और आध्यात्मिक सिद्धांत साझा करते हैं।

अम्बिकापुर: प्लास्टिक कचरा और गार्बेज कैफे की पहल

मन की बात में प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में प्लास्टिक कचरे को लेकर एक अनोखी पहल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अम्बिकापुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन द्वारा चलाए जा रहे गार्बेज कैफे में प्लास्टिक कचरा लाने पर मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यदि कोई व्यक्ति एक किलो प्लास्टिक लाता है तो उसे दोपहर या रात का खाना मिलता है और आधा किलो लाने पर नाश्ता। इस पहल से शहर की स्वच्छता में सुधार के साथ-साथ लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।

बेंगलुरु : झीलों और पर्यावरण संरक्षण का अभियान

एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा के झीलों को पुनर्जीवित करने और पेड़ लगाने के अभियान की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में 40 कुँओं और 6 झीलों को पुनर्जीवित किया। इस मिशन में स्थानीय लोगों और कॉर्पोरेट्स को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे देश में बदलाव और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक मिसाल बताया।

गुजरात : मैंग्रोव प्लांटेशन और समुद्री जीवन

गुजरात के धोलेरा और कच्छ में मैंग्रोव प्लांटेशन का कार्य तेजी से जारी है। धोलेरा में पांच साल पहले शुरू हुए इस अभियान में अब 3,500 हेक्टेयर में मैंग्रोव फैल चुके हैं। इसके बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका सीधा असर समुद्री जीव-जंतुओं पर देखा जा रहा है, जैसे कि डॉल्फ़िन, केकड़े और प्रवासी पक्षी। कच्छ के कोरी क्रीक में मैंग्रोव लर्निंग सेंटर भी स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा, “पेड़-पौधों की, वृक्षों की यही तो खासियत होती है। जगह चाहे कोई भी हो, वो हर जीव मात्र की बेहतरी के लिए काम आते हैं। हमारे ग्रन्थों में कहा गया है –धन्या महीरूहा येभ्यो, निराशां यान्ति नार्थिनः।। अर्थात्, वो वृक्ष और वनस्पतियाँ धन्य हैं, जो किसी को भी निराश नहीं करते। हमें भी चाहिए, हम जिस भी इलाके में रहते हैं, पेड़ अवश्य लगाएं। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अभियान को हमें और आगे बढ़ाना है।”

भारतीय कॉफी: विविधता

प्रधानमंत्री ने ओडिशा के कोरापुट में कॉफी की खेती बढ़ाने का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग कॉफी के प्रति अपने जुनून के कारण इस क्षेत्र में आए और सफल हो रहे हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में कॉफी की खेती हो रही है, जैसे कर्नाटक के चिकमंगलुरु, कुर्ग, हासन; तमिलनाडु के नीलगिरी और अन्नामलाई; केरल के त्रावणकोर और मालाबार। भारत की कॉफी वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हो रही है।

Topics: Chhath Puja 2025Modi Mann ki baatपीएम मोदी मन की बातPM Modiमन की बातबिहार चुनाव 2025Bihar Election 2025
एजेंसी
एजेंसी
हिंदुस्थान समाचार (प्रतिष्ठत समाचार एजेंसी) [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी

PM मोदी बोले- भगवान जगन्नाथ की कृपा से लोगों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो

मेलबर्न मीट्स मोदी में करनाल का लाल छाया, PM मोदी ने सिर पर हाथ रखकर दिया आशीर्वाद

हरित क्रांति की ओर कदम: PM मोदी 17 जुलाई को करेंगे जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ

क्यों ट्रंप ने कहा- ‘मोदी सोते नहीं…वो बिल्कुल मेरे जैसे’; US राजदूत ने सुनाया मजेदार किस्सा

सुनील शेट्टी ने कहा कि वह पीएम मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं।

सुनील शेट्टी बोले- प्रधानमंत्री मोदी में कुछ तो मैजिकल है

PM मोदी ने कहा-संविधान हत्या दिवस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की प्रेरणा देता है

Load More

ताज़ा समाचार

Delhi Jantar Mantar Protests vs National Sentiment Skyroot Vikram 1 Parliament Indian Democracy Panchjanya

क्या जंतर-मंतर पर जुटती भीड़ ही देश का सच है? जानिए विरोध प्रदर्शन और ‘राष्ट्रीय भावना’ के बीच का पूरा फर्क!

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट

“लाइट, कैमरा और आंदोलन”: छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर फिर एक्टिव हुई टूलकिट? जानिए जंतर-मंतर के पीछे का पूरा सच!

Punjab and Haryana High Court PIL against Sacrilege Law 2026

पंजाब के अबोहर में लहराया भाजपा का परचम: हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुए चुनाव में AAP को झटका, मेयर पद पर कब्जा!

Foreign Tourists Praise India Safety Over London Phone Theft Medical Tourism Free Rabies Vaccine Digital Payment UPI Panchjanya

“लंदन से ज्यादा सुरक्षित है भारत”, विदेशी महिला पर्यटक ने सोशल मीडिया पर शेयर किए हैरान करने वाले आंकड़े!

प्रतीकात्मक चित्र

Madarsa Scandal: कागजों पर चल रहे मदरसे, हिंदुओं के बच्चों का दिखाया दाखिला, MP के मदरसों में बाल अधिकारों का उल्लंघन

Explainer। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नेपाल ने 1 रुपए के सिक्के से हटाया ‘कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा’

Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Haridwar Kanwar Yatra 2026 Review Meeting Mela Bhawan Panchjanya

कांवड़ यात्रा 2026: 30 जुलाई से शुरू होगी यात्रा, हरिद्वार में सीएम धामी ने दिए सुरक्षा और सुविधाओं के सख्त निर्देश!

शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल: राजनीति में शहीद दिवस पर तीन दलों का दावा

Central University of Jharkhand CUJ Ranchi Vanvasi Kalyan Kendra Medhavi Chhatra Abhinandan Samaroh Satyendra Singh ISRO Panchjanya

रांची में वनवासी कल्याण केंद्र का भव्य समारोह: ISRO से विदेशों तक लहरा रहा विद्यार्थियों का परचम, मेधावी छात्र सम्मानित

द ओडिसी

वोकिज्म से ग्रस्त ‘हॉलीवुड’: पहचान की राजनीति, विविधता और प्रतिनिधित्व की नई बहस – ‘द ओडिसी’ एक विमर्श

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies